कांग्रेस पार्टी ने वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश का स्वागत किया है। पार्टी ने इस संशोधन को सिर्फएक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि एक वैचारिक हमले के रूप में परिभाषित किया है। कांग्रेस प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा कि केंद्र सरकार जिसे सुधार कह रही है, वह असल में धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों पर हमला है।
संविधान के अनुच्छेद 26 का हवाला
डॉ. सिंघवी ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 26 हर नागरिक और धार्मिक समूह को अपने धर्म की स्वतंत्रता के साथ-साथ उससे संबंधितसंस्थाओं को संचालित करने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि वक्फ अधिनियम में किया गया बदलाव, जैसे कि वक्फ बोर्ड में चुनाव की जगह100 प्रतिशत नामांकन का प्रावधान, स्वायत्तता के सिद्धांत का उल्लंघन है।
धारा 9 और 14 पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सिंघवी ने वक्फ अधिनियम की धारा 9 और 14 का ज़िक्र करते हुए बताया कि कैसे इन प्रावधानों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की बहुलता का प्रावधानकरके धार्मिक संस्थाओं की आत्मनिर्भरता को कमजोर किया गया है। उन्होंने बताया कि धारा 9 के अनुसार, केंद्रीय वक्फ परिषद के 22 में से 12 सदस्य गैर मुस्लिम हो सकते हैं, वहीं धारा 14 वक्फ बोर्ड में 11 में से सात गैर मुस्लिम सदस्यों की अनुमति देता है। सुप्रीम कोर्ट ने इन बिंदुओं परफिलहाल रोक लगा दी है।
गैर लोकतांत्रिक प्रावधानों की आलोचना
उन्होंने बताया कि नए कानून के अनुसार, यदि वक्फ बोर्ड के सभी सदस्य अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित भी कर दें, तब भी उसे सरकारकी अनुमति के बिना नहीं हटाया जा सकता। साथ ही वक्फ बोर्ड का सीईओ गैर मुस्लिम हो सकता है, जिसे सिंघवी ने “हास्यास्पद” करार दिया।
वक्फ संपत्तियों की यथास्थिति पर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्टता
सिंघवी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अब तक घोषित या पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। साथ ही अधिनियममें कलेक्टर द्वारा एक शिकायत के आधार पर संपत्ति को विवादित घोषित करने के प्रावधान की भी आलोचना की गई, क्योंकि इसमें कोई समय सीमाया स्पष्ट प्रक्रिया तय नहीं की गई है।
प्रतापगढ़ी का बयान – अगली सुनवाई में और राहत की उम्मीद
राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की जीत बताया। उन्होंने कहा कि विपक्षद्वारा संसद और जेपीसी में दिए गए सुझावों को अनदेखा कर यह कानून पारित किया गया था। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अंतरिम रोक लगाई है, तो आगे की सुनवाई में और राहत मिलने की संभावना है।
कांग्रेस की प्रतिबद्धता – संविधान की रक्षा में अडिग
प्रतापगढ़ी ने यह भी कहा कि कांग्रेस हमेशा संविधान को बनाने और उसकी रक्षा करने के लिए खड़ी रही है और आगे भी खड़ी रहेगी। उन्होंने इस कानूनको सिर्फ एक समुदाय का मुद्दा न मानते हुए इसे संविधान की आत्मा पर हमला करार दिया।