
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली नगर निगम से जुड़े एक अहम फैसले को लेकर भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि इस फैसले से नगर निगम में लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो गई है और जनता द्वारा चुने गए पार्षदों की भूमिका लगभग खत्म कर दी गई है।
एमसीडी कमिश्नर को 50 करोड़ रुपये की शक्ति देने पर उठे सवाल
आम आदमी पार्टी के अनुसार, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर की वित्तीय शक्तियों को बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दिया है। इससे पहले कमिश्नर को केवल 5 करोड़ रुपये तक खर्च की मंजूरी देने का अधिकार था। इससे ज्यादा किसी भी खर्च के लिए स्टैंडिंग कमेटी और फिर एमसीडी सदन की अनुमति जरूरी होती थी। अब यह पूरी प्रक्रिया खत्म कर दी गई है। एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि यह फैसला सीधे तौर पर चुने हुए पार्षदों की शक्तियों को छीनने जैसा है। उन्होंने कहा कि जब इतने बड़े फैसले सिर्फ एक अधिकारी द्वारा लिए जाएंगे, तो फिर पार्षदों और सदन की क्या भूमिका रह जाएगी।
स्टैंडिंग कमेटी और एमसीडी सदन को किया गया कमजोर
अंकुश नारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के इस फैसले से स्टैंडिंग कमेटी की भूमिका लगभग खत्म हो गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री को अपने ही भाजपा के मेयर, पार्षदों और स्टैंडिंग कमेटी पर भरोसा नहीं है। अगर भरोसा होता, तो इतनी बड़ी वित्तीय शक्ति एक अधिकारी को नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में फैसले जनता के प्रतिनिधियों के जरिए होते हैं, न कि केवल अफसरों के माध्यम से। लेकिन इस फैसले से साफ है कि भाजपा सरकार नगर निगम को अफसरशाही के जरिए चलाना चाहती है।
बिना कानून बदले प्रशासनिक आदेश जारी करने का आरोप
आम आदमी पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि एमसीडी एक्ट 1957 में साफ तौर पर कमिश्नर की वित्तीय सीमा तय की गई है। इस कानून के अनुसार, कमिश्नर की वित्तीय शक्ति 5 करोड़ रुपये तक ही थी। अगर इसे बढ़ाना था, तो पहले कानून में संशोधन करना जरूरी था। अंकुश नारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बिना एमसीडी एक्ट में कोई संशोधन किए, केवल एक प्रशासनिक आदेश के जरिए कमिश्नर की वित्तीय शक्ति बढ़ा दी। उन्होंने इसे कानून और संविधान दोनों के खिलाफ बताया।
क्या अब दिल्ली को बाबू चलाएंगे, चुने हुए लोग नहीं?
अंकुश नारंग ने भाजपा सरकार से सीधा सवाल किया कि अब दिल्ली को कौन चलाएगा। क्या दिल्ली की जनता द्वारा चुने गए पार्षद नगर निगम चलाएंगे या फिर भाजपा द्वारा नियुक्त अधिकारी सारे फैसले लेंगे। उन्होंने कहा कि अगर सभी बड़े फैसले कमिश्नर ही करेंगे, तो फिर चुनाव कराने, पार्षद चुनने और सदन चलाने का कोई मतलब नहीं रह जाता। यह सीधे तौर पर लोकतंत्र का अपमान है।
बजट प्रक्रिया पर भी उठे गंभीर सवाल
आम आदमी पार्टी ने नगर निगम के बजट को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अंकुश नारंग ने कहा कि हर साल एमसीडी सदन में बजट पेश किया जाता है, उस पर लंबी चर्चा होती है और फिर स्टैंडिंग कमेटी में भेजा जाता है। लेकिन जब 50 करोड़ रुपये तक के फैसले कमिश्नर खुद ही लेंगे, तो फिर बजट पर चर्चा करने, सदन चलाने और स्टैंडिंग कमेटी बनाने की जरूरत ही क्या रह जाती है। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल बजट का नाटक कर रही है।
दिल्ली की जनता के साथ विश्वासघात का आरोप
अंकुश नारंग ने कहा कि यह फैसला सिर्फ नगर निगम से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह दिल्ली की जनता के साथ विश्वासघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले दिल्ली सरकार को उपराज्यपाल के जरिए कमजोर किया गया और अब नगर निगम को अफसरों के हाथ में सौंपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को सिर्फ नाम का प्रतिनिधि बनाकर रखा जा रहा है और असली ताकत अफसरों को दी जा रही है।
आम आदमी पार्टी का साफ संदेश
आम आदमी पार्टी ने साफ कहा है कि वह एमसीडी कमिश्नर को इतनी बड़ी वित्तीय शक्ति देने का विरोध करती रहेगी। पार्टी का कहना है कि नगर निगम जनता की संस्था है और इसे जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के जरिए ही चलाया जाना चाहिए। अंकुश नारंग ने कहा कि आम आदमी पार्टी लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करती रहेगी और भाजपा सरकार के इस फैसले का लगातार विरोध किया जाएगा।