
दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने लंदन में स्थित प्रसिद्ध ब्रिटिश लाइब्रेरी का दौरा किया। उन्होंने वहां भारत के 1900 से 1930 के बीचके विधायी रिकॉर्ड, पुराने दस्तावेज़ों और दुर्लभ तस्वीरों का अध्ययन किया। यह दौरा ब्रिटिश हाई कमीशन द्वारा खास तौर पर आयोजित किया गयाथा। इस यात्रा का उद्देश्य भारत के लोकतांत्रिक और विधायी इतिहास को समझना और उसे भविष्य की पीढ़ियों तक पहुँचाने के प्रयासों को आगेबढ़ाना था।
विजेन्द्र गुप्ता ने ब्रिटिश लाइब्रेरी को भेंट की “Modi@20” पुस्तक
अपने दौरे के दौरान विजेन्द्र गुप्ता ने ब्रिटिश लाइब्रेरी की इंटरनेशनल ऑफिस मैनेजर सेसिल कम्यूनल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन और कार्यों परआधारित पुस्तक “Modi@20” भेंट की। उन्होंने लाइब्रेरी द्वारा भारत के विधायी इतिहास को सहेजने और साझा करने के लिए किए जा रहे प्रयासोंकी सराहना की। इस दौरान ब्रिटिश हाई कमीशन की सदस्य मिस सहारा कुरैशी भी उपस्थित रहीं। गुप्ता ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच इस तरहका सांस्कृतिक और ज्ञान से जुड़ा सहयोग दोनों देशों के लोकतांत्रिक संबंधों को और मजबूत करेगा।
भारत के विधायी इतिहास से जुड़ी दुर्लभ जानकारियों का अध्ययन
ब्रिटिश लाइब्रेरी में गुप्ता ने उन पुराने अभिलेखों का अध्ययन किया जो इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल, सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली, और स्वतंत्रभारत की दिल्ली विधानसभा से जुड़े हैं। इन दस्तावेज़ों में उस समय के कानून, विधेयक, भाषण और संसदीय चर्चाओं से जुड़ी जानकारियाँ शामिल हैं।श्री गुप्ता ने कहा कि इन रिकॉर्डों से पता चलता है कि कैसे भारत में लोकतंत्र की नींव रखी गई और समय के साथ उसका विकास हुआ लाइब्रेरी केविशेषज्ञों ने उन्हें यह भी बताया कि इन दस्तावेज़ों को आधुनिक तकनीक और डिजिटलीकरण प्रणाली से सुरक्षित रखा जा रहा है ताकि आने वाले वर्षोंतक यह ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित रहे।
दिल्ली दरबार और नई दिल्ली के निर्माण की ऐतिहासिक झलकियाँ
ब्रिटिश लाइब्रेरी के फोटोग्राफिक सेक्शन में गुप्ता ने कई अद्भुत और दुर्लभ तस्वीरें देखीं। इन तस्वीरों में भारत के इतिहास से जुड़ी कई महत्वपूर्णघटनाएँ दर्ज हैं। उन्होंने 1911 के दिल्ली दरबार की तस्वीरें देखीं, जिनमें किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी का भारत आगमन, राजसी जुलूस और उससमय के समारोहों के दृश्य शामिल थे। इसके अलावा, उन्होंने नई दिल्ली और गवर्नमेंट हाउस (वर्तमान राष्ट्रपति भवन) के निर्माण से जुड़ी तस्वीरों काभी अवलोकन किया। इन तस्वीरों में सचिवालय भवन, दरबार हॉल, औपचारिक उद्यान और सरकारी कार्यालयों के निर्माण के शुरुआती दृश्य दर्ज हैं।लाइब्रेरी में मौजूद सर ह्यू ट्रोब्रिज कीलिंग कलेक्शन में भी उन्होंने दिल्ली शहर के निर्माण की प्रक्रिया से जुड़ी तस्वीरें देखीं। इनमें उस दौर के श्रमिकों, इंजीनियरों और ब्रिटिश अधिकारियों के साथ मिलकर बनाए जा रहे सरकारी भवनों के चित्र शामिल हैं। गुप्ता ने कहा कि ये तस्वीरें केवल ईंट-पत्थर केनिर्माण की कहानी नहीं बतातीं, बल्कि यह भारत के लोकतांत्रिक और प्रशासनिक इतिहास का जीवंत हिस्सा हैं।
विधायी इतिहास से मिलती है लोकतांत्रिक प्रेरणा
अध्ययन के बाद विजेन्द्र गुप्ता ने कहा, “विधायी इतिहास का अध्ययन केवल किताबों तक सीमित नहीं है। यह हमें भारत के लोकतंत्र की जड़ों सेजोड़ता है। इन पुराने दस्तावेज़ों और तस्वीरों में हमारे संविधान, हमारे कानून और हमारे लोकतांत्रिक संघर्ष की आत्मा बसती है उन्होंने कहा कि आज केविधायकों और छात्रों को ऐसे ऐतिहासिक दस्तावेज़ों का अध्ययन करना चाहिए, ताकि वे यह समझ सकें कि हमारे देश की संसद और विधानसभा नेकिन परिस्थितियों में विकास किया और आज तक कैसे अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखा। गुप्ता ने यह भी कहा कि दिल्ली विधानसभा भविष्यमें इस तरह के और अध्ययन कार्यक्रम शुरू करेगी, जिससे भारत के युवाओं को विधायी इतिहास को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
ब्रिटिश लाइब्रेरी ने सहयोग जारी रखने का दिया भरोसा
ब्रिटिश लाइब्रेरी के अधिकारियों ने गुप्ता की इस पहल की सराहना की और कहा कि वे दिल्ली विधानसभा के साथ निरंतर सहयोग जारी रखेंगे।लाइब्रेरी प्रशासन ने यह भी बताया कि वे भारत से जुड़े विधायी दस्तावेज़ों को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि भारत औरब्रिटेन के शोधकर्ता दोनों देशों के लोकतांत्रिक संबंधों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग का नया अध्याय
विजेन्द्र गुप्ता का यह दौरा भारत और ब्रिटेन के बीच सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और विधायी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदमसाबित हुआ। उन्होंने कहा कि इतिहास को जानना केवल अतीत को याद करना नहीं है, बल्कि यह भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में मार्गदर्शन है।इस अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि भारत का लोकतंत्र एक लंबी यात्रा का परिणाम है, जिसमें वर्षों की मेहनत, संघर्ष और विचारों की परिपक्वता छिपीहै। इस तरह विजेन्द्र गुप्ता की यह यात्रा न केवल इतिहास की समझ को गहरा करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे अतीत से प्रेरणा लेकरभारत अपने लोकतांत्रिक भविष्य को और मजबूत बना सकता है।