
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आज चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग ने 12 राज्यों में SIR (Special Intensive Revision) की घोषणा तो कर दी है, लेकिन अभी तक बिहार में हुए SIR से जुड़े कई सवालों के जवाब नहीं दिए गए हैं।पवन खेड़ा ने कहा कि बिहार में SIR के दौरान जो गड़बड़ियाँ हुईं, उसने चुनाव आयोग और भाजपा—दोनों की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन)?
पवन खेड़ा ने कहा कि SIR एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जिसमें चुनाव आयोग के कर्मचारी घर-घर जाकर वोटर लिस्ट की जांच करते हैं। इस प्रक्रिया मेंनए वोटरों को जोड़ा जाता है और जिनके नाम हटाने होते हैं, उन्हें डिलीट किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके सेहोनी चाहिए, लेकिन अब इसका दुरुपयोग हो रहा है।
बिहार के SIR में हुई गड़बड़ियों पर बोली कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बिहार में हुए SIR ने कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के SIR को ठीक करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कोदखल देना पड़ा, यह बताता है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं थी। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि बिहार में कई ऐसे मामलों में मतदाताओं के नामगलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जिससे मताधिकार प्रभावित हुआ।
SIR में चुनाव आयोग और भाजपा की नीयत संदिग्ध दिख रही है
पवन खेड़ा ने कहा कि बिहार में जो कुछ हुआ, उसने यह साफ कर दिया कि चुनाव आयोग और भाजपा की नीयत साफ नहीं है। उन्होंने कहा, जब भीSIR होता है, तो आयोग के कर्मचारी हर घर जाकर सत्यापन करते हैं। लेकिन इस बार ऐसा लगता है कि इस प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण तरीके सेचलाया गया। उनके मुताबिक, कुछ इलाकों में विपक्षी समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए जबकि भाजपा समर्थकों के नाम जोड़े गए।
राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ मामले का भी जिक्र
पवन खेड़ा ने अपने बयान में राहुल गांधी के आलंद विधानसभा क्षेत्र का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वहां वोटर लिस्ट से नाम गायब होने कीशिकायतें आईं थीं। बाद में जांच में यह सामने आया कि यह कोई छोटी गलती नहीं थी, बल्कि एक सेंट्रलाइज्ड ऑपरेशन था, जिसके ज़रिएसुनियोजित तरीके से वोटर लिस्ट में हेराफेरी की जा रही थी। उन्होंने कहा, SIT की जांच में सामने आया है कि वोटर लिस्ट से नाम काटने का एक बड़ानेटवर्क चलाया जा रहा था। यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जब ऐसी घटनाओं के बाद भी चुनाव आयोग बिना स्पष्टीकरण दिए नए राज्यों में SIR की घोषणा करता है, तो लोगों केमन में संदेह पैदा होता है। उन्होंने कहा कि आयोग को पहले यह बताना चाहिए था कि बिहार में जो गड़बड़ियां हुईं, उन पर क्या कार्रवाई की गई।पवन खेड़ा ने कहा, देश के लोगों को चुनाव आयोग से भरोसा था, लेकिन अब भरोसा कमजोर हो रहा है। आयोग को पारदर्शी और निष्पक्ष रहनाचाहिए, न कि सरकार के दबाव में।
SIR की मंशा ठीक नहीं लगती
पवन खेड़ा ने कहा कि बिहार के अनुभवों के बाद अब जब चुनाव आयोग ने 12 नए राज्यों में SIR की घोषणा की है, तो उसकी मंशा पर सवाल उठनास्वाभाविक है। उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि यह प्रक्रिया ईमानदारी से नहीं, बल्कि किसी खास राजनीतिक लाभ के लिए की जा रही है। कांग्रेसप्रवक्ता ने कहा कि जब विपक्ष और आम मतदाता दोनों ही संतुष्ट नहीं हैं, तो इसका मतलब है कि कुछ तो गड़बड़ है।
लोकतंत्र में वोट चोरी सबसे बड़ा अपराध है
पवन खेड़ा ने कहा कि भारत का लोकतंत्र मतदाता की भागीदारी पर टिका हुआ है।अगर वोटर लिस्ट से किसी का नाम जानबूझकर हटाया जाता है यागलत तरीके से जोड़ा जाता है, तो यह सीधे लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने कहा, लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत मतदाता है। अगर मतदाता ही प्रभावितहोगा, तो चुनावों की साख खत्म हो जाएगी।
कांग्रेस ने मांगा पारदर्शी जवाब
कांग्रेस प्रवक्ता ने मांग की कि चुनाव आयोग सार्वजनिक रूप से बताए कि 12 राज्यों में SIR करवाने की जरूरत क्यों पड़ी और इसमें क्या प्रक्रियाअपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर आयोग वास्तव में निष्पक्ष है, तो उसे यह बताना चाहिए कि बिहार जैसी गलतियां दोबारा न हों, इसके लिएक्या कदम उठाए गए हैं।
जनता का भरोसा टूटना सबसे बड़ा खतरा है
पवन खेड़ा ने कहा कि आज देश के लोग चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, अगर जनता को यह महसूस हो जाए किचुनाव निष्पक्ष नहीं हैं, तो लोकतंत्र की नींव हिल जाएगी। आयोग को इस भरोसे को बचाना चाहिए, लेकिन अफसोस है कि वह ऐसा नहीं कर पा रहा।