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सरिता साहनी
6,
दिसंबर 2025, नई दिल्ली

फिल्म धुरंधर एक ऐसी कहानी है जो भारतीय जासूसी तंत्र, पाकिस्तान के गैंगस्टर नेटवर्क, राजनीति और आतंकवाद की दुनिया को एक साथ जोड़करदर्शकों के सामने पेश करती है। निर्देशक आदित्य धर ने इस फिल्म को बहुत बड़े पैमाने पर बनाया है, और इसकी हर परत दर्शकों को भीतर तकझकझोर देती है। इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है रणवीर सिंह, जो लंबे समय बाद एक बेहद अलग और तीव्र किरदार में दिखाई देते हैं। फिल्म कीअवधि 3 घंटे 32 मिनट होने के बावजूद यह लगातार रोमांच बनाए रखती है।

कहानी
फिल्म की शुरुआत 30 दिसंबर 1999 से होती है, जब भारत तीन बेहद खतरनाक आतंकियों मसूद अज़हर, उमर शेख और मुश्ताक अहमद ज़रगर—को रिहा करने पर मजबूर होता है। इस निर्णय का विरोध इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अजय सान्याल करते हैं, जिन्हें आर. माधवन ने निभाया है।उनका विरोध दमदार है लेकिन नौकरशाही और मजबूरियों के सामने वह हार जाते हैं। इसी क्षण ‘प्रोजेक्ट धुरंधर’ की नींव रखी जाती है, जो कहानी कोएक बेहद रोचक और रोमांचक दिशा देता है। इसके बाद प्रवेश होता है जसकीरत सिंह उर्फ़ हमज़ा अली मज़ारी का, जिसे रणवीर सिंह ने इतनी तीव्रतासे निभाया है कि यह किरदार फिल्म की आत्मा बन जाता है। हमज़ा को पाकिस्तान के कराची शहर के सबसे खतरनाक इलाके ल्यारी में भेजा जाता है, जहाँ गैंगस्टर-राजनीति-आईएसआई का पूरा गठजोड़ भारत के खिलाफ साजिशें रचता है। फिल्म का यह हिस्सा बेहद वास्तविक और कठोर है, जहाँअपराध, सत्ता और आतंक एक-दूसरे में घुलते-मिलते दिखाई देते हैं।

रणवीर सिंह का अभिनय
रणवीर सिंह ने फिल्म में एक ऐसा किरदार निभाया है, जो भीतर से टूटा हुआ, बाहर से बेहद खतरनाक और हालातों से लड़ने के लिए मजबूर है। वहकभी जंगली दिखाई देते हैं, कभी चालाक, कभी ठंडे दिमाग से खेल खेलने वाले एजेंट और कभी एक ऐसा इंसान जिसमें दर्द और भावनाएँ अभी भीबची हैं। रणवीर की ऊर्जा, उनकी आँखों का गुस्सा, उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद बोलने का अंदाज़—सब मिलकर इस किरदार को असाधारणबनाते हैं। लंबे समय बाद रणवीर अपने करियर का एक यादगार रोल लेकर आए हैं।

आरमाधवन का महत्वपूर्ण किरदार
अजय सान्याल के किरदार में आर. माधवन बेहद शांत, समझदार और दृढ़ नज़र आते हैं। वह कहानी के नैतिक पक्ष को दर्शाते हैं और शुरुआत कीघटनाओं में उनका योगदान फिल्म की दिशा तय करता है। उनकी आंतरिक लड़ाई, उनका अपने सिद्धांतों के प्रति झुकाव और उनकी मजबूरियों कोमाधवन ने बहुत संजीदगी से प्रस्तुत किया है। हर बार जब वह स्क्रीन पर आते हैं, फिल्म और भी गंभीर और प्रभावशाली हो जाती है।

अक्षय खन्ना की मजबूत उपस्थिति
अक्षय खन्ना ने ल्यारी के एक गैंगस्टर की भूमिका निभाई है और अपने अंदाज़ से वह हर दृश्य में दर्शकों को आकर्षित करते हैं। उनका चेहरा, उनकीआवाज़ और उनका अभिनय इस किरदार को बेहद गहरा बनाते हैं। वह न हिंसक होते हुए भी डर पैदा करते हैं और वह कराची के अंडरवर्ल्ड कीजटिलता को बड़ी खूबसूरती से पेश करते हैं।

