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ओडिशा में छात्रा की आत्महत्या की कोशिश भाजपा शासन में बढ़ते महिला अपराध और न्याय की लड़ाई- अलका लाम्बा 

ओडिशा समेत देश के कई राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर उन राज्यों में जहां भारतीय जनता पार्टी(BJP) की सरकार है – जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और ओडिशा – वहां महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक बन चुकीहै।ओडिशा में भाजपा सरकार के एक साल के शासन में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 2 लाख 14 हज़ार से अधिक मामले सामने आए हैं। इनमें सेबलात्कार के 3,054 और हत्या के 1,207 मामले दर्ज किए गए हैं। एक साल में ही 9 एसिड अटैक की घटनाएं भी सामने आई हैं। ये आंकड़े साफदिखाते हैं कि महिलाओं के खिलाफ अपराध कितनी भयावह गति से बढ़ रहे हैं। बालासोर की बेटी की करुण कहानीबालासोर ज़िले के फकीर मोहन कॉलेज की 20 वर्षीय छात्रा ने कॉलेज कैंपस में खुद को आग लगा ली। यह छात्रा बी.एड. की पढ़ाई कर रही थी औरबीजेपी-आरएसएस की छात्र इकाई एबीवीपी की पदाधिकारी भी थी। वह फिलहाल भुवनेश्वर के एम्स अस्पताल में 95 प्रतिशत जलने की हालत मेंभर्ती है, जहां उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। यह छात्रा कई दिनों से कॉलेज के शिक्षा विभाग के प्रमुख (एचओडी) समीर कुमार साहू द्वारा यौनशोषण के दबाव का सामना कर रही थी। एचओडी ने उसे धमकी दी कि यदि वह यौन संबंधों के लिए राज़ी नहीं हुई, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतनेहोंगे। छात्रा ने 30 जून को प्रिंसिपल दिलीप घोष को इस बारे में जानकारी दी, और 1 जुलाई को भाजपा के सांसद, राज्य सरकार और विभाग को भीइसकी शिकायत की। दुखद बात यह रही कि विभाग ने आरोपी शिक्षक से कोई सवाल नहीं किया, बल्कि छात्रा से ही लगातार पूछताछ की गई।विभाग ने उसे धमकाया कि यदि वह अपने आरोप साबित नहीं कर सकी तो उसी के खिलाफ कार्रवाई होगी। मानसिक यातना से परेशान होकर वहधरने पर बैठ गई और जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उसने आत्मदाह कर लिया। न्याय की मांग और राजनीतिक चुप्पीइस घटना के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भेजा, जिसने पीड़िता के परिवार से मुलाकात कीऔर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जो जल्द सामने लाई जाएगी। कांग्रेस पार्टी हर मंच पर पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन जब कांग्रेस के कार्यकर्ता छात्रा से मिलने एम्स पहुंचे, तो भाजपा सरकार और एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने घेराबंदी कर मिलने से रोक दिया। राष्ट्रपति से अपीलआज देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के दौरे पर हैं और वही एम्स भुवनेश्वर में कार्यक्रम में भाग ले रही हैं, जहां पीड़िता भर्ती है। ऐसे में सवालउठता है – क्या राष्ट्रपति जी पीड़िता से मिलने जाएंगी? क्या वे एक ओडिशा की बेटी के दर्द को सुनेंगी? यह वही छात्रा है जिसने प्रधानमंत्री मोदी सेमिलने की कोशिश की थी जब वह ओडिशा दौरे पर आए थे, लेकिन उसे रोक दिया गया। सवाल यह है कि उसे प्रधानमंत्री से मिलने क्यों नहीं दियागया? अपराधियों को संरक्षण क्यों?इस मामले में स्थानीय भाजपा सांसद ने कॉलेज के प्रिंसिपल को पत्र लिखकर कहा कि एचओडी पर गंभीर आरोप हैं, उसे पद से हटाया जाए, लेकिनआज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे साफ है कि भाजपा सरकार और आरएसएस के प्रभाव में पुलिस-प्रशासन काम कर रहे हैं। अपराधी भाजपानेताओं की शरण में चले जाते हैं और उन्हें सजा से बचा लिया जाता है। कड़ा कानून लेकिन कमजोर कार्रवाईकई बार सख्त कानून बनाए गए, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ। जब तक पुलिस-प्रशासन पर भाजपा-आरएसएस और एबीवीपी के दबाव का अंतनहीं होगा, तब तक महिलाओं को न्याय मिलना मुश्किल है। ओडिशा में यह एक छात्रा की नहीं, बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है। एक बहादुर लड़की ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन सरकार, विभागऔर पुलिस-प्रशासन ने उसे न्याय देने के बजाय चुप कराने की कोशिश की। आज यह जिम्मेदारी सिर्फ कांग्रेस या विपक्ष की नहीं, बल्कि देश की हरसंवेदनशील आत्मा की है कि वह इस बच्ची के लिए न्याय की मांग करे।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी से देश उम्मीद करता है कि वह राजनीति से ऊपर उठकर आज एम्स भुवनेश्वर में भर्ती इस बेटी से मिलें, उसका हाल जानें औरपूरे देश को यह संदेश दें कि महिला सम्मान और न्याय से बड़ा कोई पद नहीं होता।

