
प्रदूषण पर काबू के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा अभियान
सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के मोर्चे पर अपनी तैयारियों को और मज़बूत कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता केनेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विज़न के अनुरूप राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए ज़मीनी स्तर पर व्यापक अभियान चलाया जा रहाहै। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद जानकारी दी कि दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक(AQI) 24 घंटे के भीतर करीब 50 अंक सुधर कर 353 से 305 पर पहुंचा है। यह सुधार इस बात का संकेत है कि दिल्ली सरकार द्वारा की जा रहीज़मीन-स्तर की कार्रवाई असर दिखा रही है।
24 घंटे की निगरानी में जुटी 2000 टीमें
सिरसा ने बताया कि राजधानी में लगभग 2000 टीमें दिन-रात प्रदूषण नियंत्रण में लगी हुई हैं। इन टीमों का काम कूड़ा जलाने, गाड़ियों से निकलनेवाले धुएं, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल और औद्योगिक प्रदूषण पर सख्त नज़र रखना है। इन टीमों में 443 टीमें कूड़ा जलाने की घटनाओं परनिगरानी रख रही हैं, 578 टीमें वाहन प्रदूषण नियंत्रण में लगी हैं, 378 टीमें धूल और निर्माण प्रबंधन पर काम कर रही हैं, जबकि 65 टीमें औद्योगिकक्षेत्रों में प्रदूषण पर नज़र रख रही हैं। इसके साथ ही 953 PUC केंद्र और 505 मोबाइल प्रॉसिक्यूशन टीम (जिनमें 974 ट्रैफिक पुलिसकर्मी शामिलहैं) लगातार गश्त कर रहे हैं।
एंटी–स्मॉग गन, वाटर स्प्रिंकलर और स्वीपर से साफ़ होती दिल्ली
दिल्ली की सड़कों और औद्योगिक इलाकों में प्रदूषण कम करने के लिए 376 एंटी-स्मॉग गन, 266 वाटर स्प्रिंकलर और 91 मैकेनाइज्ड रोड स्वीपरलगातार काम कर रहे हैं। इन सभी मशीनों को GPS से जोड़ा गया है ताकि उनकी वास्तविक निगरानी की जा सके। पर्यावरण मंत्री ने बताया कि यहसंख्या पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ी है एंटी-स्मॉग गन 335 से बढ़कर 376, वाटर स्प्रिंकलर 259 से बढ़कर 266 और रोड स्वीपर 83 सेबढ़कर 91 हो गए हैं। इससे साफ़ हवा के लक्ष्य को और गति मिल रही है।
हॉटस्पॉट्स पर विशेष निगरानी
सरकार ने दिल्ली के 13 से ज़्यादा प्रदूषण प्रभावित इलाकों को हॉटस्पॉट ज़ोन के रूप में चिन्हित किया है। पर्यावरण विभाग को निर्देश दिए गए हैं किइन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए और आवश्यकता के अनुसार संसाधनों का पुनर्वितरण किया जाए। सिरसा ने कहा, दिल्ली की प्रदूषण केख़िलाफ़ लड़ाई विज्ञान और डेटा पर आधारित है। हमारा लक्ष्य सिर्फ मौसमी सुधार नहीं, बल्कि सालभर हवा को स्वच्छ रखना है।
धूल और निर्माण प्रबंधन की सख्त व्यवस्था
धूल प्रदूषण को रोकने के लिए 200 दिन की और 178 रात की टीम (कुल 970 से अधिक कर्मचारी) लगातार निर्माण स्थलों की निगरानी कर रहीहैं। 500 वर्गमीटर से बड़े सभी निर्माण स्थलों पर रोज़ाना निरीक्षण किया जा रहा है। MCD, PWD, DDA, DSIIDC और CPWD रोज़ानाअपनी रिपोर्ट “ग्रीन वॉर रूम” को भेज रहे हैं ताकि सभी विभागों में तालमेल बना रहे और कोई क्षेत्र छूट न जाए।
वाहन प्रदूषण पर नियंत्रण
दिल्ली सरकार ने वाहन प्रदूषण नियंत्रण को प्राथमिकता दी है। ट्रांसपोर्ट विभाग की 578 टीमें और ट्रैफिक पुलिस की 505 मोबाइल प्रॉसिक्यूशनटीमें शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण जांच, धुआं उत्सर्जन और इंजन आइडलिंग पर सख्त निगरानी कर रही हैं। सरकार ने यह भी सुनिश्चितकिया है कि जिन वाहनों के PUC प्रमाणपत्र नहीं हैं, उन पर जुर्माना लगाया जाए और नागरिकों को नियमित जांच के लिए प्रेरित किया जाए।
औद्योगिक इलाकों में सख्त निरीक्षण
राजधानी के औद्योगिक इलाकों में भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए 65 टीमें (33 DPCC और 32 DSIIDC) रोज़ाना निरीक्षण कर रही हैं। यहसुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी औद्योगिक इकाइयाँ केवल PNG ईंधन का उपयोग करें और किसी भी प्रकार का धुआं या हानिकारक गैसें नछोड़ें।
भविष्य की तैयारी और नई पहलें
सिरसा ने बताया कि दिल्ली सरकार भविष्य के लिए भी तैयार है। जल्द ही 70 नए मैकेनाइज्ड स्वीपर, 70 अतिरिक्त एंटी-स्मॉग गन, और 140 लिटरपिकर शहर में लगाए जाएंगे। इन मशीनों से लगभग 1440 किलोमीटर सड़कों की सफाई की जाएगी। साथ ही, दिल्ली क्लीन एयर चैलेंज के तहतनवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि नागरिकों और संस्थानों को प्रदूषण नियंत्रण में साझेदार बनाया जा सके।
विज्ञान और तकनीक से समाधान
दिल्ली सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए विज्ञान आधारित मॉडल पर काम कर रही है। IIT कानपुर और IMD के सहयोग से क्लाउड सीडिंग तकनीककी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। इसके ज़रिए कृत्रिम वर्षा से हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक तत्वों को कम किया जाएगा। इसके अलावा अब तक136.27 लाख टन पुराने कचरे को प्रोसेस किया जा चुका है। वर्ष 2025 में किसी भी लैंडफिल साइट पर आग न लगना अपने आप में एक बड़ाउपलब्धि है।
ई–वाहन और नागरिक भागीदारी पर ज़ोर
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को तेज़ी से बढ़ाया जा रहा है ताकि ट्रांसपोर्ट सेक्टर से निकलने वाले धुएं को कमकिया जा सके। अब हम सिर्फ सफाई पर नहीं, बल्कि निरंतर नियंत्रण पर ध्यान दे रहे हैं। हर अधिकारी और हर मशीन की जवाबदेही तय की गई है, श्री सिरसा ने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदूषण के खिलाफ इस अभियान में नागरिकों की भूमिका अहम है। सरकार चाहती है कि लोग भी अपनेस्तर पर प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचें और दिल्ली को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग करें।
ग्रीन वॉर रूम का समन्वय
दिल्ली सरकार का ग्रीन वॉर रूम रोज़ाना 30 से अधिक एजेंसियों जैसे PWD, MCD, NDMC, DDA, DSIIDC, DPCC, रेवेन्यू विभाग औरदिल्ली पुलिस के साथ समन्वय कर रहा है। इससे प्रदूषण नियंत्रण की सभी गतिविधियाँ एकसाथ और प्रभावी ढंग से चल रही हैं।
स्थायी बदलाव की दिशा में कदम
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, दिल्ली का बेहतर होता AQI दिखाता है कि हमारी नीति असरदार है। लेकिन हमारा लक्ष्य सिर्फ मौसमी सुधार नहीं, बल्कि स्थायी बदलाव है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में हम ऐसा सिस्टम बना रहे हैं जो संकट के वक्त नहीं, बल्कि हर दिन काम करे। उन्होंने यहभी जोड़ा, यह सरकार वादों से नहीं, बल्कि साफ़ आसमान और स्वस्थ नागरिकों से प्रगति मापती है। दिल्ली की हवा सुधर रही है और हर नागरिक उसबदलाव का हिस्सा है।