
नॉर्थ ज़ोन काउंसिल में पंजाब की मज़बूत आवाज़
दिल्ली में हुई नॉर्थ ज़ोन काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के हक़ की बात बहुत ही स्पष्ट और प्रभावी तरीके से रखी। बैठक कीअध्यक्षता गृह मंत्री अमित शाह कर रहे थे। CM मान ने कहा कि हर कोई पंजाब से कुछ न कुछ मांगने आता है कभी पंजाब यूनिवर्सिटी देने की बातहोती है, कभी हेडवर्क्स की, तो कभी चंडीगढ़ को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते हैं। लेकिन जब पंजाब अपने अधिकार की बात करता है, तो उसेखाली हाथ लौटा दिया जाता है। उन्होंने साफ कहा कि पंजाब से लेने वाले बहुत हैं, पर देने वाला कोई नहीं।
बाढ़ से तबाही, लेकिन 1600 करोड़ रुपये का हक़ आज तक नहीं मिला
मुख्यमंत्री ने हाल ही की विनाशकारी बाढ़ का मुद्दा भी जोर से उठाया। उन्होंने बताया कि इस बाढ़ ने पंजाब में पाँच लाख एकड़ से ज्यादा फसलें नष्टकर दीं। पुल, सड़कें, नहरें और कई इंफ्रास्ट्रक्चर टूट गए। किसानों की महीनों की मेहनत एक ही रात में खत्म हो गई। लेकिन इतने बड़े नुकसान केबावजूद केंद्र सरकार ने पंजाब को बाढ़ राहत का 1600 करोड़ रुपये आज तक नहीं दिया। इसके बावजूद पंजाब सरकार ने स्वयं फंड जुटाकर किसानोंको 20,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया, ताकि किसान इस कठिन समय में फिर से खड़े हो सकें।
मुसिबतों के बाद भी पंजाब देश को 150 लाख मीट्रिक टन चावल देगा
CM भगवंत मान ने कहा कि केंद्र से सहयोग न मिलने के बावजूद पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। इस बार भी पंजाबदेश को 150 लाख मीट्रिक टन चावल देगा। यह इस बात का प्रमाण है कि पंजाब कठिनाइयों से घिरा होने के बावजूद देश का फूड बाउल बना हुआहै। पंजाब हर संकट में भी देश की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए डटा रहता है।
अगर पानी ही नहीं देंगे, तो क्या गमलों में फसलें उगाएँ?
पानी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने बेहद तीखा और वास्तविक सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब पंजाब को उसका पानी ही नहीं मिलेगा, तो फसलें कहाँउगेंगी? क्या पंजाब के किसान गमलों में फसलें उगाएँगे? यह सवाल सिर्फ एक वाक्य नहीं है, बल्कि पंजाब की दशकों पुरानी पीड़ा का प्रत्यक्ष चित्रणहै। पंजाब देश को अनाज देता है, लेकिन अपने हिस्से का पानी भी सही से नहीं मिलता, यह स्थिति अत्यंत अन्यायपूर्ण है।
पंजाब अपने हक़ के लिए संघर्ष जारी रखेगा
आखिर में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब किसी से भीख या कृपा नहीं मांग रहा। पंजाब अपने हिस्से का हक़ मांग रहा है हक़ अपने संसाधनोंका, अपने पानी का, अपनी यूनिवर्सिटी और चंडीगढ़ का।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब की लड़ाई अब और मजबूती से लड़ी जाएगी, और हर मंच पर पंजाब की आवाज़ पहले से ज्यादा बुलंद होकर गूँजेगी।