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आज एक बार फिर ओडिशा सुर्खियों में है, लेकिन यह सुर्खियाँ किसी विकास कार्य, शिक्षा या रोजगार के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं पर हो रहे बढ़तेअपराधों की वजह से हैं। यह एक चिंताजनक स्थिति है जो पूरे राज्य और देश के लिए एक चेतावनी है।
बालासोर ज़िले के फकीर मोहन कॉलेज में पढ़ने वाली एक 20 वर्षीय छात्रा ने अपने विभागाध्यक्ष द्वारा यौन शोषण के दबाव से तंग आकर खुद कोकॉलेज परिसर में आग लगा ली। यह छात्रा बहादुरी से लगातार आवाज उठाती रही, कॉलेज प्रशासन, सांसद और मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचानेकी कोशिश करती रही, लेकिन जब कहीं से कोई मदद नहीं मिली तो उसने अपनी जान दांव पर लगा दी। यह घटना ओडिशा के विफल होते शासनतंत्र और महिला सुरक्षा के झूठे दावों की असलियत को उजागर करती है। एक छात्रा, जो बीजेपी-आरएसएस की छात्र इकाई से भी जुड़ी थी, वह भीसुरक्षित नहीं रही, तो बाकी बेटियों की स्थिति की कल्पना करना ही डरावना है।

हमारी मांगें
मुख्यमंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जिस शासन में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, वहां उनका पद पर बनेरहना लोकतांत्रिक और नैतिक मूल्यों के खिलाफ है।
इस मामले में न्यायिक जांच हो।
एक स्वतंत्र न्यायिक जांच के ज़रिए सच्चाई सामने लाई जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। इस मामले को किसी भी हाल में दबने नहीं दियाजाना चाहिए।
प्रधानमंत्री अपनी चुप्पी तोड़ें और जवाब दें। प्रधानमंत्री जी अक्सर विदेशों में भाषण देते हैं, लेकिन देश की बेटियों के साथ हुए अत्याचार पर मौन साधलेते हैं। ओडिशा की जनता जानना चाहती है कि उनकी बेटियों के लिए प्रधानमंत्री की संवेदना कहां है।

यह घटना एक वेकअप कॉल है
यह केवल एक छात्रा की लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक वेकअप कॉल है। ओडिशा में आज स्कूल की बच्चियां गर्भवती हो रही हैं, कॉलेज की छात्राएं जान दे रही हैं और महिलाएं हर स्थान पर असुरक्षित महसूस कर रही हैं। यह किस तरह का ‘सुशासन’ है? महिला सुरक्षा केवलघोषणाओं और भाषणों से नहीं आती। उसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, संवेदनशीलता और जवाबदेही चाहिए। सोफिया फिरदौस ने यह मामलासिर्फ एक राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि समाज की आत्मा पर लगे घाव के रूप में उठाया है। अब यह जिम्मेदारी हर नागरिक की है कि वह आवाजउठाए, अन्याय के खिलाफ खड़ा हो और बेटियों के हक में न्याय की मांग करे।
बीजेपी सरकार को अब जवाब देना ही होगा और हमारी मांगों पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी।

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