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केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वह पूरी तरह से एक छलावा साबित हो रहे हैं। इस फैसले से आम जनता को कोई वास्तविक राहत मिलने वाली नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ पेट्रोल पंप मालिकों और तेल कंपनियों को ही पहुंचेगा।
सरकार बार-बार यह दावा कर रही है कि देश में पेट्रोल और गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों पर लग रही लंबी कतारें इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि स्थिति सामान्य नहीं है। यदि वास्तव में पर्याप्त स्टॉक है, तो जनता को इस तरह की परेशानी का सामना क्यों करना पड़ रहा है?
सरकार इन समस्याओं को अफवाह बताकर अपनी नाकामियों को छुपाने की कोशिश कर रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जनता आज महंगाई, ईंधन संकट और अव्यवस्था से जूझ रही है, लेकिन सरकार केवल बयानबाजी में लगी हुई है।
लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने सरकार से मांग की है कि वह जमीनी सच्चाई को स्वीकार करे, पारदर्शिता बरते और आम जनता को वास्तविक राहत देने के लिए ठोस कदम

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