
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी 1 फरवरी को लोकसभा में अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करने के लिए तैयार हैं। मोदी 3.0 सरकार के इस तीसरे पूर्ण बजट की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह बजट ऐसे समय में आ रहा है जब भारतीय अर्थव्यवस्था 7.4 प्रतिशत की विकास दर दर्ज कर रही है, लेकिन साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक वातावरण अनिश्चित बना हुआ है। वित्त मंत्रालय में अनुभवी नौकरशाहों की एक टीम वित्त मंत्री को इस महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज को अंतिम रूप देने में सहायता कर रही है। यह टीम राजकोषीय अनुशासन, राजस्व जुटाने और आर्थिक सुधारों के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर इस बजट की प्राथमिक शिल्पकार मानी जा रही हैं। वह बजट दस्तावेजों को तैयार करने वाले बजट प्रभाग का नेतृत्व करती हैं और संसाधनों के आवंटन व मैक्रो-इकोनॉमिक ढांचे को तय करने वाली प्रमुख अधिकारी हैं।
राजस्व जुटाने में उनकी भूमिका अहम
1994 बैच की हिमाचल प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी अनुराधा ठाकुर ने 1 जुलाई, 2025 को विभाग की कमान संभाली थी। विशेष बात यह है कि वह इस विभाग का नेतृत्व करने वाली पहली महिला आईएएस अधिकारी हैं। बतौर सचिव यह उनका पहला बजट होगा। राजस्व सचिव के रूप में अरविंद श्रीवास्तव बजट भाषण के ‘भाग बी’ (Part B) के लिए जिम्मेदार हैं, जिसमें कर प्रस्ताव शामिल होते हैं। उनकी टीम प्रत्यक्ष कर (आयकर, कॉर्पोरेट टैक्स) और अप्रत्यक्ष कर (जीएसटी, सीमा शुल्क) का प्रबंधन करती है। हालांकि राजस्व सचिव के रूप में यह उनका पहला बजट है, लेकिन वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव (बजट) और पीएमओ में वित्त मंत्रालय से संबंधित मामलों को संभालने का उनका पुराना अनुभव महत्वपूर्ण होगा। टीडीएस और सीमा शुल्क के युक्तिकरण की उम्मीदों के बीच राजस्व जुटाने में उनकी भूमिका अहम है।
राजस्व लक्ष्य हासिल करना इनका कार्यक्षेत्र
व्यय सचिव वुमलुनमंग वुलनाम ‘सरकारी खजाने के संरक्षक’ के रूप में कार्य करते हैं। उनका मुख्य कार्य राजकोषीय घाटे का प्रबंधन करना, सब्सिडी को तर्कसंगत बनाना और केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करना है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू सरकार की वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को आगे बढ़ाने में शामिल हैं। उनका विभाग सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, बीमा कंपनियों और पेंशन प्रणालियों के वित्तीय स्वास्थ्य की निगरानी करता है, जो क्रेडिट ग्रोथ और डिजिटल अपनाने के एजेंडे को चलाने के लिए महत्वपूर्ण है। अरुणिश चावला (DIPAM सचिव): सरकार के विनिवेश और निजीकरण के रोडमैप के लिए जिम्मेदार हैं। सीपीएसई में हिस्सेदारी बेचकर गैर-कर राजस्व लक्ष्य हासिल करना इनका कार्यक्षेत्र है।