तिब्बत मुद्दे पर चीन की सख्ती के बीच एस. जयशंकर की चीन यात्रा, रिश्तों में नई करवट या तनाव का संकेत?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की चीन यात्रा ऐसे वक्त में हो रही है जब भारत-चीन के बीच धीरे-धीरे संबंध सामान्य हो रहे हैं. लेकिन तिब्बत और दलाईलामा जैसे मुद्दे पर चीन की तीखी टिप्पणी बताती है कि दोनों देशों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर मतभेद अब भी गहरे हैं. भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की चीन यात्रा से ठीक पहले, चीनी दूतावास ने तिब्बत से जुड़े मुद्दों को भारत-चीन संबंधों में कांटा बताया है और कहा है कि यह भारत केलिए एक बोझ बन गया है. जयशंकर 14 और 15 जुलाई को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने चीन जारहे हैं. यह उनकी चीन की पहली यात्रा है जब से 2020 में लद्दाख में भारत-चीन के बीच सैन्य तनाव पैदा हुआ था. भारत सरकार के सार्वजनिक रुख के खिलाफबीजिंग में भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों की तरफ दिए गए बयानों पर आपत्ति जताते हुए. चीन के दूतावास की प्रवक्ता यू जिंगने कहा कि कुछ भारतीय विशेषज्ञों ने दलाई लामा के पुनर्जन्म को लेकर अनुचित बयान दिए हैं जो भारत सरकार के सार्वजनिक रुख के खिलाफ हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘उन्हें यह समझना चाहिए कि तिब्बत से जुड़े मुद्दे चीन की आंतरिक बातें हैं और इसमें बाहरी दखल बर्दाश्त नहींकिया जाएगा. दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन चीन का आंतरिक मामला है. हाल ही में दलाई लामा ने कहा था कि उनके भविष्य के पुनर्जन्मकी पहचान का अधिकार केवल तिब्बती बौद्धों की एक विश्वसनीय संस्था के पास होगा. इस पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि दलाई लामाका पुनर्जन्म चीनी सरकार की अनुमति से ही होगा. चीन तिब्बत को शीजांग कहता है और वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप को अपनी संप्रभुता केखिलाफ मानता है.चीन की प्रवक्ता ने कहा तिब्बत (शीजांग) मुद्दा भारत-चीन संबंधों में एक कांटा है और यह भारत के लिए बोझ बन चुका है. अगरभारत तिब्बत कार्ड खेलता है तो वह खुद को ही नुकसान पहुंचाएगा. रिश्ते सुधारने की करेंगें कोशिशजयशंकर की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख के कुछ विवादित इलाकों से सैनिकों को हटाने के बाद रिश्ते सुधारने कीकोशिशें शुरू की हैं. इस दौरान उनकी मुलाकात चीन के विदेश मंत्री वांग यी से भी होने की संभावना है पिछले महीने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भीचीन के शहर किंगदाओ में एससीओ की रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था. इससे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी दो बारचीन का दौरा कर चुके हैं भारत इस समय भविष्य की दिशा तय करने वाले कई जटिल मुद्दों के बीच खड़ा है. जहां एक ओर आर्थिक सहयोग औरक्षेत्रीय स्थिरता की संभावनाएं हैं वहीं दूसरी ओर तिब्बत, अरुणाचल प्रदेश और सीमावर्ती तनाव जैसे विषय संबंधों की नींव को चुनौती दे रहेहैं.जयशंकर की यह यात्रा इन जटिलताओं के बीच भारत की रणनीतिक सूझबूझ और संतुलनकारी कूटनीति की अग्निपरीक्षा भी साबित हो सकती है. इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी चीन के किंगदाओ शहर में SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारअजीत डोभाल भी हाल ही में दो बार चीन का दौरा कर चुके हैं.

भारतीय न्यायपालिका सिर्फ फैसले नहीं देती, अधिकारों की रक्षक भी है स्वीडन में बोले सुप्रीम कोर्ट के जज सूर्यकांत

