
पश्चिम बंगाल में राजनीति एक बार फिर उसी जगह पर आ गई है, जहां से कभी ममता बनर्जी की राजनीति का उदय हुआ था और अब भाजपा भी वहीं पर संभावनाएं तलाश रही है। दरअसल वह जगह है हुगली जिले का सिंगूर क्षेत्र, जहां कभी टाटा नैनो की फैक्ट्री हुआ करती थी। अब भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 18 जनवरी को होने वाली रैली के लिए इसी जगह को चुना है। माना जा रहा है कि इसके जरिए भाजपा बंगाल के औद्योगिक विकास की रेस में पिछड़ने और छूटे हुए आर्थिक अवसरों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है।
अपनी भूमि छोड़नी पड़ सकती
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सिंगूर की नैनो साइट को औद्योगिक भूमि में बदल दिया गया था, जिस वजह से वहां अब लगभग न के बराबर कृषि गतिविधि है। इसलिए भारी उद्योगों को आकर्षित करने के लिए हमें एक व्यापक भूमि नीति की आवश्यकता है। इससे राज्य की प्रतिभा और कार्यबल के जबरन पलायन रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि उद्योगों के विकास में किसानों की प्रत्यक्ष भागीदारी होनी बेहद जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर किसानों को भी अपनी भूमि छोड़नी पड़ सकती है।
प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई
उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के “कृषि-उद्योग सह-अस्तित्व सिद्धांत” को खारिज कर दिया। भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य की 82% भूमि छोटे किसानों के पास है और बड़े उद्योग सिर्फ कृषि भूमि पर ही स्थापित किए जा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ‘बंगाल एक खनिज-समृद्ध राज्य है और इसकी भौगोलिक स्थिति भी अनूठी है। इसलिए अगर हम राज्य के औद्योगिक विकास को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखें तो निवेशकों को आसानी से यहां आकर्षित किया जा सकता है।’ बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार द्वारा सिंगूर में टाटा नैनो प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई थी। जिसका ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने विरोध किया।