
दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर स्वामी दयानंद सरस्वती के योगदान कोश्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद केवल एक संत या समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि भारत की स्वतंत्रता के वास्तविक शिल्पी थे, जिनके विचारों ने आज़ादी के आंदोलन को दिशा दी।
स्वामी दयानंद स्वतंत्रता आंदोलन के वैचारिक आधार
रोहिणी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आर्य समाज सम्मेलन में बोलते हुए गुप्ता ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने समाज को न केवल जागरूक किया, बल्कि सत्यार्थ प्रकाश के माध्यम से एक ऐसे भारत की वैचारिक नींव रखी जो सत्य, समानता और राष्ट्रीय चेतना पर आधारित हो। उन्होंने कहा किस्वामी दयानंद के समय में जब देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा था, तब उन्होंने सत्य और न्याय के माध्यम से स्वतंत्रता की चेतना जगाई।
स्वामी श्रद्धानंद की भूमिका पर विशेष जोर
गुप्ता ने अपने भाषण में स्वामी श्रद्धानंद का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने दिल्ली में सत्याग्रह की भावना को जगाया। उन्होंने याद किया कि1919 में जब अंग्रेजों ने चांदनी चौक में निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई, तब स्वामी श्रद्धानंद सबसे आगे थे। उन्होंने कहा, महात्मा गांधी नेस्वयं लिखा कि दिल्ली में स्वामी श्रद्धानंद का वचन ही कानून था। उन्होंने कहा कि दिल्ली का वही आंदोलन जलियांवाला बाग सत्याग्रह की पहलीचिंगारी बना और पूरे देश में आज़ादी की अलख जगाई।
आर्य समाज और दिल्ली विधानसभा का ऐतिहासिक संबंध
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली विधानसभा का भवन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि 1919 में इसी भवन मेंअंग्रेजों ने भारतीय सदस्यों के विरोध के बावजूद रोलेट एक्ट पारित किया था, जिसके विरोध से गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत हुई।उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने इसी दिल्ली में आंदोलन को आकार देकर राष्ट्र की चेतना को जगाया था।
आर्य समाज की मूल भावना सुधार, क्रांति और मानवता
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आर्य समाज हमेशा से मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहा है, लेकिन उसकी नींव सुधार, क्रांति और धर्मनिष्ठा परआधारित है। उन्होंने कहा, स्वामी दयानंद ने ऐसा आंदोलन खड़ा किया जो जाति-पाति और भेदभाव से ऊपर उठकर एक आदर्श समाज बनाने कीदिशा में अग्रसर था, जहां राष्ट्र सर्वोपरि हो और धर्म का अर्थ केवल सच्चाई और कर्तव्यनिष्ठा हो।
आर्य समाज की विरासत आज भी जीवंत
गुप्ता ने आर्य समाज समुदाय को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सुधार में उनके 150 वर्षों के निरंतर योगदान के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा किस्वामी दयानंद के सत्य, समानता और राष्ट्रभक्ति के आदर्श आज भी भारत को दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, आर्य समाज की विरासत केवल इतिहास मेंनहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक उत्थान और नैतिक पुनर्जागरण के रूप में आज भी जीवंत है। इस ऐतिहासिक अवसर पर हमें उन मूल्यों को आत्मसातकरने का संकल्प लेना चाहिए जिन्होंने आधुनिक भारत की नींव रखी।
राष्ट्र निर्माण में आर्य समाज की प्रेरणा
अपने संबोधन के अंत में विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि आर्य समाज की प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी। स्वामी दयानंद सरस्वती नेजो विचार समाज को दिए, उन्होंने भारत को नई दिशा दी और स्वतंत्रता की चेतना को अमर बना दिया।