
कांग्रेस पार्टी के हालिया राजनीतिक रुख और उसके अंतरराष्ट्रीय सम्पर्कों ने देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठप्रवक्ता गौरव भाटिया ने पार्टी पर आरोप लगाया है कि वह ऐसे व्यक्तियों और संगठनों से हात मिला रही है, जो भारत की छवि, नीति और संवैधानिकमूल्यों पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उनके अनुसार यह स्थितियाँ केवल संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं।
अंतरराष्ट्रीय चेहरों से कांग्रेस की नजदीकी—एक उभरता पैटर्न
गौरव भाटिया ने कहा कि कांग्रेस की गतिविधियाँ पिछले कुछ वर्षों में एक निश्चित पैटर्न का संकेत देती हैं। पहले इल्हान उमर, फिर जॉर्ज सोरास औरअब मिचेल बेचेलेट ये सभी ऐसे नाम हैं जिन्होंने बार-बार भारत की नीतियों या उसकी संप्रभुता पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कांग्रेस पहले इनलोगों को परोक्ष समर्थन देती थी, लेकिन अब वह पूरी तरह खुले मंच पर उनके साथ खड़ी दिखाई दे रही है। यह न केवल कांग्रेस की सोच में बदलावदिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि वह किस दिशा में जा रही है।
इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार पर विवाद भारत के मंच पर भारत–विरोधी आवाज़?
इसी संदर्भ में इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार–2024 की समारोह भी चर्चा में रहा। कार्यक्रम भारत के नाम से आयोजित हुआ, मंच भारत का था, पुरस्कार भारत की पूर्व प्रधानमंत्री के नाम से था, लेकिन सम्मान चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिचेल बेचेलेट को दिया गया जो भारत कीआंतरिक नीतियों पर खुलकर सवाल उठा चुकी हैं। गौरव भाटिया ने कहा कि यह निर्णय देश की जनता को आहत करता है, क्योंकि एक विदेशी नेता, जिसने भारतीय संसद द्वारा पारित CAA पर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की, उसे भारत के नाम पर सम्मानित किया गया। उनका कहना है कियह कदम कांग्रेस की राजनीतिक मंशाओं को उजागर करता है।
क्या मिचेल बेचेलेट की याचिका कांग्रेस के संकेत पर दायर हुई?
इस पुरस्कार से एक और सवाल उभरा जिस व्यक्ति ने भारत के नागरिकता कानून को लेकर न्यायालय में चुनौती दी, क्या उसके पीछे कांग्रेस की कोईभूमिका थी? गौरव भाटिया ने कहा कि मिचेल बेचेलेट भारतीय नागरिक नहीं हैं, फिर भी उन्होंने भारत की नीति पर आपत्ति जताने के लिए अदालत कादरवाज़ा खटखटाया। यह स्वाभाविक है कि लोग यह पूछें कि क्या यह कदम सोनिया गांधी या राहुल गांधी के समर्थन या सुझाव से उठाया गया था।
प्रधानमंत्री की टिप्पणी और कांग्रेस की वैचारिक दिशा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि कांग्रेस का DNA मुस्लिम माओवादी कांग्रेस बन चुका है। गौरव भाटिया ने इस टिप्पणी का उल्लेखकरते हुए कहा कि माओवादी सोच अराजकता और कानून-विरोध की प्रतीक रही है। यदि कांग्रेस अब उन व्यक्तियों को बढ़ावा दे रही है जिनकीविचारधारा भारत की संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती देती है, तो यह स्वाभाविक है कि देश में चिंता बढ़े। यह रुझान केवल वैचारिक विचलन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों के प्रति संवेदनहीनता भी दर्शाता है।
कांग्रेस की राजनीति का केंद्र क्या अब केवल सत्ता है?
गौरव भाटिया का कहना है कि कांग्रेस आज केवल सत्ता की लालसा में डूबी हुई दिखाई देती है। देशहित, नीति, लोकतांत्रिक संस्थाएँ इन सबकीउपेक्षा कांग्रेस की रणनीति से साफ दिखती है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी द्वारा मिचेल बेचेलेट को सम्मानित करना न केवल राजनीतिक रूप सेअसंवेदनशील था, बल्कि यह कदम प्रत्येक भारतीय की गरिमा को भी ठेस पहुँचाता है। भारत के मंच पर ऐसे व्यक्ति को सम्मानित करना, जो बार-बारभारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बोलता रहा है, कांग्रेस की मानसिकता को उजागर करता है।
कांग्रेस किस दिशा में बढ़ रही है?
गौरव भाटिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी एक समय में भारत की मुख्यधारा की राजनीतिक शक्ति थी, लेकिन आज वह अपने वैचारिक मार्ग से पूरी तरहभटक चुकी है। उनके अनुसार कांग्रेस अब विदेशी विचारों और समूहों के सहारे भारत की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है, जोलोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है। उन्होंने कहा कांग्रेस के DNA में अब भारत-विरोध खुलकर दिखाई देने लगा है। यह स्थिति गंभीर भी है औरचिंताजनक भी। कांग्रेस के व्यवहार को देखते हुए जनता भी सवाल पूछ रही है क्या यह पार्टी अब भी भारत के हितों की राजनीति करती है, या फिर वहसिर्फ सत्ता के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है?