
देशभर में अब बच्चों में जेनेटिक हाई कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ रही है। यह कोई साधारण बीमारी नहीं है, बल्कि एक खामोश और जानलेवा खतरा है जोबच्चों के दिल, फेफड़े और नसों पर धीरे-धीरे असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर बच्चों में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल ज्यादा हो जाए औरसमय पर इलाज न मिले, तो यह उनके लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल क्या है और क्यों होता है
हाई कोलेस्ट्रॉल का मतलब है बच्चों के खून में फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होना। खासकर जेनेटिक हाई कोलेस्ट्रॉल जन्मजात होता है और माता-पितासे बच्चों में जा सकता है। शरीर इस अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को खुद बाहर नहीं निकाल पाता। धीरे-धीरे खून गाढ़ा होने लगता है और नसों में रुकावटबढ़ती है। इससे बच्चों के दिल, फेफड़े और दिमाग पर असर पड़ता है।
लक्षण और शुरुआती संकेत
बच्चों में शुरुआत में हाई कोलेस्ट्रॉल का पता लगाना मुश्किल होता है। बच्चा बिल्कुल सामान्य दिखता है, लेकिन धीरे-धीरे शरीर में बदलाव दिखाईदेने लगते हैं। कुछ बच्चों में यह बीमारी त्वचा पर दानों या गांठों के रूप में दिखती है। ये दाने अक्सर आंखों के पास, कोहनियों, घुटनों और एड़ियों परहोते हैं। इसके अलावा बच्चों को सांस लेने में दिक्कत, थकान, कमजोरी और दिल की परेशानी होने लगती है।
खाने‑पीने की सख्ती और इलाज की मुश्किल
हाई कोलेस्ट्रॉल वाले बच्चों का खान-पान बहुत सख्त होता है। तेल, शुगर, तला-भुना और फैटी खाना पूरी तरह बंद करना पड़ता है। कुछ डॉक्टरों काकहना है कि बच्चों में इलाज के लिए खून का सारा हिस्सा निकालकर बदलना पड़ सकता है, और इसे हर साल दोहराना होता है। यह तरीका बच्चों केलिए दर्दनाक और कठिन होता है।
इलाज की कमी और माता–पिता की चिंता
इस बीमारी का बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रभावी इलाज अभी तक कहीं भी उपलब्ध नहीं है। माता-पिता हर जगह इलाज ढूंढते हैं, लेकिन निराशाही हाथ लगती है। बीमारी से बच्चे और उनके परिवार तनाव और चिंता में रहते हैं। इलाज की कमी के कारण बच्चे हर समय खतरे में रहते हैं औरउनका भविष्य असुरक्षित है।
साइलेंट अटैक और गंभीर खतरा
हाई कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे बच्चों के शरीर को नुकसान पहुंचाता है। बच्चा खेल-खेल में सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर उसके दिल और नसेंकमजोर हो रही होती हैं। इसी वजह से इसे साइलेंट अटैक कहा जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बच्चों में ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक और सांसलेने में गंभीर दिक्कत पैदा कर सकता है।
अब इंतज़ार नहीं सरकार को अहम कदम उठाने की ज़रूरत
अब समय आ गया है कि सरकार इस गंभीर बीमारी को नजरअंदाज करना बंद करे। इतने मामले सामने आने के बावजूद सरकार आंखें मूंदे बैठी है। क्योंकोई कठोर कदम नहीं उठाया जा रहा? बच्चों के लिए खतरनाक यह बीमारी लगातार बढ़ रही है और मासूमों का भविष्य जोखिम में है। सरकार कोतुरंत ध्यान देना चाहिए और बच्चों के लिए सुरक्षित दवा या इंजेक्शन विकसित करना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच, स्क्रीनिंग औरविशेषज्ञ इलाज की सुविधा तुरंत लागू करनी होगी। बच्चों की जान बचाना अब प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
बच्चों का भविष्य बचाना सरकार की जिम्मेदारी
जेनेटिक हाई कोलेस्ट्रॉल सिर्फ खून की समस्या नहीं है। यह बच्चों के दिल, नसों और फेफड़ों को प्रभावित कर उनके भविष्य को खतरे में डाल सकतीहै। LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल ज्यादा होने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। माता-पिता, डॉक्टर और सरकार मिलकर ही इसे समय रहतेरोक सकते हैं।
बार–बार अपील – सरकार जागे
सरकार क्यों आंखें मूंदे बैठी है? कब तक मासूम बच्चों का भविष्य खतरे में रहेगा? क्यों कोई कठोर कदम नहीं उठाया जा रहा? अब वक्त है कि सरकारतुरंत कदम उठाए और बच्चों के लिए सुरक्षित दवा या इंजेक्शन तैयार करे, ताकि उनके जीवन और भविष्य को बचाया जा सके।