Skip to main content

NEWS अब तक

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने एक बार फिर कांग्रेस पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधाहै। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी ने जो हाल ही में अपने बहनोई रॉबर्ट वाड्रा के विरुद्ध चल रही विधिक कार्रवाई पर बयान दिया है, वह स्पष्ट रूप से कुंठा की अभिव्यक्ति है। त्रिवेदी ने कहा कि यह विषय राजनीतिक नहीं बल्कि पूर्णतः पारिवारिक है, लेकिन राहुल गांधी इसे संसदऔर मीडिया में राजनीतिक रंग देकर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार से अर्जित की गई संपत्ति को बचाने के लिए स्वयंजमानत पर चल रहे नेता राहुल गांधी सामने आ गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में अब एक-दूसरे के भ्रष्टाचार को ढकने का प्रयास किया जा रहा है।


त्रिवेदी ने प्रश्न किया कि कांग्रेस की राजनीति का मूल आधार क्या है – भाई लोकसभा में, मां राज्यसभा में, बहन लोकसभा की दावेदार और जीजा केपास बेशकीमती ज़मीनें। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि परिवार की सत्ता के केंद्र में रहने की योजना के चलते अब इनका लक्ष्य है कि देश की सारीभूमि और सत्ता उन्हीं के पास केंद्रित हो जाए। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व से यह भी पूछा कि जब यह स्पष्ट रूप से पारिवारिक मामला है, तो इसमेंराजनीतिक हस्तक्षेप क्यों हो रहा है? क्या नेता प्रतिपक्ष के पद का उपयोग अपने पारिवारिक मामलों को सार्वजनिक मंच पर उठाने के लिए कियाजाना उचित है?


सुधांशु त्रिवेदी ने यह भी कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह हर विषय को नकारात्मक दृष्टि से देखती है। उन्होंने उदाहरण देते हुएबताया कि सरकार ने आतंकवादी संगठन टीआरएफ को प्रतिबंधित किया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन कांग्रेस ने उसपर भी राजनीति की।


उन्होंने कहा कि विदेशों की यात्रा करने वाले कांग्रेस नेता विदेश नीति की बुनियादी समझ से भी वंचित हैं। संसद का सत्र बस दो दिन दूर है, लेकिनउससे पहले ही इंडी गठबंधन में अंदरूनी टकराव और बिखराव सामने आने लगा है। डॉ. त्रिवेदी ने आशा व्यक्त की कि विपक्ष सकारात्मक दृष्टिअपनाकर संसद सत्र का उपयोग प्रभावी ढंग से करेगा, लेकिन अभी की स्थिति को देखकर लगता है-रात है इतनी मतवालीतो सुबह का आलमक्या होगा।


इस प्रकार, सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस की पारिवारिक राजनीति, सत्ता की लालसा और विपक्ष की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जो आने वालेसमय में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *