
सरिता साहनी
8 दिसंबर 2025,नई दिल्ली
दिल्ली की ठंड, बेघर लोग और सरकार की देरी
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिल्ली की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राजधानी में जब तक कोईहादसा न हो जाए, तब तक सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। उनके अनुसार हर साल की तरह इस बार भी ठंड बढ़ने के साथ हीसड़कों पर बेघर लोगों की मौतें हो रही हैं, लेकिन सरकार समय रहते कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं करती। वसंत कुंज के कुली कैंप रैन बसेरे में आग लगनेकी घटना और उसमें दो लोगों की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सरकार की तैयारी केवल कागजों में होती है।
ठंड शुरू होते ही तैयारी होनी चाहिए, न कि दिसंबर में
देवेंद्र यादव ने कहा कि रैन बसेरों में कंबल, बिस्तर, भोजन और सुरक्षा की व्यवस्था सितंबर–अक्टूबर में ही पूरी कर दी जानी चाहिए थी। लेकिनसरकार दिसंबर में हादसों के बाद अचानक सक्रिय होती है और बयान जारी किए जाते हैं। उन्होंने भाजपा के मंत्रियों पर तंज कसते हुए कहा कि जबलोग ठंड में मर रहे थे और आग लगने से दो लोगों की जान चली गई, तभी मंत्री नींद से जागकर घोषणाएं करने लगे। उनके अनुसार यह काम करने कातरीका नहीं, बल्कि लापरवाही की नीति है।
बेघर लोगों की संख्या ही तय नहीं—सरकार का प्लान कैसे बना?
देवेंद्र यादव ने यह भी सवाल उठाया कि दिल्ली में बेघर और बेसहारा लोगों की वास्तविक संख्या सरकार को पता ही नहीं है। दिल्ली उच्च न्यायालयने वर्षों पहले सरकार को आदेश दिया था कि बेघर लोगों की जनगणना कराई जाए, लेकिन पिछले 11 वर्षों में आम आदमी पार्टी की सरकार ने ऐसानहीं किया और अब भाजपा की सरकार को 10 महीने हो गए, फिर भी कोई सही आंकड़ा मौजूद नहीं है। ऐसे में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का विंटर एक्शनप्लान किस आधार पर बना और मंत्री आशिष सूद का औचक निरीक्षण किस जानकारी के आधार पर किया गया? यह बात जनता को जानने काअधिकार है।
वसंत कुंज रैन बसेरे की आग ने खोली सुरक्षा में खामियों की पोल
6 दिसंबर को वसंत कुंज के कुली कैंप रैन बसेरे में आग लगने से दो लोगों की मौत पर भी देवेंद्र यादव ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंनेकहा कि यदि रैन बसेरों में सही सुरक्षा व्यवस्था होती, नियमित निरीक्षण होता और फायर सिस्टम ठीक होता, तो ऐसी घटना टाली जा सकती थी।उन्होंने यह भी कहा कि रैन बसेरों में सुरक्षा, रजिस्ट्रेशन, निगरानी, साफ-सफाई और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं, लेकिन हर बार इन्हें दबा दिया जाता है। आग की इस घटना ने फिर साबित कर दिया कि सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीर नहीं है।
पुराने रैन बसेरे बंद, नए का वादा—क्या यह प्रशासनिक विफलता नहीं?
देवेंद्र यादव ने बताया कि दिल्ली सरकार के मंत्री आशिष सूद निरीक्षण के दौरान नए 200 रैन बसेरे बनाने की घोषणा कर रहे हैं, जबकि कई पुराने रैनबसेरे पहले ही बंद कर दिए गए थे। पुश्ता के पास चार रैन बसेरे आम आदमी पार्टी के शासन में बंद हुए और नेहरू प्लेस का एक रैन बसेरा वर्तमानसरकार ने बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि पहले बंद किए गए रैन बसेरों की जगह नए शेल्टर खोले जाएं, उसके बाद ही 200 नए रैन बसेरों की बात कीजाए। उनके अनुसार यह सरकार की इवेंट राजनीति है, जिसमें घोषणाएं ज्यादा होती हैं और काम कम।
हर मुद्दे पर देरी से काम—सरकार की यह पहचान बन चुकी है
देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि चाहे सड़क निर्माण हो या गड्ढों की मरम्मत, यमुना की सफाई हो या प्रदूषण नियंत्रण—हर विषय पर सरकार समय सेकाम करने में असफल रहती है। उनका कहना था कि रेखा गुप्ता सरकार की यही देरी अब दिल्ली की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। नगर निगम सेलेकर दिल्ली सरकार तक, हर स्तर पर निर्णय देर से लिए जाते हैं और जनता को इसका नुकसान उठाना पड़ता है।
कंबलों की भारी कमी-सरकार के दावों और जमीनी जरूरतों में बड़ा अंतर
उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने रैन बसेरों के लिए 1,000 कंबल खरीदे हैं, वह भी 2,200 रुपये प्रति कंबल की दर से। लेकिन दिल्ली में 197 स्थायी रैन बसेरे हैं और प्रत्येक रैन बसेरे में औसतन 50 लोगों की व्यवस्था होती है। इस आधार पर कम से कम 10,000 कंबलों की जरूरत है। इसकेअलावा 204 अस्थायी रैन बसेरे भी बनाए गए हैं। इस स्थिति में केवल 1,000 कंबल क्या पूरा दिल्ली शहर सम्हाल पाएगा? उन्होंने कहा कि जबसड़कों पर खुले में लोग पड़े हैं, तब सरकार का खुद को सफल बताना जनता को भ्रमित करने जैसा है।
जिम्मेदारी निभाए सरकार, जनता को भ्रमित न करे
अंत में देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली सरकार को बयानबाजी छोड़कर अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। बेघर लोगों की सुरक्षा, रैन बसेरों कीव्यवस्था, कंबलों और भोजन की उपलब्धता तथा आग से बचाव के इंतजाम तुरंत किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि हर साल ठंड से मौतें और रैनबसेरों में बदहाल स्थितियां दिल्ली की छवि को ही नहीं बल्कि मानवता को भी चोट पहुँचाती हैं। सरकार को समय पर काम करना होगा, तभी दिल्लीके गरीब, बेसहारा और बेघर लोगों की जिंदगी सुरक्षित हो सकेगी।