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ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और इस बीच घोषित युद्धविराम अब एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। ईरान की परमाणु एजेंसी के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि परमाणु कार्यक्रम के तहत यूरेनियम संवर्धन का अधिकार बचाए रखना अमेरिका के साथ किसी भी समझौते के लिए अनिवार्य शर्त है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस भीषण युद्ध को रोकने के लिए जिस युद्धविराम की घोषणा की गई थी, वह फिलहाल लड़खड़ाता नजर आ रहा है। दरअसल, पाकिस्तान में नियुक्त ईरानी राजदूत रजा अमीरी मुगाद्दम ने इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल के आगमन वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी है। यह पोस्ट हटाए जाने के बाद वार्ता के आयोजन पर संशय और सस्पेंस गहरा गया है, जिससे पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

कहीं अधिक घातक हमलों का सामना करना पड़ेगा
हालांकि, सिर्फ यही कारण नहीं हैं। इससे पहले युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद इस्राइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर जोरदार हमले किए। बुधवार का दिन इस युद्ध का सबसे खूनी दिन साबित हुआ। इस्राइली हमले में 250 से अधिक लोग मारे गए। ईरान का दावा है कि युद्धविराम में लेबनान भी शामिल था, जबकि इस्राइल और अमेरिका इससे इनकार कर रहे हैं। इसके इतर, दुनिया के 20 फीसदी तेल व्यापार के लिए अहम होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बरकरार है। लेबनान पर हुए हमले के बाद ईरान ने इसे फिर से बंद कर दिया है। ईरानी एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि अगर लेबनान पर हमले नहीं रोके गए तो होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। दूसरी ओर ट्रंप ने एक बार फिर से चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ईरान ने समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया, तो उसे पहले से भी कहीं अधिक घातक हमलों का सामना करना पड़ेगा।

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