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सरिता साहनी
नई दिल्ली, 9 मार्च 2026

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद फिर चर्चा में आया आबकारी नीति विवाद
दिल्ली की राजनीति में आबकारी नीति यानी शराब नीति का मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले से जुड़े एक निचली अदालत के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। निचली अदालत ने जांच से जुड़े एक केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन हाईकोर्ट ने फिलहाल उस आदेश के प्रभाव को रोक दिया है। इस फैसले के बाद दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली सचिवालय में प्रेस वार्ता की और आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब इस पूरे मामले की सच्चाई धीरे-धीरे सामने आएगी और कानून अपना काम करेगा।

“कट्टर ईमानदार” के दावे पर उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आम आदमी पार्टी के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें पार्टी खुद को “कट्टर ईमानदार” बताती रही है। उन्होंने कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने राजनीति की शुरुआत की थी, तब उसने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का बड़ा दावा किया था। लेकिन मंत्री के अनुसार, जब पार्टी को सरकार चलाने का मौका मिला तो भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई बड़ा और ठोस कदम दिखाई नहीं दिया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की 49 दिनों की पहली सरकार के समय भी इस दिशा में कोई विशेष प्रयास नहीं किए गए और बाद के वर्षों में भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं दिखाई दिया। मंत्री ने कहा कि अब अदालत में चल रही प्रक्रिया और जांच एजेंसियों की कार्रवाई से धीरे-धीरे वास्तविकता सामने आ रही है।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बताया महत्वपूर्ण
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय का हालिया फैसला इस मामले में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार अदालत द्वारा निचली अदालत की टिप्पणियों पर रोक लगाए जाने से अब जांच एजेंसियों को बिना किसी बाधा के अपना काम करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि कई बार राजनीति में लोग बहुत जल्दी अपनी जीत का जश्न मनाने लगते हैं। उन्होंने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे मैच खत्म होने से पहले जश्न मनाना सही नहीं होता, उसी तरह किसी मामले में अंतिम फैसला आने से पहले खुद को पूरी तरह निर्दोष घोषित करना भी उचित नहीं है। उनके अनुसार आम आदमी पार्टी ने भी जल्दबाजी में खुद को “कट्टर ईमानदार” घोषित कर दिया था।

मोबाइल फोन और सिम कार्ड नष्ट करने के आरोप
आशीष सूद ने शराब नीति मामले से जुड़े कुछ गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश की गई। मंत्री के अनुसार इस मामले से जुड़े लगभग 170 मोबाइल फोन और 43 सिम कार्ड नष्ट किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शराब नीति पूरी तरह सही थी और उसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं थी, तो फिर इतने बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन और सिम कार्ड क्यों नष्ट किए गए। उन्होंने कहा कि यह सवाल केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि दिल्ली की जनता के मन में भी यही प्रश्न उठ रहा है।

CAG रिपोर्ट में बड़े आर्थिक नुकसान का दावा
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में शराब नीति के कारण दिल्ली सरकार को लगभग ₹2202 करोड़ से अधिक के संभावित नुकसान की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि यह नुकसान सीधे तौर पर दिल्ली की जनता के पैसे से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आना जरूरी है ताकि जनता को पता चल सके कि वास्तव में क्या हुआ।

पुरानी और नई शराब नीति के बीच बड़ा अंतर
आशीष सूद ने यह भी कहा कि पुरानी और नई शराब नीति के बीच राजस्व के मामले में बड़ा अंतर दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि पुरानी नीति के समय एक शराब की बोतल पर सरकार को लगभग ₹329.90 का राजस्व मिलता था। लेकिन नई नीति लागू होने के बाद यह घटकर लगभग ₹8.32 रह गया। इसके अलावा खुदरा विक्रेताओं का मार्जिन भी काफी बढ़ा दिया गया। पहले यह लगभग ₹33.35 था, जिसे बढ़ाकर लगभग ₹363.27 कर दिया गया। मंत्री के अनुसार इस बदलाव का सीधा असर सरकार की आय पर पड़ा।

शराब नीति वापस लेने को लेकर भी उठे सवाल
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि बाद में दिल्ली सरकार को यह शराब नीति वापस लेनी पड़ी। लेकिन इसके बावजूद आम आदमी पार्टी लगातार यह कहती रही कि इस नीति में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ। मंत्री ने कहा कि यदि नीति पूरी तरह सही थी, तो फिर उसे वापस लेने की जरूरत क्यों पड़ी। उनके अनुसार यह सवाल दिल्ली की जनता के मन में भी है और इसका स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए।

दिल्ली की जनता के सामने जवाब देने की मांग
अंत में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि अब आम आदमी पार्टी को दिल्ली की जनता के सामने सभी सवालों के जवाब देने चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि शराब नीति से जुड़े फैसले किस आधार पर लिए गए और बाद में उसे वापस क्यों लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसियों की जांच के बाद आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं। उनके अनुसार यह पूरा मामला दिल्ली की राजनीति में एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है और जनता की नजर इस पर बनी हुई है।

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