
नई दिल्ली, 6 अप्रैल 2026
दिल्ली में प्रॉपर्टी से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा सामने आया है, जिस पर सियासत भी तेज हो गई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि डीडीए ने लीजहोल्ड प्रॉपर्टियों को फ्रीहोल्ड में बदलने की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाकर आम लोगों पर आर्थिक बोझ डालने की तैयारी कर ली है।
फ्रीहोल्ड कन्वर्जन पर रोक से बढ़ी परेशानी
देवेन्द्र यादव के अनुसार, 2 जनवरी 2026 से डीडीए ने फ्रीहोल्ड कन्वर्जन की प्रक्रिया को पूरी तरह रोक दिया है। यह वही प्रक्रिया है जिसके जरिए कोई व्यक्ति अपनी लीजहोल्ड प्रॉपर्टी पर पूरा मालिकाना हक हासिल करता है। इस रोक के कारण हजारों लोग, जो अपने मकान या जमीन को फ्रीहोल्ड करवाना चाहते थे, अब मुश्किल में पड़ गए हैं। उनकी फाइलें अटकी हुई हैं और उनका काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
ऑनलाइन पोर्टल बंद होने से रुका काम
उन्होंने यह भी बताया कि फ्रीहोल्ड कन्वर्जन के लिए जो ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया था, वह पिछले तीन महीनों से बंद पड़ा है। इस वजह से जिन लोगों ने पहले ही आवेदन कर दिया था, उनका काम भी अधूरा रह गया है। इससे आम नागरिकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और उन्हें मानसिक व आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सर्कल रेट बढ़ने से बढ़ेगा खर्च
देवेन्द्र यादव का कहना है कि डीडीए अब दिल्ली सरकार द्वारा तय किए गए सर्कल रेट को अपनाने जा रहा है। सर्कल रेट बढ़ने का मतलब है कि प्रॉपर्टी से जुड़े सभी शुल्क अपने आप बढ़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि 2011 के बाद से कन्वर्जन दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ था, लेकिन अब अचानक नई दरें लागू करने से लोगों को ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे। इससे आम आदमी के लिए घर खरीदना या फ्रीहोल्ड करवाना और मुश्किल हो जाएगा।
हर तरह के शुल्क में हो सकती है बढ़ोतरी
देवेन्द्र यादव के मुताबिक, सर्कल रेट लागू होने के बाद कई प्रकार के शुल्क बढ़ सकते हैं। इसमें फ्रीहोल्ड कन्वर्जन शुल्क, जमीन के उपयोग में बदलाव का शुल्क, ग्राउंड रेंट और लाइसेंस फीस जैसी चीजें शामिल हैं। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो पहले से ही महंगाई का सामना कर रहे हैं और अब उन्हें प्रॉपर्टी के काम में और ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।
प्रॉपर्टी के लेन-देन पर पड़ेगा असर
उन्होंने कहा कि बिना फ्रीहोल्ड स्टेटस के प्रॉपर्टी को बेचना, खरीदना या बैंक से लोन लेना आसान नहीं होता। ऐसे में जब फ्रीहोल्ड कन्वर्जन ही रुका हुआ है, तो प्रॉपर्टी बाजार पर इसका नकारात्मक असर पड़ना तय है। इससे दिल्ली में रियल एस्टेट सेक्टर धीमा पड़ सकता है।
पेनल्टी बढ़ने से और बढ़ेगा बोझ
यादव ने बताया कि पहले अगर कोई व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी को समय पर फ्रीहोल्ड नहीं करवाता था, तो तीन साल तक कोई पेनल्टी नहीं लगती थी। लेकिन अब नियम बदल गए हैं और देरी होने पर हर साल पेनल्टी देनी पड़ सकती है। इसका मतलब यह है कि लोगों को अब दोहरी मार झेलनी पड़ेगी—एक तरफ बढ़े हुए शुल्क और दूसरी तरफ पेनल्टी।
हजारों लोगों की उम्मीदों पर असर
इस फैसले से हजारों मकान मालिक और घर खरीदने वाले लोग प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग अपने भविष्य की योजनाएं बना चुके थे, लेकिन अब उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है देवेन्द्र यादव का कहना है कि यह फैसला आम जनता के हित में नहीं है और इससे लोगों के घर का सपना और दूर हो सकता है।
सरकार और डीडीए पर सीधा आरोप
अंत में देवेन्द्र यादव ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार और डीडीए मिलकर लोगों पर आर्थिक बोझ डाल रही हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम उन लोगों के लिए खासतौर पर नुकसानदायक है जो अपने घर को सुरक्षित और कानूनी रूप से मजबूत बनाना चाहते हैं।
आम लोगों पर बढ़ता दबाव
पूरे मामले को देखें तो फ्रीहोल्ड कन्वर्जन पर लगी रोक और सर्कल रेट में संभावित बढ़ोतरी से दिल्ली के आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या फैसला लेती है और क्या लोगों को राहत देने के लिए कोई नया समाधान सामने आता है।