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बांग्लादेश में पिछले साल सत्ता परिवर्तन के बाद से ही स्थितियां गंभीर बनी हुई हैं। खासकर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में बांग्लादेश लगातारकट्टरपंथ की तरफ बढ़ा है। आलम यह है कि उसकी विदेश नीति भी भारत से दूर होकर पाकिस्तान पर केंद्रित होती दिख रही है। इसका एक उदाहरणबुधवार को मिला, जब बांग्लादेश के मौजूदा विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि यह कूटनीतिक तौर पर संभव है किबांग्लादेश, पाकिस्तान के उस क्षेत्रीय गठबंधन में शामिल हो जाए, जिसमें भारत शामिल नहीं है। बांग्लादेश की न्यूज एजेंसी संवाद संस्था (बीएसएस) की रिपोर्ट के मुताबिक, तौहीद ने कहा कि इस तरह के कूटनीतिक समूह में नेपाल और भूटान का शामिल होना शायद संभव न हो। उन्होंने कहा, “यहहमारे लिए (बांग्लादेश के लिए) कूटनीतिक तौर पर संभव है, लेकिन नेपाल और भूटान का पाकिस्तान के साथ किसी समूह में शामिल होना, वह भीजिसमें भारत न हो, के साथ जुड़ना मुमकिन नहीं है।”

ढाचांगत मामलों से जुड़ी चर्चाएं और समझौते हुए
तौहीद ने कहा कि इशाक डार ने कुछ कहा है और किसी मौके पर इसमें प्रगति भी हो सकती है। हालांकि, उन्होंने मामले पर आगे टिप्पणी से इनकारकर दिया और कहा कि उन्हें ऐसे गठबंधन के बारे में मीडिया से ही जानकारी मिली है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार नेहाल ही में दावा किया था कि बांग्लादेश-चीन और पाकिस्तान का त्रिपक्षीय गठबंधन बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है और इसे बाकी क्षेत्रीय और क्षेत्रके बाहर की ताकतों को शामिल कर के बढ़ाया जा सकता है। बता दें कि अगस्त 2024 में शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने और मोहम्मद यूनुस कीअंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही इस देश का रुख पाकिस्तान की तरफ नरम हुआ है। बांग्लादेश ने उसी देश के साथ अपने रिश्तों कोगहरा करना शुरू कर दिया है, जिसकी सत्ता ने कभी पूर्वी पाकिस्तान में बांग्ला भाषियों पर जुल्म ढाए थे। यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश और पाकिस्तानके बीच रक्षा, व्यापार, कूटनीतिक और ढाचांगत मामलों से जुड़ी चर्चाएं और समझौते हुए हैं।

यूनुस सरकार को अपने साथ लाने में सफलता मिली
गौरतलब है कि दक्षिण एशिया में भारत के बिना अलग-अलग देशों के गठबंधन की चर्चाओं को चीन ने ही जोर-शोर से बढ़ाया। इस एवज में चीन नेइस साल जून में एक त्रिपक्षीय बैठक भी रखी थी, जिसमें चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सचिव स्तर के अधिकारियों की मुलाकात हुई थी। इसबैठक को चीन के कुनमिंग में रखा गया था। इसी दौरान ऐसी खबरें आई थीं कि पाकिस्तान और चीन साथ में एक नया क्षेत्रीय गठबंधन बनाने कीतैयारी कर रहे हैं, जो कि सार्क (साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपेशन) का विकल्प बन सकता है। चूंकि सार्क में भारत सबसे प्रमुखताकत वाला देश है, इसलिए पाकिस्तान की आवाज इस संगठन में कमजोर पड़ जाती है। सार्क बीते कुछ वर्षों में पूरी तरह से निष्क्रिय है। 2016 मेंपाकिस्तानी आतंकी संगठनों की तरफ से अंजाम दिए गए उड़ी हमले के बाद से ही इस संगठन की प्रमुख बैठकें नहीं हुई हैं। इसी मौके का फायदाउठाकर पाकिस्तान ने चीन की मदद से दक्षिण एशिया में भारत के बिना एक गठबंधन बनाने की कोशिशें शुरू कर दीं। चूंकि बांग्लादेश में भी भारत कासमर्थन करने वाली शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया गया, ऐसे में पाकिस्तान को यूनुस सरकार को अपने साथ लाने में सफलता मिली।

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