स्वीडन में बसे भारतीयों को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि भारत की अदालतें सिर्फ फैसले सुनाने का काम नहीं करतीं बल्कि समाजके कमजोर और हाशिए पर खड़े लोगों के अधिकारों की रक्षा करती हैं. इसके साथ-साथ अदालतें लोगों की आजादी और हमारे लोकतंत्र की सच्चाईको बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती हैं.सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था सिर्फ देश कीसीमाओं तक सीमित नहीं है. देश की अदालतों ने कुछ मामलों में, अनिवासी भारतीयों को भी मौलिक अधिकारों की सुरक्षा प्रदान की है. ये बात उन्होंनेस्वीडन में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए कही. नैतिक के आवाज में भी किया है कामन्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आगे कहा कि भारत में, अदालतों ने न केवल निर्णायक के रूप में बल्कि हाशिए पर पड़े लोगों के अधिकारों की रक्षा, स्वतंत्रताकी रक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अखंडता को बनाए रखते हुए नैतिक आवाज के रूप में भी काम किया है.उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने कईनिर्णयों और सैद्धांतिक हस्तक्षेपों के माध्यम से धर्मनिरपेक्षता, समानता और गरिमा जैसे मूल्यों को कायम रखा है. जो हमारी सांविधानिक पहचान कीआधारशिला हैं उन्होंने कहा, ‘भारतीय न्यायपालिका ने इन जटिलताओं को तेजी से पहचाना है और अनिवासी भारतीयों के लिए न्याय को और अधिकसुलभ बनाने का प्रयास किया है.सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका प्रमुख सांविधानिक स्तंभों में से एक है और इस दृष्टिकोण कोवास्तविकता में बदलने में केंद्रीय भूमिका निभाती है. उन्होंने कहा कि वैश्विकृत दुनिया में, जहां पहचानें अक्सर धुंधली हो जाती हैं और सीमाएं कमकठोर हो जाती हैं, वहां खुद को बेसहारा महसूस करना आसान है. फिर भी, प्रवासी भारतीयों ने दुनिया को दिखाया है कि कैसे कोई प्रामाणिक रूप सेभारतीय रहते हुए भी सचमुच वैश्विक हो सकता है. नाजुक है संतुलनन्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आगे कहा कि यह एक नाजुक संतुलन है लेकिन आपने इसे शालीनता और दृढ़ विश्वास के साथ साधा है. हमें यह नहीं भूलनाचाहिए कि पहचान सिर्फ विरासत में नहीं मिलती। इसे सक्रिय रूप से जिया और प्रसारित किया जाता है. इस भाषण में न्यायमूर्ति सूर्यकांत नेन्यायपालिका को लोकतंत्र की आत्मा बताया और कहा कि भारत की अदालतें लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अखंडता बनाए रखने में केंद्रीय भूमिकानिभाती हैं. उन्होंने कहा कि एक वैश्वीकृत दुनिया में, जहां सीमाएं और पहचानें धुंधली होती जा रही हैं वहां भारतीय न्यायपालिका ने अपनी जिम्मेदारीको और भी गंभीरता से निभाया है. उन्होंने कहा कि पहचान केवल विरासत में नहीं मिलती, बल्कि उसे जिया और आगे बढ़ाया जाता है। ऐसे में प्रवासीभारतीयों की भूमिका वैश्विक स्तर पर भारत की संस्कृति, मूल्यों और लोकतंत्र के संदेश को फैलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है.

रेलवे में बड़ा बदलाव सभी कोच और इंजनों में लगेंगे CCTV कैमरे, बढ़ेगी यात्रियों की सुरक्षा बोले केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव

रेल मंत्रालय ने यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सभी 74 हजार ट्रेन कोचों और 15 हजार इंजनों में कैमरे लगवाने का फैसला लिया है. रेल मंत्रीअश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी दी रेलवे हर कोच में 4 डोम टाइप सीसीटीवी कैमरे लगाएगा डिब्बे के हर गेट पर दो कैमरे होंगे.यात्रियों कीसुरक्षा और पुख्ता करने के लिए रेलवे ने देश के सभी 74,000 ट्रेन कोच और 15,000 लोकोमोटिव (इंजन) में सीसीटीवी कैमरा लगाने का फैसलाकिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 12 जुलाई को हुई बैठक में इस फैसले को मंजूरी दी. रेल मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सभीकोच और इंजन में सीसीटीवी कैमरा लगाने फैसला उत्तर रेलवे में सफल ट्रायल के बाद लिया गया. डिब्बे के हर गेट पर होगें दो कैमरेजहां यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों से इस पायलट प्रोजेक्ट पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी. रेलवे हर कोच में 4 डोम टाइप सीसीटीवी कैमरे लगाएगाडिब्बे के हर गेट पर दो कैमरे होंगे. इसके अलावा हर इंजन में 6 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. इनकी पोजीशन फ्रंट, रियर और इंजन के दोनों साइड मेंहोगी. इंजन में लोको के हर केबिन (फ्रंट और रियर) में एक-एक डोम कैमरा और दो डेस्क माउंटेड माइक्रोफोन भी लगाए जाएंगे. रेलवे, सीसीटीवी डाटापर एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल भी करेगा. जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और आसान हो जाएगी. मंत्रालय ने कहा कियह कदम रेलवे के आधुनिकीकरण के प्रयास सुरक्षित, संरक्षित और यात्री अनुकूल यात्रा अनुभव के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है. सीसीटीवीकैमरा लगने के बाद ट्रेनों में चोरी, छेड़छाड़, लूटपाट और असामाजिक तत्वों की हरकतों पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी. AI का भी करेगा उपयोगरेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर भी अब सख्त कार्रवाई संभव होगीरेलवे CCTV डेटा पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग भीकरेगा, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तुरंत हो सकेगी. AI सिस्टम संदिग्ध हरकतों को अलर्ट के रूप में फीड करेगा. जिससे सुरक्षाकर्मी त्वरितकार्रवाई कर सकें.मंत्रालय ने कहा कि यह कदम रेलवे के आधुनिकीकरण और स्मार्ट सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में एक मजबूत प्रयास है. CCTV कैमरेलगने के बाद ट्रेनों में होने वाली चोरी, छेड़छाड़, लूटपाट और असामाजिक तत्वों की हरकतों पर प्रभावी रोक लगेगी. साथ ही, रेल संपत्ति को नुकसानपहुंचाने वालों के खिलाफ भी अब कार्रवाई आसान होगी। रेलवे की यह नई व्यवस्था यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और पारदर्शी यात्रा अनुभव देने कीदिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का निर्देश, नकली और घटिया उर्वरकों पर सख्त कार्रवाई हो

