
भारत और ओमान के बीच समुद्री रिश्तों को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक पल सामने आया है। इसके तहत भारतीय नौसेना के स्वदेशी पोत आईएनएसवी कौण्डिन्य ने गुजरात के पोर्बंदर से मस्कट ओमान तक 18 दिनों की साहसिक और ऐतिहासिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की। इस अवसर पर केंद्रीय बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह जहाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह जहाज भारत की प्राचीन नौवहन कला और समुद्री परंपरा को विश्व के सामने पेश करता है। जहाज का नाम प्रसिद्ध नाविक कौण्डिन्य के नाम पर रखा गया है और इसे अजंता की गुफाओं में दिखाए गए 5वीं सदी के जहाज से प्रेरणा लेकर डिजाइन किया गया है।
द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए
सोनोवाल ने बताया कि यह जहाज भारत की समुद्री विरासत और कौशल का प्रतीक है। इसे अजंता की गुफाओं में दिखाए गए 5वीं सदी के जहाज से प्रेरणा लेकर डिजाइन किया गया है और इसका नाम प्रसिद्ध नाविक कौण्डिन्य के नाम पर रखा गया है। इसके साथ ही मंत्री सोनोवाल ने भारत और ओमान के रिश्ते पर भी जोर दिया। मस्कट, ओमान से बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत और ओमान के समुद्री रिश्ते हजारों साल पुराने हैं। हमारे पूर्वज जो इन जलमार्गों से गुजरते थे, वे आज भी दोनों देशों को जोड़ते हैं। सोनोवाल ने बताया कि हाल ही में भारत और ओमान के बीच सीईपीए, समुद्री विरासत पर सहमति पत्र और साझा दृष्टिकोण पर समझौते हुए हैं। इनसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए हैं।
र भारत-ओमान के रिश्तों को और मजबूत किया
बता दें कि आईएनएसवी कौण्डिन्य ने 18 दिनों की ऐतिहासिक यात्रा पूरी की। इस यात्रा में 18 नाविक शामिल थे। केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विजन ने यह यात्रा संभव बनाई और भारत-ओमान के रिश्तों को और मजबूत किया। मस्कट पहुंचने पर चालक दल का ओमान में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। सोनोवाल ने यह भी बताया कि गुजरात के लोथल में दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री संग्रहालय बनाया जा रहा है, जो भारत की प्राचीन और आधुनिक समुद्री विरासत को दुनिया के सामने पेश करेगा।