
असम सरकार ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़े कट्टरपंथी और जिहादी साहित्य पर बड़ा कदम उठाते हुए पूरे राज्य में उस पर पूर्ण प्रतिबंध लगादिया है। बुधवार को जारी अधिसूचना में सरकार ने साफ कर दिया कि ऐसे किसी भी साहित्य का प्रकाशन, बिक्री, वितरण, संग्रहण और डिजिटलप्रसार अब असम में पूरी तरह वर्जित रहेगा। सरकार का कहना है कि इस तरह की सामग्री राज्य की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुकी थी। सरकार द्वारा जिन संगठनों के साहित्य पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें जमात-उल-मुजाहिदीनबांग्लादेश (जेएमबी), अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी), अंसार-अल-इस्लाम/प्रो-एक्यूआईएस और अन्य प्रतिबंधित आतंकी नेटवर्क शामिल हैं।ताजा पुलिस और विशेष शाखा की रिपोर्टों में यह पाया गया कि इन संगठनों से प्रेरित सामग्री ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से युवाओंतक पहुंच रही थी। कई डिजिटल चैनलों, वेबसाइटों और एन्क्रिप्टेड ग्रुपों में कट्टरपंथी संदेश साझा किए जा रहे थे।
अब निगरानी के दायरे में
अधिकारियों के अनुसार, जिन डिजिटल और प्रिंट सामग्री की जांच की गई, उनमें हिंसक जिहाद को बढ़ावा देने वाली भाषा, उग्र विचारधारा को वैधठहराने वाले कथन और युवाओं को आतंकी नेटवर्क की ओर आकर्षित करने वाली सामग्री पाई गई। सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी कि यह साहित्य नसिर्फ युवाओं को गुमराह कर रहा है, बल्कि अलग-अलग समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव बढ़ाने का माध्यम भी बन रहा था। सरकार ने इसेराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया। अधिसूचना में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि प्रतिबंधित साहित्य का डिजिटल रूप में प्रसार करनेवालों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन पोर्टल, मैसेजिंग ऐप, वेबसाइटें और एन्क्रिप्टेड ग्रुप अब निगरानी के दायरे मेंहैं। बीएनएसएस की धारा 98 और 99 ऐसी सामग्री को तत्काल जब्त करने का अधिकार देती हैं। इसके अलावा आईटी एक्ट की धारा 67 औरभारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 के तहत भी यह सामग्री आपत्तिजनक मानी गई है।
कट्टरपंथी विचारों को फैलने से रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक
असम पुलिस, सीआईडी, साइबर क्राइम यूनिट और जिला पुलिस प्रमुखों को आदेश दिया गया है कि वे इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करें। सरकारने साफ किया है कि किसी भी उल्लंघन पर तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। जिला स्तर पर विशेष टीमें गठित की जा रही हैं जो दुकानों, पुस्तकविक्रेताओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी रखेंगी। राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम समाज में कट्टरपंथी विचारों को फैलने से रोकने केलिए अत्यंत आवश्यक है। सरकार ने कहा कि जिहादी सामग्री राज्य के सौहार्दपूर्ण वातावरण को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए इस पर रोकलगाना अनिवार्य था। प्रशासन का मानना है कि इस कड़ी कार्रवाई से युवाओं को गुमराह करने की कोशिशों पर लगाम लगेगी और राज्य में शांतिव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान लंबे समय तक जारी रहेगा और किसी भी प्रकार की कट्टरपंथी गतिविधिको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।