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से नकली एवं घटिया उर्वरकों की बिक्री के खिलाफ तत्कालकड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में चौहान ने कहा, राज्य उर्वरक उत्पादन और बिक्री की नियमित निगरानी करने के साथनमूने लेकर परीक्षण करें. पारंपरिक उर्वरकों के साथ नैनो-उर्वरकों पर जबरन टैगिंग तुरंत बंद करने पर ध्यान दें. कृषि मंत्री ने कहा दोषियों के खिलाफलाइसेंस रद्द करने और एफआईआर दर्ज करने सहित सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए. दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी अभियोजनसुनिश्चित किया जाना चाहिए. राज्यों को दिए निर्देश में उन्होंने कहा वे किसानों और कृषक समूहों को निगरानी प्रक्रिया में शामिल करने के लिएप्रतिक्रिया एवं सूचना प्रणालियां विकसित करें. किसानों को असली-नकली उत्पादों की पहचान के बारे में शिक्षित करने के लिए विशेष प्रयास करें. यह पत्र नकली उर्वरकों की बिक्री, सब्सिडी वाले उर्वरकों की कालाबाजारी और देशभर में जबरन टैगिंग जैसी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने केउद्देश्य से जारी किया गया है. अभियान शुरु करने का किया आग्रहचौहान ने सभी राज्यों से नकली और घटिया कृषि आदानों की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए निर्देशों के अनुसार राज्यव्यापी अभियान शुरू करनेका आग्रह किया. उन्होंने कहा, राज्य स्तर पर इस कार्य की नियमित निगरानी से किसानों के हित में एक प्रभावी और स्थायी समाधान निकलेगा. उन्होंनेसभी राज्यों से आग्रह किया कि वे नकली और घटिया कृषि आदानों की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक राज्यव्यापी अभियान चलाएं औरइस कार्य की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करें।यह कदम नकली उर्वरकों की बिक्री, सब्सिडी वाले उर्वरकों की कालाबाजारी और जबरन टैगिंग जैसीअवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है. चौहान ने राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे किसानों और कृषक समूहों को निगरानीप्रक्रिया में शामिल करें और प्रतिक्रिया एवं सूचना प्रणालियां विकसित करें ताकि जमीनी स्तर पर भी निगरानी सुनिश्चित हो सके. साथ ही उन्होंनेकिसानों को असली और नकली उत्पादों की पहचान सिखाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया. कृषि मंत्री ने विशेष रूप सेयह निर्देश दिया कि पारंपरिक उर्वरकों के साथ नैनो-उर्वरकों की जबरन टैगिंग को तुरंत रोका जाए। उन्होंने इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुएगलत प्रथा करार दिया.

शराब की नई दुकानों पर ब्रेक अजित पवार बोले, विधानसभा की मंजूरी के बिना नहीं मिलेगा लाइसेंस

