25 अप्रैल 2025 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें भारत के संविधान निर्माता औरसमाज सुधारक डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर कई प्रमुख व्यक्तियों ने भाग लिया और डॉ. अंबेडकर के विचारों औरयोगदानों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम न केवल अंबेडकर के विचारों को पुनर्जीवित करने का एक अवसर था, बल्कि यहसमकालीन सामाजिक और राजनीतिक विमर्श के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच बना।
डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन और कार्य भारतीय समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने न केवल संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिकानिभाई, बल्कि समाज में व्याप्त जातिवाद और असमानता के खिलाफ भी आवाज उठाई। अंबेडकर ने शिक्षा को समाज के उत्थान का एक महत्वपूर्णसाधन माना और उन्होंने अपने जीवन में इसे प्राथमिकता दी। उनका मानना था कि शिक्षा ही एकमात्र ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा समाज के कमजोरवर्गों को सशक्त बनाया जा सकता है।
अंबेडकर ने भारतीय समाज में व्याप्त जातिवाद के खिलाफ संघर्ष किया और उन्होंने दलितों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उनके विचारों ने नकेवल दलितों को जागरूक किया, बल्कि समस्त समाज को एक नई दिशा दी। अंबेडकर का यह संदेश आज भी प्रासंगिक है, और उनके विचारों कोआगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
रामदास आठवले की उपस्थिति
इस विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के नेता रामदास आठवले ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंनेअपने चिरपरिचित तेज़-तर्रार और शायरीपूर्ण अंदाज़ में डॉ. अंबेडकर के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डाला। आठवले ने कहा कि डॉ. अंबेडकर केवलदलित समाज के उद्धारक नहीं थे, बल्कि वे पूरे भारत के लिए सामाजिक न्याय के प्रतीक थे।
आठवले ने अंबेडकर के विचारों को आज की राजनीति और समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर का सपना एक ऐसाभारत था, जहां सभी को समान अधिकार और अवसर मिलें। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में हमें अंबेडकर के विचारों को अपनाने कीआवश्यकता है, ताकि हम एक समतामूलक समाज की दिशा में आगे बढ़ सकें।
रवि कुंडली का संबोधन
कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष रवि कुंडली ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने अंबेडकर की विराट विचारधारा की सराहना करते हुए रामदास आठवलेको उनके “विचारों का उत्तराधिकारी” बताया। कुंडली ने कहा, “रामदास जी को मैं डॉ. अंबेडकर का बेटा मानता हूं,” जो पूरे सभागार में गूंज उठा औरलोगों ने इसका जोरदार स्वागत किया।
कुंडली ने अपने भाषण में अंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में हमें अंबेडकर केसिद्धांतों को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि हम एक समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज की दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने यह भी कहा किअंबेडकर का सपना केवल दलितों का नहीं, बल्कि समस्त समाज का सपना है।
देश–विदेश के मुद्दों पर रामदास आठवले की मुखरता
कार्यक्रम के दौरान, रामदास आठवले ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हाल ही में हुए हमले पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने पाकिस्तान के प्रतिकड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। उनके इस भाषण नेउपस्थित जनसमूह में नया उत्साह भर दिया और अंबेडकर की मूल भावना—”न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता”—को जीवंत कर दिया।
आठवले ने यह भी कहा कि हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एक मजबूत राष्ट्र है और हमें अपने देशकी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके इस भाषण ने उपस्थित जनसमूह में एक नई ऊर्जा भर दी और सभी कोएकजुट होने की प्रेरणा दी।