
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जारी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान पर सियासी बवाल मचाहुआ है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा कि वर्तमान एसआईआर न केवल बिना योजनाका, अराजक, बल्कि खतरनाक भी है। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावआयोग को लिखे पत्र में कहा कि एसआईआर के ‘कुप्रबंधन’ की मानवीय कीमत अब असहनीय है। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआरको रोकने की मांग पर जोर देते हुए हाल ही में एक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) की आत्महत्या के मामले को उठाया।
संबंध में स्पष्टता की कमी
ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित कुप्रबंधन को लेकर चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कहा कि मुझे तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की उम्मीदहै। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बुनियादी तैयारियों, पर्याप्त योजना और स्पष्ट संचार के अभाव ने बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को पंगु बनादिया है। पश्चिम बंगाल की सीएम ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के सीईओ धमकी दे रहे हैं और एसआईआर में लगे बीएलओ को अनुचितकारण बताओ नोटिस जारी कर रहे हैं। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि प्रशिक्षण में गंभीर कमी और प्रक्रिया के लिए आवश्यक अनिवार्य दस्तावेजों केसंबंध में स्पष्टता की कमी के कारण यह प्रक्रिया संरचनात्मक रूप से अस्थिर है।
एसआईआर प्रक्रिया की वजह से वह काफी मानसिक तनाव में
ममता बनर्जी ने जलपाईगुड़ी में 48 वर्षीय बीएलओ शांति मुनि इक्का की आत्महत्या को असहनीय दबाव का नतीजा बताया। उन्होंने दावा किया किएसआईआर की वजह से राज्य में अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शांति मुनि अपने घर के सामने दो पेड़ों केबीच एक बांस पर फांसी के फंदे से झूलती मिली थीं। शांति के पति ने दावा किया है कि एसआईआर प्रक्रिया की वजह से वह काफी मानसिक तनावमें था। उन्होंने कहा कि एसआईआर के फॉर्म बंगाली भाषा में थे, जिसे वह पढ़ नहीं सकती थी।