NEWS अब तक

मेक इन गुजरात या सिर्फ असेंबली का खेल? – उदय भानु ने उठाए बड़े सवाल
प्रधानमंत्री मोदी ने 26 मई को गुजरात के दाहोद में लोकोमोटिव इंजन प्लांट का उद्घाटन किया। यह Siemens कंपनी के साथ 26,000 करोड़रुपए के करार का हिस्सा है, जिसमें 9,000 हॉर्सपावर के 1200 इंजन बनाए जाने हैं। सरकार ने दावा किया था कि यह पूरी मैन्युफैक्चरिंग भारत मेंहोगी, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।
असली मैन्युफैक्चरिंग नहीं, सिर्फ असेंबली- दाहोद प्लांट में सिर्फ असेंबली, टेस्टिंग और कमीशनिंग हो रही है। असली इंजन पार्ट्स Siemens कीविदेशी फैक्ट्रियों में बनाए जा रहे हैं। ऐसा ही उदाहरण हमने Apple फोन में देखा – भारत में असेंबली हो रही है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग नहीं।


उदय भानु के 7 बड़े सवाल

टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी क्यों नहीं थी?
बाकी कंपनियों को बराबरी का मौका क्यों नहीं मिला?
दाहोद में पूरी मैन्युफैक्चरिंग क्यों नहीं हुई?
Siemens को सबसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट क्यों मिला-जब रेल मंत्री खुद उनके पूर्व अधिकारी रह चुके हैं?
सरकार ने 2022 में जो वादे किए थे, वे बदले क्यों गए?
स्टाफ को मैन्युफैक्चरिंग की ट्रेनिंग देने की बात अब सिर्फ असेंबली तक क्यों सीमित रह गई?
क्या “मेक इन इंडिया” सिर्फ दिखावे का नारा बनकर रह गया है?


मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गिरती सच्चाई – 2004-14 में मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ 7.4% थी, अब घटकर 3.1% रह गई है,रोजगार में मैन्युफैक्चरिंग कायोगदान 2013 में 11.6% था, जो 2023 में घटकर 10.6% हो गया।
GDP में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान 25% का लक्ष्य था, लेकिन अब सिर्फ 13.9% रह गया है।
उदय भानु ने सही कहा – देश को सिर्फ असेंबल करने वाला नहीं, वास्तविक निर्माता बनना होगा।
सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे मामले पर पारदर्शिता लाए और संसदीय जांच कराए, ताकि जनता के सामने सच आ सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *