दिल्ली चुनावों में हुई कुछ घटनाओं ने ईवीएम और वोटिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दौरान कई मुद्दों को उठाया गया, जिनमें गलत मतगणना, वोटर टर्नआउट में अचानक बढ़ोतरी, और काउंटिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी की बातें सामने आईं। इस सबके बीच, चुनाव आयोग ने अपनी सफाई दी और इन सवालों का जवाब दिया।
चुनाव के दौरान उठे मुद्दे
दिल्ली चुनाव में कुछ राजनीतिक पार्टियों और उम्मीदवारों ने ईवीएम के मैनिपुलेट होने और काउंटिंग में मिसमैच होने का आरोप लगाया। इसके अलावा, यह भी कहा गया कि कुछ लोकेलिटी या ग्रुप के नाम सूची से हटा दिए गए थे और वोटिंग के बाद वोटर टर्नआउट में असामान्य बढ़ोतरी हुई थी।
वोटर लिस्ट और सर्वे प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट में किसी प्रकार का डिलिशन (वोटरों का नाम कटना) नहीं हो सकता है। हर साल एक सर्वे किया जाता है, जो अक्टूबर में शुरू होता है, और इसमें हर पार्टी को दो-दो कॉपी दी जाती है। यदि किसी को आपत्ति हो तो वह इसका समाधान कर सकता है। पोलिंग स्टेशन पर हर गांव में ड्राफ्ट की कॉपी पब्लिश की जाती है, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहती है।
ईवीएम हैकिंग पर आयोग का स्पष्टीकरण
ईवीएम की हैकिंग के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कहा कि ईवीएम को चुनाव से 7-8 दिन पहले कमीशन किया जाता है। इसके बाद एजेंट के सामने मॉक पोल किया जाता है, और पोलिंग के दिन ईवीएम को सील किया जाता है। काउंटिंग के दौरान भी ईवीएम को पोलिंग एजेंट्स की मौजूदगी में खोला जाता है। आयोग का कहना है कि ईवीएम को हैक करना असंभव है और इसमें कोई वायरस या बग नहीं हो सकता है।
एलन मस्क पर अप्रत्यक्ष निशाना
चुनाव आयोग ने बिना नाम लिए आईटी के ग्लोबल एक्सपर्ट एलन मस्क पर भी निशाना साधा। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि एक एक्सपर्ट ने दावा किया था कि ईवीएम हैक हो सकती है, जबकि भारत में काउंटिंग एक ही दिन में हो जाती है, जबकि अन्य देशों में इसे करने में महीनों का समय लग सकता है।