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सरिता साहनी
04 
दिसंबर 2025, नई दिल्ली

स्वराज कौशल के निधन से गम का माहौल
देश के प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता और मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल के अचानक निधन की खबर ने पूरे देश को दुखी कर दिया। दोपहर मेंउनके घर पर हृदय आघात आने से उनकी हालत बिगड़ गई। परिवार ने उन्हें तुरंत एम्स अस्पताल पहुँचाया, लेकिन डॉक्टरों ने सभी प्रयासों के बाद उन्हेंमृत घोषित कर दिया। उनके निधन से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा देश शोक में डूब गया है।

सुषमा स्वराज के जीवनसाथी और बांसुरी स्वराज के पिता
स्वराज कौशल, भारत की पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज के पति थे। परिवार के लिए यह क्षति बहुत गहरी है, खासकर उनकी बेटी सांसदबांसुरी स्वराज के लिए, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया। अंतिम संस्कार से लेकर पूरी प्रक्रिया के दौरान बांसुरी स्वराज भावुक नजर आईं।उन्होंने अपने पिता के संस्कार सनातन परंपरा के अनुसार सूर्यास्त से पहले पूरा किया।

अस्पताल से घर और फिर अंतिम यात्रा की शुरुआत
एम्स अस्पताल से डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद स्वराज कौशल का पार्थिव शरीर उनकी बेटी के आवास 10 तालकटोरा रोड लाया गया।वहां परिवार, रिश्तेदार, करीबी लोग और उनके सम्मान में पहुंचे नेता लगातार उन्हें श्रद्धांजलि देने आते रहे। इसके बाद सभी धार्मिक और पारंपरिक रस्मेंपूरी की गईं और पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए लोधी रोड श्मशान घाट ले जाया गया।

बड़े नेताओं की मौजूदगी और श्रद्धांजलि
बांसुरी स्वराज के आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, गजेन्द्र सिंह शेखावत, किरण रिजिजू, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, सांसद कमलजीतसहरावत, सुप्रिया शुले, निशिकांत दूबे, विपल देव, संगीता देवी, मालविका देवी, स्वाति मालीवाल समेत कई नेताओं ने पहुंचकर उनके पार्थिव शरीरपर पुष्पांजलि अर्पित की।

लोधी रोड श्मशान घाट पर जनसागर
अंतिम संस्कार के समय लोधी रोड श्मशान घाट पर हजारों लोग मौजूद थे।केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्लीविधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, आरएसएस के वरिष्ठ सदस्य इंद्रेश कुमार, अनिल गुप्ता, भारत अरोड़ा, दयानंद, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्रसचदेवा, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, मनोज तिवारी, डॉ. संबित पात्रा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय, आदेश गुप्ता, मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह, महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह, एनडीएमसी उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल, दिनेश प्रताप सिंह और कई विधायकों, निगम पार्षदों, वरिष्ठकानूनविदों, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने भी अंतिम दर्शन करके श्रद्धांजलि दी।

वीरेन्द्र सचदेवा का भावुक वक्तव्य
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित करते हुए कहा कि श्री स्वराज कौशल का निधन सिर्फ बांसुरी स्वराज केलिए निजी क्षति नहीं है, बल्कि देश ने एक बेहद कुशल अधिवक्ता और सच्चे स्टेट्समैन को खो दिया है। उन्होंने कहा कि कानून और संविधान के प्रतिस्वराज कौशल की समझ अद्भुत थी, जिसे हमेशा याद किया जाएगा।

दिल्ली पुलिस की अंतिम सलामी
अंतिम संस्कार से पहले दिल्ली पुलिस की एक टुकड़ी ने स्वराज कौशल को सम्मानपूर्वक अंतिम सलामी दी। यह सलामी उनके लंबे सार्वजनिक जीवनऔर देश सेवा के प्रति उनके योगदान की पहचान थी। इस सम्मान को देखकर मौजूद लोगों की आँखें नम हो गईं।

बांसुरी स्वराज द्वारा अंतिम संस्कार की विधि पूरी
सनातन परंपरा के अनुसार सूर्यास्त से पहले बांसुरी स्वराज ने अपने पिता की चिता को अग्नि दी। इस भावुक क्षण में पूरे श्मशान घाट में शांति औरगंभीरता का वातावरण छाया रहा। हर व्यक्ति के चेहरे पर सम्मान, दुख और संवेदना साफ दिखाई दे रही थी।

देश ने खोया एक ज्ञानीसरल और सम्मानित व्यक्तित्व
स्वराज कौशल न सिर्फ एक अनुभवी वकील थे, बल्कि जनसेवा में गहरी आस्था रखने वाले सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के धनी थे। वह मिजोरम केराज्यपाल रह चुके थे और अपनी सादगी, विद्वता और सौम्य व्यवहार के लिए देशभर में सम्मानित थे। उनके निधन ने एक युग का अंत जैसा दर्द पैदाकिया है।

शोक और संवेदनाओं की लहर
उनके निधन के बाद राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी जगत से लगातार श्रद्धांजलियों का सिलसिला जारी है। हर कोई उन्हें एक कुशल सलाहकार, समर्पित जनसेवक और सरल स्वभाव वाले इंसान के रूप में याद कर रहा है। सोशल मीडिया पर भी उनकी स्मृतियों को साझा किया जा रहा है औरलोग अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहे हैं।
स्वराज कौशल की विरासत सदैव याद रहेगी
स्वराज कौशल की स्मृतियाँ केवल उनके परिवार या राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं हैं। उनका जीवन, कार्य और उनके द्वारा निभाए गए दायित्वआने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। उनका जाना एक गहरी रिक्तता छोड़ गया है, लेकिन उनका सम्मान, उनकी सरलता और देश के प्रतिउनकी निष्ठा हमेशा याद रखी जाएगी। 







पुतिन के भारत दौरे से पहले राहुल गांधी का बड़ा आरोप, सरकार विदेशी नेता

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