हरियाणा के अशोका विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर और राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख अली खान महमूदाबाद को महिला सैन्य अफसरोंकर्नल कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है. सुप्रीम कोर्ट नेमहमूदाबाद को सीजेएम, सोनीपत की संतुष्टि के लिए जमानत बांड भरने को भी कहा है. साथ ही अली खान महमूदाबाद को निर्देश दिया है कि वे हदोनों पोस्ट से संबंधित कोई भी ऑनलाइन लेख नहीं लिखेंगे या कोई भी ऑनलाइन भाषण नहीं देंगे जो जांच का विषय है.
सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें भारतीय धरती पर आतंकवादी हमलों या हमारे राष्ट्र द्वारा दी गई जवाबी प्रतिक्रिया के बारे में कोई भी टिप्पणी करनेसे रोक दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने तीन आईपीएस अधिकारियोंवाली एक एसआईटी के गठन का भी आदेश दिया है. इस समिति में एक महिला अधिकारी भी शामिल होगी जो राज्य से बाहर की होगी. सुप्रीम कोर्टने निर्देश दिया है कि 24 घंटे के भीतर एसआईटी का गठन किया जाए, एसोसिएट प्रोफेसर जांच में शामिल होंगे और जांच में पूरा सहयोग करेंगे. बतादें कि इससे पहले, महिला सैन्य अफसरों पर अमर्यादित टिप्पणी करने के मामले में अशोका विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रो. अली खान महमूदाबादको 27 मई तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था.
एमआईसी आजाद सिंह की कोर्ट में किया गया पेश
रिमांड अवधि पूरी होने के बाद पुलिस ने प्रो. अली को जेएमआईसी आजाद सिंह की कोर्ट में पेश किया lE। पुलिस ने प्रोफेसर का सात दिन कीरिमांड और मांगी, लेकिन कोर्ट ने मांग खारिज कर दी. अदालत ने पुलिस को 60 दिनों में केस का चालान पेश करने की हिदायत दी थी इस दौरानपुलिस ने दलील दी थी कि प्रो. अली से बरामद लैपटॉप व मोबाइल डाटा को रिकवर करने के बाद उसकी जांच करनी है पासपोर्ट व खातों से लेनदेनकी जांच भी करनी है दलीलें सुनने के बाद भी कोर्ट ने पुलिस रिमांड की मांग खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा, अगर पुलिस को लगता है कि रिमांड कीजरूरत है तो वह नए सिरे से प्रार्थना पत्र दायर करे. हरियाणा राज्य महिला आयोग ने की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने हाल ही में एसोसिएट प्रोफेसर कोनोटिस भेजकर उनकी टिप्पणियों पर सवाल उठाया था. हालांकि महमूदाबाद ने कहा था कि उनकी टिप्पणियों को गलत समझा गया है. उन्होंनेअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल किया है. राज्य के डीजीपी को 16 मई को लिखे पत्र में एचएससीडब्ल्यू ने प्रथमदृष्टया साक्ष्य और मिसाल के आधार पर महमूदाबाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत भी की थी.