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि अब शराब की दुकानों के नए लाइसेंस विधानसभा को विश्वास में लिए बिना जारी नहीं किए जाएंगे. इससे पहले राकांपा (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने सरकार पर 328 शराब दुकानों के लाइसेंस देकर राज्य को शराब की लत मेंधकेलने का आरोप लगाया था. आव्हाड ने यह भी कहा कि यह नीति संतों की भूमि महाराष्ट्र को शराब के नशे की लत में डुबो रही है. महाराष्ट्र केउपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार ने यह नियम बना दिया है कि अब विधानसभा को विश्वास में लिए बिना शराब कीदुकान के लिए नया लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा. इससे पहले दोपहर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड नेआरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ‘आर्थिक संकट’ से उबरने के लिए 328 शराब की दुकानों कोनए लाइसेंस देने की योजना बना रही है उन्होंने कहा था कि इससे संतों की भूमि महाराष्ट्र शराब की लत में डूब जाएगा. पुणे में पत्रकारों से बातचीत मेंअजित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में शराब की दुकानों को लेकर नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है. नियमों के अनुसार दी जाती है अनुमतिउन्होंने कहा हमने एक नियम बनाया है कि अगर राज्य में शराब की दुकान के लिए लाइसेंस देना है. तो उसे विधानसभा को विश्वास में लिए बिना नहींदिया जाएगा. पवार ने कहा कि बाकी राज्यों में शराब की दुकानों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन महाराष्ट्र में इस पर पूरी प्रक्रिया के तहत औरनियमों का पालन करते हुए फैसला लिया जाता है. उन्होंने कहा हमारी कार्यप्रणाली अलग है. अगर कोई दुकान स्थानांतरित करनी हो. तो केवलनियमों के अनुसार ही अनुमति दी जाती है। इसके लिए एक समिति होती है जो फैसला करती है अगर किसी क्षेत्र की महिलाएं आपत्ति जताती हैं तोहम वहां की शराब की दुकानें बंद कर देते हैं अजित पवार ने आश्वासन दिया कि अगर शराब की दुकानों को लेकर कोई आरोप सही पाए जाते हैं तोसरकार उस पर कार्रवाई करेगी. इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जितेंद्र आव्हाड ने कहा था कि महाराष्ट्र की शराब नीति राज्य को शराब की लत मेंधकेल देगी और लाखों परिवारों को परेशान करेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लड़की बहिन योजना जैसी योजनाओं के लिए पैसे जुटाने केलिए 328 नई शराब की दुकानों के लाइसेंस देने की योजना बना रही है. लड़की बहिन योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये कीमदद दी जाती है. आव्हाड ने कहा खाली खजाना भरने के लिए शराब पर आधारित नीति अपनाना परिवारों के साथ धोखा है. जनस्वास्थ्य की रक्षा करने के लिएलड़की, बहन को पैसा देने के लिए यह सरकार भाइयों, पतियों और पिताओं से धोखा कर रही है. यह सरकार इतिहास में शराब बेचने के लिए जानीजाएगी न कि जनस्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र संत ज्ञानेश्वर, तुकाराम, तुकडोजी महाराज और गाडगे बाबा जैसे संतों कीभूमि है इसे अब शराब की दुकानों और बार में बदलता जा रहा है। आव्हाड ने आरोप लगाया कि 50 साल पहले रद्द हुए लाइसेंस अब एक करोड़ रुपयेमें बेचे जा रहे हैं जबकि उनकी बाजार कीमत 15 करोड़ रुपये है. उन्होंने कहा कि उनके पास 47 कंपनियों के निदेशकों की सूची है जो मंत्रालय केचक्कर काट रहे हैं ताकि ये लाइसेंस मिल जाएं. उन्होंने कहा इस सरकार को इस बात की परवाह नहीं है कि हर घर में पानी मिले या नहीं, लेकिनशराब की आपूर्ति पूरी होनी चाहिए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, अगर यही सरकार की सोच और शासन मॉडल है. तो पैसों के लिए गेटवे ऑफ इंडियाको भी बेच दीजिए। जब 1974 में राज्य सरकार ने ऐसा ही कुछ करने की कोशिश की थी. तो मृणालताई गोरे, अहिल्याबाई रंगनेकर और मधु दंडवतेजैसे नेताओं ने आंदोलन चलाया था. जिससे सरकार को फैसला वापस लेना पड़ा था अब 50 साल बाद यह सरकार फिर से उसी आग से खेल रही है. उन्होंने राज्य की जनता खासकर महिलाओं से अपील की कि वे इस शराब नीति के खिलाफ सड़कों पर उतरें.

टीवीके प्रमुख विजय ने पुलिस हिरासत में मौतों पर द्रमुक सरकार पर साधा निशाना, न्याय को लेकर की मांग

