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सरिता साहनी
17 
दिसंबर 2025 ,नई दिल्ली


नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस का स्पष्ट संदेश राजनीतिक बदले की राजनीति हुई बेनकाब
नई दिल्ली स्थित 10, राजाजी मार्ग पर कांग्रेस पार्टी की एक विशेष और अहम प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस प्रेस वार्ता में कांग्रेस अध्यक्ष एवंराज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सांसद अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, संचार विभाग के महासचिव जयराम रमेश और कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा उपस्थित रहे। प्रेस वार्ता का मुख्य विषयनेशनल हेराल्ड से जुड़े मामले में आए ताज़ा अदालती फैसले और उसमें उजागर हुई सच्चाई रही।

प्रेस वार्ता की शुरुआत – पवन खेड़ा
प्रेस वार्ता की शुरुआत करते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि सभी नेताओं को संसद जाना है, इसलिए बात को लंबा खींचे बिना पूरे तथ्यों के साथ देश केसामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में बहुत समय से शोर मचाया जा रहा था, लेकिन अब अदालत के फैसले के बाद सच्चाई सामने आचुकी है। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से पूरे मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया।

यह केस कानून का नहींराजनीतिक द्वेष का था – अभिषेक मनु सिंघवी
अभिषेक मनु सिंघवी ने बेहद सरल और साफ भाषा में कहा कि यह पूरा मामला द्वेष से प्रेरित कार्रवाई और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग की कहानी है।उन्होंने कहा कि इस केस में आरोप बहुत लगाए गए, शोर बहुत मचाया गया, लेकिन कानूनी आधार कभी मौजूद ही नहीं था। अदालत के फैसले नेयही साबित किया है कि कानून शोर से नहीं, बल्कि तथ्यों और प्रक्रिया से चलता है। उन्होंने बताया कि ईडी ने राहुल गांधी से लगभग पचास सेपचपन घंटे, मल्लिकार्जुन खरगे से पांच से छह घंटे और सोनिया गांधी से सात से आठ घंटे अलग-अलग तारीखों पर पूछताछ की। कुल मिलाकरकरीब अस्सी से नब्बे घंटे की पूछताछ ऐसे मामले में की गई, जिसमें कानूनी रूप से कोई ठोस एफआईआर तक नहीं थी। यह अपने आप में एजेंसियोंकी कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

2014 से 2021 तक की सच्चाई जब एजेंसियों ने खुद माना कि अपराध नहीं है
अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि यह मामला वर्ष 2014 में एक निजी शिकायत से शुरू हुआ था। इसके बाद पूरे सात वर्षों तक, यानी 2014 से2021 तक, जांच एजेंसियों ने अपनी फाइलों में साफ तौर पर लिखा कि इस मामले में कोई प्रेडिकेट ऑफेंस नहीं बनता। उन्होंने कहा कि यह कोईराजनीतिक दावा नहीं है, बल्कि अदालत के फैसले में दर्ज तथ्य हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वास्तव में कोई अपराध था, तो सात साल तकएफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई। अगर अपराध नहीं था, तो फिर अचानक कार्रवाई क्यों शुरू की गई। यही सवाल इस पूरे मामले की नीयत औरउद्देश्य को उजागर करता है।

30 जून 2021 अचानक एफआईआर और ईसीआईआर का रहस्य
डॉ. सिंघवी ने कहा कि जब सात वर्षों तक एजेंसियों की संयुक्त राय यही थी कि कोई अपराध नहीं है, तो 30 जून 2021 को अचानक एफआईआरऔर ईसीआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने इसे राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया और कहा कि यह फैसला कानून के आधार पर नहीं, बल्कि सत्ताके इशारे पर लिया गया। उनका कहना था कि जब कानून की नींव ही मौजूद नहीं थी, तब मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा मामला खड़ा कर दिया गया, जोअंततः अदालत के सामने टिक नहीं सका और अपने ही बोझ से गिर गया।

अदालत का स्पष्ट संदेश बिना नींव कोई मुकदमा नहीं
अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि अदालत ने इस मामले में साफ कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत कार्रवाई के लिए पहले एक वैध प्रेडिकेटऑफेंस होना जरूरी है। जब ऐसा कोई अपराध ही नहीं है, तो मनी लॉन्ड्रिंग का केस कैसे बन सकता है। अदालत ने इसी आधार पर इस मामले मेंसंज्ञान लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अदालत का यह फैसला इस बात की याद दिलाता है कि आपराधिक कानून कोई राजनीतिक प्रेसविज्ञप्ति नहीं है और न ही अदालतें किसी राजनीतिक पटकथा का मंच हैं। अदालतें संविधान और न्याय की मंदिर होती हैं।
यंग इंडियन और एजेएल ना पैसा हिलाना संपत्ति
डॉ. सिंघवी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में न तो एक पैसा इधर से उधर गया और न ही एक इंच जमीन का हस्तांतरण हुआ। एजेएल कीसंपत्तियां पहले भी उसी के नाम थीं और आज भी उसी के नाम हैं। कर्ज को शेयर में बदलना कोई अपराध नहीं है, बल्कि यह भारत में आमव्यावसायिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि यंग इंडियन एक नॉट-फॉर-प्रॉफिट कंपनी है, जिसमें न कोई डिविडेंड लिया जा सकता है और न ही कोईनिजी लाभ उठाया जा सकता है। ऐसे में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप अपने आप में हास्यास्पद है।

यह फैसला राजनीतिक बदले की राजनीति पर तमाचा है – मल्लिकार्जुन खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस मामले में सारी कानूनी बातें अभिषेक मनु सिंघवी पहले ही साफ कर चुके हैं। उन्होंने कहा किनेशनल हेराल्ड एक ऐसा अखबार है, जिसे 1938 में स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए शुरू किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधीपरिवार और कांग्रेस नेताओं को बदनाम करने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया। यह पूरी तरह राजनीतिक बदले की भावना से कियागया मामला था। उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला इस बात का प्रमाण है कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं।

न्याय की जीतसत्य का सम्मान
अंत में मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस फैसले का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न सिर्फ कांग्रेस के लिए, बल्कि देशके लोकतंत्र और संविधान के लिए भी एक बड़ी जीत है। सत्य और न्याय की राह पर चलने वालों को अंततः अदालत से न्याय मिलता है और यही इसफैसले का सबसे बड़ा संदेश है।

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