संजय दत्त का दमदार अंदाज़
संजय दत्त इस फिल्म में एक सख़्त पाकिस्तानी सुपरकॉप से प्रेरित किरदार निभाते हैं। उनका व्यक्तित्व ही इस भूमिका को गंभीर और ताकतवर बनादेता है। उनकी आँखों में जो दृढ़ता है और संवादों में जो कड़कपन है, वह फिल्म के माहौल को और भी तनावपूर्ण बना देता है। संजय दत्त की स्क्रीनउपस्थिति इतनी मजबूत है कि उनके दृश्यों को नजरअंदाज करना संभव नहीं।

अर्जुन रामपाल की तीखी छाप
अर्जुन रामपाल आईएसआई के मेजर इकबाल के रूप में सीमित समय के बावजूद गहरी छाप छोड़ते हैं। उनका किरदार ठंडे दिमाग से काम करनेवाला, खतरनाक और निर्दयी है। उनके द्वारा निभाए गए टॉर्चर सीन फिल्म के सबसे भारी और दिल दहला देने वाले हिस्सों में से हैं। वह कहानी में एकऐसा तनाव पैदा करते हैं जो दर्शकों को लंबे समय तक याद रहता है।

सारा अर्जुन और अन्य कलाकारों का योगदान
सारा अर्जुन ने यलीना के किरदार में एक नई ऊर्जा, विद्रोह और मासूमियत का मिश्रण दिखाया है। उनका किरदार छोटा है लेकिन अत्यंत प्रभावित करनेवाला। इसके अलावा राकेश बेदी और गौरव गेरा ने भी अपने किरदारों को दिलचस्प ढंग से निभाया है, जो फिल्म में थोड़ी राहत और अलग रंग भरतेहैं।

हिंसासत्ता और मनोविज्ञान का टकराव
फिल्म में हिंसा सिर्फ एक्शन नहीं है, बल्कि एक मानसिक दबाव है। कई दृश्य खासकर मेजर इकबाल वाले टॉर्चर वाले हिस्से दर्शकों को भीतर तकझकझोर देते हैं। फिल्म बार-बार यह दिखाती है कि सत्ता के खेल में इंसानियत कितनी आसानी से खत्म हो जाती है। रणवीर का किरदार भी इसीसंघर्ष से गुजरता है—एक तरफ वो एक हथियार है, दूसरी तरफ एक इंसान।

संगीत और तकनीकी पक्ष
फिल्म का संगीत इसकी आत्मा जैसा है। शाश्वत सचदेव का बैकग्राउंड स्कोर हर दृश्य को और ज्यादा तीव्र और जीवंत बनाता है। पुराने मशहूर गीतों—हवा हवा, चुपके चुपके और आफ़रीन आफ़रीन का उपयोग कहानी के भावनात्मक पहलुओं को और गहरा कर देता है। सिनेमेटोग्राफी कराची औरल्यारी को इतने वास्तविक रूप में दिखाती है कि दर्शक खुद को उस माहौल का हिस्सा महसूस करने लगते हैं।

कमज़ोरियां
फिल्म का दूसरा भाग थोड़ा अलग और भारी महसूस होता है, जैसे कहानी अचानक दूसरी दिशा में मुड़ जाती है। साथ ही, इसके कई बड़े दृश्य पहले हीभाग दो के ट्रेलर में दिखाई दे चुके थे, जिससे दर्शकों का रोमांच थोड़ा कम होता है। फिल्म का दूसरा भाग 19 मार्च 2026 को रिलीज़ होगा। धुरंधरएक ऐसी फिल्म है जिसे बड़े पर्दे पर देखने का मज़ा ही अलग है। यह फिल्म सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि राजनीति, जासूसी, दर्द, मनोविज्ञान और मानवसंघर्ष की कहानी है। रणवीर सिंह अपनी पूरी ताकत और जुनून के साथ इस फिल्म में उभरते हैं और बाकी कलाकार कहानी को और मजबूत बनाते हैं।फिल्म अंत में एक सवाल छोड़ जाती है क्या भाग 2 इस कहानी को और ऊँचाई तक ले जाएगी? जो भी लोग रोमांच, गहरी कहानी और दमदारअभिनय पसंद करते हैं, उनके लिए धुरंधर जरूर देखने लायक फिल्म है।


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