टीवीके प्रमुख विजय ने पुलिस हिरासत में मौतों को लेकर द्रमुक सरकार पर निशाना साधा और कहा कि यह प्रचार करने वाली सरकार अब ‘सॉरीमॉडल सरकार’ बन चुकी है. उन्होंने शिवगंगा के अजित कुमार की कथित तौर पर हिरासत में मौत पर न्याय की मांग करते हुए मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से माफी की मांग की. विजय ने द्रमुक सरकार पर मामले को सीबीआई के पास सौंपकर जिम्मेदारी टालने का आरोप लगाया. तमिलगा वेत्रीकझगम (टीवीके) के प्रमुख और अभिनेता से राजनेता बने विजय ने कथित तौर पर पुलिस हिरासत में हो रही मौतों के खिलाफ एक रैली को संबोधितकिया. उन्होंने आज सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि खोखली, प्रचार (पब्लिसिटी) करने वाली सरकार अब ‘सॉरी मॉडल सरकार’ बन चुकी है. विरोध रैली में शिवगंगा जिले के अजित कुमार की कथित तौर पर हिरासत में पिटाई के बाद मौत के मामले में न्याय की मांग की गई. 24 लोगों के परिवार से मांगी माफीविजय ने कहा पीड़ित एक सामान्य परिवार से था और मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन ने कुमार के परिवार से मांगी है. जो उचित है यह पहली बार है जबविजय ने एक विरोध प्रदर्शन रैली की अगुवाई की है. रैली में राज्य के कई हिस्सों से टीवीके के कार्यकर्ता शामिल हुए. विजय ने काले कपड़े पहने हुएथे और एक तख्ती पकड़ी हुई थी. जिसमें लिखा था- सॉरी वेंदम, नीडी वेंदम (हमें माफी नहीं, न्याय चाहिए). टीवीके प्रमुख ने पूछा कि क्या स्टालिन ने2021 से द्रमुक शासन के दौरान कथित तौर पर पिटाई के कारण मारे गए 24 लोगों के परिवारों से माफी मांगी है. उन्होंने कहा, कृपया उन सभी सेमाफी मांगिए. साथ ही क्या आपने उन 24 पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा दिया है? कृपया उन्हें मुआवजा भी दीजिए। विजय ने दावा किया किजब अन्नाद्रमुक सरकार ने साठनकुलम मामले को स्थानांतरित (ट्रांसफर) किया था, तब स्टालिन ने कहा था कि यह तमिलनाडु पुलिस का अपमान है. साठनकुलम मामले पुलिस ने 2020 में कथित तौर पर पी जेयराज और उनके बेटे जे बेन्निक्स की पिटाई की थी. टीवीके प्रमुख ने हैरानी जताई किक्या हाल ही में द्रमुक सरकार की ओर से अजित कुमार की हिरासत में मौत का मामला सीबीआई को सौंपना उसी तरह का अपमान नहीं है. उन्होंनेकहा कि दोनों मामले एक जैसे ही हैं इसके अलावा, विजय ने सवाल किया.आरएसएस व भाजपा की है कठपुतलीआप सीबीआई के पीछे क्यों छिप रहे हैं? सीबीआई तो केवल आरएसएस और भाजपा की कठपुतली है. विजय ने कहा कि उनकी पार्टी टीवीके नेविशेष जांच दल (एसआईटी) के तहत कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है और इसी डर से द्रमुक सरकार केंद्र के पीछे छिप रही है. विजय नेकहा, कोर्ट ने कई अत्याचार के मामलों पर राज्य सरकार से सवाल किए हैं जिनमें अन्ना विश्वविद्याल की छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न औरअजित कुमार की हिरासत में प्रताड़ना के मामले भी शामिल हैं. उन्होंने कहा अगर हर मामले में कोर्ट को दखल देने पड़ता है और सवाल करना होता हैतो फिर आप लोग यहां क्यों हैं? सरकार का मकसद क्या है? मुख्यमंत्री का कार्यालय किसलिए है?विजय ने साठनकुलम मामले का हवाला देते हुएकहा कि जब अन्नाद्रमुक सरकार ने उस मामले को ट्रांसफर किया था, तब स्टालिन ने तमिलनाडु पुलिस का अपमान बताया था. अब अजित कुमार केमामले में भी सीबीआई को सौंपना उसी तरह का अपमान है. उन्होंने सवाल किया कि जब कोर्ट को हर मामले में दखल देना पड़ता है, सवाल करनापड़ता है तो फिर सरकार का मकसद क्या है? मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका क्या रह जाती है?

तेहरान पर इजरायली मिसाइल हमला राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान घायल, ईरान ने बदले की चेतावनी दी

