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भारत सरकार ने देश के विमानन ढांचे, इमिग्रेशन सिस्टम और वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है।केंद्रीय कैबिनेट ने कुल 30,640 करोड़ रुपये के की परियोजनाओं और नीतिगत फैसलों को अपनी मंजूरी दे दी है। इन अहम फैसलों में क्षेत्रीयकनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाली ‘मॉडिफाइड उड़ान योजना’ और ‘आईवीएफआरटी 3.0′ के विस्तार के साथ-साथ पेरिस समझौते के तहत भारत केराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय शामिल है। कैबिनेट की बैठक में सबसे बड़ा वित्तीय आवंटनविमानन क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए किया गया है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में हवाई संपर्क को और बेहतर बनाने के लिए सरकार ने’मॉडिफाइड उड़ान योजना’ को 28,840 करोड़ रुपये की भारी-भरकम मंजूरी दी है। इस योजना के तहत देश भर में 100 नए हवाई अड्डों और 200 हेलीपैड विकसित करने की योजनाओं के साथ क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

विकास से जुड़ी कॉर्पोरेट रणनीतियों को एक नई दिशा देगा
कैबिनेट ने विदेशियों के भारत आने, उनके वीजा और रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है।सरकार ने ‘इमिग्रेशन, वीजा, फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग’ (आईवीएफआरटी 3.0) योजना को अगले पांच वर्षों यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है, जिसके लिए 1,800 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। आम लोगों और यात्रियों के नजरिए से इसकासीधा मतलब यह है कि अब इमिग्रेशन और वीजा सेवाएं पूरी तरह से हाई-टेक और सुरक्षित नेटवर्क से जुड़ी रहेंगी, जिससे सही विदेशी यात्रियों कोभारत आने में कोई परेशानी नहीं होगी और साथ ही देश की राष्ट्रीय सुरक्षा भी पहले से ज्यादा मजबूत होगी। वित्तीय मंजूरियों के अलावा, कैबिनेट नेवैश्विक पर्यावरण से जुड़ा एक प्रमुख नीतिगत फैसला भी लिया है। सरकार ने पेरिस समझौते के तहत भारत के ‘नेशनली डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशन’ कोऔपचारिक मंजूरी दे दी है। यह फैसला वैश्विक मंच पर भारत की कार्बन उत्सर्जन कम करने की प्रतिबद्धताओं को स्पष्ट करता है और भविष्य में ग्रीनएनर्जी तथा सतत विकास से जुड़ी कॉर्पोरेट रणनीतियों को एक नई दिशा देगा।

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