ब्रिटिश संसद में उठा भारत-पाक मुद्दा
ब्रिटिश संसद में मंगलवार को भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव और पहलगाम हमले को लेकर गहन चर्चा हुई। इस दौरान ब्रिटेन के विदेशमंत्री डेविड लैमी ने दोनों देशों के बीच संपर्क बनाए रखने और कूटनीतिक स्तर पर संवाद को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि संघर्ष समाधानके लिए सैन्य के बजाय राजनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
पूर्व मंत्री प्रीति पटेल का तीखा सवाल
ब्रिटेन की पूर्व विदेश मंत्री प्रीति पटेल ने पाकिस्तान सरकार से सवाल किया कि वह अपने देश में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को समाप्त करने के लिएक्या प्रयास कर रही है और क्या इस पर ब्रिटेन की कोई भूमिका बनती है। इसके उत्तर में लैमी ने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन भारत और पाकिस्तान दोनों केविदेश मंत्रियों से संवाद कर रहा है और उनका उद्देश्य दोनों देशों को संवाद और सहयोग की राह पर लाना है।
ब्रिटेन ने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की
डेविड लैमी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि 26 निर्दोष लोगों की हत्याबेहद भयावह और अमानवीय कृत्य था। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन आतंकवाद के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करता रहेगाऔर इस दिशा में भारत-पाक को समर्थन देने के लिए तैयार है।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष और संघर्ष विराम
22 अप्रैल के हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में स्थित आतंकी शिविरों को जिम्मेदार ठहराया और जवाबी कार्रवाई के तहत 6-7 मई की रात नौआतंकी ठिकानों पर सैन्य हमले किए। इन हमलों में कई आतंकियों के मारे जाने की खबर है। इससे भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम परपहुंच गया था, लेकिन 10 मई को दोनों देशों ने संघर्ष विराम का ऐलान कर दिया।
संघर्ष विराम बनाए रखने में ब्रिटेन की भूमिका
ब्रिटिश विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम बनाए रखने के लिए दोनों देशों के साथमिलकर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि आतंकवाद से निपटने के लिए अमेरिका, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से भी चर्चा जारी है ताकिक्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। लैमी ने कहा कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मसला है, जिसे भारत और पाकिस्तान को आपसी बातचीत से सुलझानाचाहिए।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की उम्मीद
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत-पाक संघर्ष विराम का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि यह समझौता आगे भी बरकरार रहेगा।उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने हालिया संकट को जिस समझदारी से सुलझाया है, वही रुख अन्य लम्बे मुद्दों को सुलझाने में भी दिखाना चाहिए।