International News: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान जून में इस्राइली मिसाइल हमले में घायल हो गए. हमला तेहरान में हुई राष्ट्रीय सुरक्षापरिषद की बैठक को निशाना बनाकर किया गया था. इसके बाद राष्ट्रपति को आपातकालीन रास्ते से बाहर निकाला गया था इस्राइल पर हमले कीसटीक जानकारी होने से जासूसी की आशंका है. ईरान ने चेतावनी दी कि इसका जवाब जरूर दिया जाएगा और इस्राइल को इसकी कीमत चुकानीहोगी. तेहरान में 15 जून को एक बेहद गोपनीय मीटिंग के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान पर इस्राइल ने हवाई हमला किया. इस हमले मेंराष्ट्रपति को पैर में हल्की चोटें आईं और उन्हें आपातकालीन रास्ते से भागना पड़ा. यह हमला ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक कोनिशाना बनाकर किया गया था. इस बैठक में तीनों प्रमुख शाखाओं के प्रमुख अधिकारी मौजूद थे. राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अमेरिकी पत्रकार टकरकार्लसन को दिए एक इंटरव्यू में हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने कोशिश की. चुकानी पड़ेगी कीमतलेकिन वे असफल रहे राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि इस हमले के पीछे अमेरिका नहीं बल्कि इजरायल था. वे उस समय एक बैठक में थे जबहमला हुआ. अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने बैठक स्थल की इमारत पर छह मिसाइलें दागीं, जिनका लक्ष्य निकास द्वारों औरवेंटिलेशन को ब्लॉक करना था ताकि कोई बाहर न निकल सके. धमाकों के बाद बिजली आपूर्ति बंद हो गई, लेकिन आपातकालीन रास्तों से सभीअधिकारी, जिनमें राष्ट्रपति भी शामिल थे, सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे.ईरानी अधिकारियों ने इस हमले को लेकर जांच शुरू कर दी है रिपोर्ट केअनुसार यह शक जताया जा रहा है कि इजरायल को हमले से पहले जो सटीक जानकारी मिली. उसके पीछे देश के भीतर जासूसों का हाथ हो सकताहै. सरकार अब यह जांच कर रही है कि कहीं अंदर से कोई जानकारी तो नहीं लीक हुई थी. ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस हमले काबदला जरूर लिया जाएगा. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा “यह हमला यूं ही नहीं जाएगा. इजरायल को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. इजराइल में 28 लोगों की हुई मौतउन्होंने यह भी बताया कि यह हमला तीनों प्रमुख सरकारी शाखाओं के प्रमुखों की हत्या कर सत्ता को अस्थिर करने के मकसद से किया गया था. गौरतलब है कि यह हमला इजरायल द्वारा 13 जून को शुरू की गई बड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद हुआ है. जिसमें ईरान के कई सैन्य कमांडर और परमाणुवैज्ञानिक मारे गए थे. ईरान के मुताबिक इस संघर्ष में अब तक 1,060 लोग मारे गए हैं जबकि ईरान की जवाबी कार्रवाई में इजरायल में 28 लोगोंकी मौत हुई. इसके बाद अमेरिका की मध्यस्थता से युद्धविराम लागू किया गया।ईरान के राष्ट्रपति पर हुआ यह हमला ना सिर्फ दोनों देशों के बीचतनाव को और बढ़ाता है बल्कि यह भी दिखाता है कि इजरायल अब ईरान की टॉप लीडरशिप को भी निशाना बना रहा है. आने वाले दिनों में इसहमले का राजनीतिक और सैन्य असर गहरा हो सकता है. यह हमला 13 जून 2025 को शुरू हुई 12‑दिवसीय युद्ध के दौरान आया. जिसमें इज़राइलने ईरानी सैन्य और परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया। ईरान के अनुसार इस संघर्ष में अब तक 1,060 लोग मारे गए, और 28 की मौत इज़राइलमें रहस्यमय हमलों में हुई. इसके बाद अमेरिका की मध्यस्थता से 24 जून को युद्धविराम लागू हुआ था.

एस. जयशंकर की चीन यात्रा कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली पर जताई खुशी, वैश्विक हालात पर हुई गहन चर्चा

जयशंकर ने कहा कि ‘जब हमारी मुलाकात हो रही है तो उस वक्त वैश्विक हालात बेहद जटिल बने हुए हैं। बतौर पड़ोसी देश और बड़ी अर्थव्यवस्थाएंहोने के नाते हमारे बीच विचारों का आदान-प्रदान बेहद अहम है. भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेशमंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए चीन दौरे पर हैं. चीन दौरे पर सोमवार को विदेश मंत्री ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से बीजिंग में मुलाकातकी. इस मुलाकात में भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली की भारत में खूब सराहना हुई. साथ ही विदेश मंत्री नेएससीओ की अध्यक्षता के लिए चीन का समर्थन किया. कैलाश मानसरोवर यात्रा छह साल के बाद फिर शुरू हुई है यह यात्रा साल 1981 से जारी हैलेकिन कोरोना महामारी, गलवान घाटी में हुए संघर्ष और 2020 से लेकर 2024 तक भारत चीन के बीच एलएसी पर तनाव के चलते कैलाशमानसरोवर यात्रा रुक गई थी. लाभकारी परिणाम सकते है सकतेअब भारत और चीन के संबंध फिर से पटरी पर आ रहे है जिसके बाद यह यात्रा इस साल फिर शुरू हुई. जून से अगस्त के बीच करीब 750 तीर्थयात्रीतिब्बत में कैलाश मानसरोवर की यात्रा करेंगे. कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदुओं, जैनियों और बौद्ध समुदाय के लोगों के लिए काफी अहम धार्मिक यात्रामानी जाती है भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि ‘हमने अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मनाई है. कैलाश मानसरोवर यात्रा कीबहाली की भी भारत में व्यापक रूप से सराहना की जा रही है. हमारे संबंधों के निरंतर बेहतर होने से पारस्परिक रूप से लाभकारी परिणाम मिल सकतेहैं. जयशंकर ने कहा कि ‘जब हमारी मुलाकात हो रही है तो उस वक्त वैश्विक हालात बेहद जटिल बने हुए हैं. बतौर पड़ोसी देश और बड़ीअर्थव्यवस्थाएं होने के नाते हमारे बीच विचारों का आदान-प्रदान बेहद अहम है. भारतीय विदेश मंत्री ने चीनी उपराष्ट्रपति के साथ मुलाकात में ये भीकहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कजान में हुई बैठक के बाद से दोनों देशों के संबंधों में सुधार हो रहा है. द्विपक्षीय संबंधों में लगातार सुधारउन्होंने कहा’भारत, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में चीन की सफल अध्यक्षता का समर्थन करता है. पिछले अक्तूबर में कजान में प्रधानमंत्री मोदीऔर राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच हुई बैठक के बाद से हमारे द्विपक्षीय संबंधों में लगातार सुधार हो रहा है. मुझे विश्वास है कि इस यात्रा में मेरी चर्चाएंइसी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगी. जयशंकर की यह चीन यात्रा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत-चीन संबंधों को फिर से पटरीपर लाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, SCO में सहयोग, और वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा करना दोनों देशों केबीच रिश्तों में सकारात्मक मोड़ का संकेत दे रहे हैं. जयशंकर ने वैश्विक परिस्थितियों को ‘बेहद जटिल’ बताया और कहा कि ऐसे समय में दो पड़ोसीदेशों और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में विचारों का आदान-प्रदान अत्यंत आवश्यक है. दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा, और आर्थिक सहयोगजैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया.

पंजाब में बेअदबी पर अब उम्रकैद कैबिनेट ने बिल को दी मंजूरी, विधानसभा में आज पेश होने की संभावना

पंजाब कैबिनेट में बेअदबी बिल को मंजूरी दे दी गई है मंजूरी मिलने के बाद आज ही बिल को विधानसभा में पेश किया जा सकता है. पंजाब मेंबेअदबी करने वालों को सजा दिलाने के लिए अभी कोई सख्त कानून नहीं है. इस कानून से धार्मिक ग्रंथों और स्थलों की बेअदबी करने वालों कोउम्रकैद मिलेगी. पंजाब में लंबे समय से बेअदबी कानून की मांग चली आ रही है। बेअदबी के मामलों में विशेष अदालतें गठित की जा सकेंगी। वहींबेअदबी के दोषियों को पैरोल नहीं मिलेगा. ध्यानाकर्षक प्रस्ताव पर मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि पंजाब से वैसे पानी की मांग की जाती हैलेकिन जब बाढ़ जैसे हालात होते हैं तो राजस्थान और हरियाणा पानी लेने के लिए तैयार नहीं होते हैं. उन्होंने कहा कि अब जब हिमाचल में बारिशअधिक हो रही है और सभी डैम में अधिक पानी आ रहा है तो हरियाणा ने 6100 क्यूसेक से अधिक पानी लेने से इनकार कर दिया है। इस संबंध मेंपंजाब सरकार को पत्र लिखा गया है. राजस्थान सरकार की तरफ से भी उनका ऐसा ही एक पत्र लिखा गया है. पंजाब में है बहुत ही संवेदनशील मुद्दागोयल ने कहा कि सभी बांधों को पक्का किया गया है और नदियों की सफाई करवाई गई है. विधायन राणा इंदर प्रताप यह प्रस्ताव लेकर आए थे. जिस पर बाढ़ की रोकथाम को लेकर सरकार की तरफ से क्या इंतजाम किए गए हैं. उस संबंध में सरकार से जवाब मांगा गया था बेअदबी पंजाब मेंबहुत संवेदनशील मुद्दा है. यही कारण है कि सरकार इस बिल पर आगे बढ़ने से पहले सभी धार्मिक संगठनों की राय लेना चाहती है. इस बिल के जरियेसरकार धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी पर सख्त सजा का प्रावधान कर सकती है. विधानसभा सत्र के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा बाढ़ और पानी कीआपूर्ति को लेकर उठाया गया. मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने ध्यानाकर्षक प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि पंजाब से अन्य राज्यों को पानी की मांग कीजाती है. लेकिन जब बाढ़ जैसे हालात होते हैं तो वही राज्य पानी लेने से इनकार कर देते हैं. डैमों में बढ़ रहा है लगातार जलस्तरगोयल ने बताया कि हरियाणा ने 6100 क्यूसेक से अधिक पानी लेने से मना कर दिया है. जबकि डैमों में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. इस बारे मेंपंजाब सरकार ने हरियाणा और राजस्थान सरकार को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी बांधों को मजबूत किया है और नदियों कीसफाई करवाई गई है ताकि बाढ़ की स्थिति को रोका जा सके. विधायक राणा इंदर प्रताप द्वारा लाए गए प्रस्ताव के जवाब में सरकार से बाढ़ कीरोकथाम के इंतजामों की जानकारी मांगी गई थी पंजाब में लंबे समय से बेअदबी कानून की मांग की जा रही थी. विशेषकर 2015 में हुए बेअदबी केमामलों के बाद से यह एक बेहद संवेदनशील और गंभीर सामाजिक-राजनीतिक मुद्दा बन गया है सरकार का कहना है कि बिल को लागू करने से पहलेसभी धार्मिक संगठनों से राय ली गई है.