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महाकुंभ पर पीएम मोदी के बयान पर राहुल गांधी का पलटवार, मृतकों को श्रद्धांजलि न देने पर जताई नाराजगी

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महाकुंभ पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी ने कहा कि वहप्रधानमंत्री की बात का समर्थन करना चाहते थे, लेकिन पीएम मोदी ने महाकुंभ भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि नहीं दी। राहुल ने यहभी आरोप लगाया कि उन्हें लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया। संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को रोजगारके मुद्दे पर भी बात करनी चाहिए थी। प्रियंका गांधी ने विपक्ष की आवाज को दबाने का लगाया आरोपकांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका मिलनाचाहिए था। उन्होंने कहा, “महाकुंभ पर प्रधानमंत्री सकारात्मक बात कर रहे थे, लेकिन विपक्ष को भी अपनी भावनाएं व्यक्त करने का अधिकार है।विपक्ष को कम से कम दो मिनट बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए थी।” पीएम मोदी का महाकुंभ पर संबोधनप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के सफल आयोजन पर लोकसभा में वक्तव्य दिया। उन्होंने इसे भारत केइतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ करार दिया और कहा कि महाकुंभ ने दुनिया को भारत के विराट स्वरूप का दर्शन कराया। पीएम मोदी ने इसे “सबकाप्रयास” का प्रतीक बताया और आयोजन को सफल बनाने वाले सभी व्यक्तियों और संगठनों का आभार व्यक्त किया। लोकसभा में हंगामा और स्पीकर का जवाबप्रधानमंत्री का भाषण समाप्त होते ही विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष ने सवाल पूछने का अधिकार मांगा, लेकिनलोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नियम 372 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री या कोई मंत्री वक्तव्य देते समय सवाल नहीं पूछे जासकते। रोजगार के मुद्दे पर चुप्पी पर सवालराहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर रोजगार के मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में शामिल हुए युवा रोजगार कीउम्मीद कर रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री ने इस पर कोई बात नहीं की। राहुल ने इसे “न्यू इंडिया” की नई तस्वीर बताते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया कोकमजोर करने का आरोप लगाया।

चार दशक बाद दिहुली दलित नरसंहार मामले में तीन दोषियों को फांसी, न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

चार दशक पुराने दिहुली दलित नरसंहार मामले में मैनपुरी कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश ने कप्तान सिंह, राम पाल और रामसेवक को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा और 50 हजार रुपए के जुर्माने का आदेश दिया है।क्या था दिहुली नरसंहार मामला?18 नवंबर 1981 की शाम को उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के दिहुली गांव में 17 हथियारबंद डकैतों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। इस बर्बरहमले में 23 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि इलाज के दौरान एक अन्य व्यक्ति ने दम तोड़ दिया था। इस तरह कुल 24 दलितों कीनिर्मम हत्या कर दी गई थी। मुकदमे की शुरुआत और आरोपितों की पहचानघटना के बाद स्थानीय निवासी लैइक सिंह की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। पुलिस जांच में 17 डकैतों को आरोपित किया गया, जिनमेंगिरोह के सरगना संतोष सिंह (उर्फ संतोसा) और राधेश्याम (उर्फ राधे) भी शामिल थे। हालांकि, मुकदमे के दौरान 13 आरोपियों की मौत हो गई, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और विपक्ष का समर्थनइस नरसंहार के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी। वहीं, विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने दिहुलीसे सादुपुर (फिरोजाबाद) तक पैदल यात्रा कर पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की थी। चार दशक बाद मिला न्यायशासकीय अधिवक्ता रोहित शुक्ला ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि चार दशक बाद पीड़ित परिवारों को न्याय मिला है। इस निर्णयसे समाज में यह संदेश गया है कि कानून से कोई अपराधी बच नहीं सकता। दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्पफांसी की सजा मिलने के बाद दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील करने का विकल्प मौजूद है। न्यायालय के इस फैसले को पीड़ित परिवारों नेन्याय की जीत करार दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी का भावुक पत्र,सुनीता विलियम्स को भारत आने का न्योता

नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर करीब नौ महीने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बिताने के बाद आखिरकार 19 मार्चको धरती पर वापस लौटने वाले हैं। उनका स्पेसक्राफ्ट सुबह लगभग 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर लैंड करेगा। नासा लगातार इस मिशन से जुड़ीजानकारी साझा कर रहा है। यदि मौसम अनुकूल रहा, तो सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की सुरक्षित वापसी समय पर हो जाएगी। ड्रैगन कैप्सूल की अनडॉकिंग: एक महत्वपूर्ण प्रक्रियावापसी से पहले सबसे अहम प्रक्रिया ड्रैगन कैप्सूल की ISS से अनडॉकिंग होगी, जिससे स्पेसक्राफ्ट सुरक्षित रूप से पृथ्वी की ओर प्रस्थान कर सके।स्पेसएक्स का यह क्रू मिशन 15 मार्च को अंतरिक्ष में भेजा गया था, जिसकी जिम्मेदारी एलन मस्क को सौंपी गई थी। तकनीकी समस्याओं के कारणमिशन में देरी हुई, लेकिन अब 17 घंटे के भीतर मिशन पूरा होने की उम्मीद है। पीएम मोदी का भावपूर्ण पत्र: भारत आने का निमंत्रणप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनीता विलियम्स को भारत आने का निमंत्रण देते हुए एक भावुक पत्र लिखा। पीएम मोदी ने पत्र में कहा कि भारत में सभीउनकी सुरक्षित वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने लिखा,“भले ही आप हजारों मील दूर हैं, लेकिन आप हमारे दिलों के बेहद करीब हैं। भारत के लोग आपके अच्छे स्वास्थ्य और आपके मिशन की सफलता केलिए प्रार्थना कर रहे हैं। आपकी वापसी के बाद हम भारत में आपसे मिलने को उत्सुक हैं। भारत के लिए अपनी सबसे प्रतिभाशाली बेटियों में से एककी मेजबानी करना हमारे लिए गर्व का विषय होगा।” पीएम मोदी ने याद किए पुराने किस्सेप्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में अमेरिका यात्रा के दौरान सुनीता विलियम्स और उनके दिवंगत पिता दीपक पंड्या से हुई मुलाकात को भी याद किया।उन्होंने कहा कि उस बातचीत के दौरान सुनीता विलियम्स का नाम आया और उन्होंने गर्व के साथ उनके कार्यों की सराहना की।सुनीता विलियम्स की उपलब्धियों पर गर्वप्रधानमंत्री ने कहा कि 1.4 अरब भारतीयों को विलियम्स की उपलब्धियों पर हमेशा गर्व रहा है। उन्होंने इस मौके पर सुनीता विलियम्स की दृढ़ता औरधैर्य की सराहना की। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने उनके पति माइकल विलियम्स को भी शुभकामनाएं भेजी और सुनीता की मां बोनी पंड्या काउल्लेख करते हुए कहा कि वह बेसब्री से अपनी बेटी की वापसी का इंतजार कर रही होंगी। मंत्री जितेंद्र सिंह ने साझा किया पीएम का पत्रकेंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का पत्र साझा किया और बताया कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री ने पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्रीमाइक मैसिमिनो से मुलाकात की थी। उनके माध्यम से ही यह पत्र सुनीता विलियम्स तक पहुंचाया गया। सुनीता विलियम्स का प्रतिक्रियासूत्रों के अनुसार, सुनीता विलियम्स प्रधानमंत्री मोदी के इस भावुक संदेश से बेहद प्रभावित हुईं और उन्होंने भारत के प्रति आभार प्रकट किया। उनकाकहना है कि अंतरिक्ष में बिताए गए नौ महीनों के बाद भारत लौटने का निमंत्रण उनके लिए गर्व की बात है।

लोकसभा में पीएम मोदी का संबोधन, महाकुंभ आयोजन पर आभार और गर्व का इजहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में महाकुंभ के सफल आयोजन पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने महाकुंभ की सफलता में योगदान देनेवाले सभी कर्मयोगियों और श्रद्धालुओं का धन्यवाद करते हुए कहा, “आज मैं इस सदन के माध्यम से देशवासियों को नमन करता हूं, जिनकी वजह सेमहाकुंभ का सफल आयोजन हुआ है।” उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और प्रयागराज की जनता का आभार व्यक्त किया।महाकुंभ: एकता और सामूहिक चेतना का प्रतीकप्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महाकुंभ जैसे ऐतिहासिक आयोजनों में लोग सुविधाओं की परवाह किए बिना बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। उन्होंने कहाकि ऐसे आयोजन हमारी सामूहिक चेतना और राष्ट्र की ताकत को उजागर करते हैं। पीएम मोदी ने कहा, “महाकुंभ ने हमारे सामर्थ्य से जुड़ी शंकाओंऔर आशंकाओं का उचित जवाब दिया है।” युवा पीढ़ी का जुड़ाव और आस्था का गर्वपीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का युवा आज गर्व के साथ अपनी परंपराओं और आस्था को अपना रहा है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ केआयोजन ने यह सिद्ध कर दिया है कि देश की नई पीढ़ी अपनी विरासत से गहराई से जुड़ रही है। “सबका प्रयास” का साकार रूपप्रधानमंत्री ने महाकुंभ आयोजन को “सबका प्रयास” का साक्षात उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि जैसे भगीरथ ने गंगा को धरती पर लाने के लिएकठिन प्रयास किया था, वैसे ही महाकुंभ में सभी का प्रयास दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में देश के कोने-कोने से आए लोग “अहम्” कोछोड़कर “वयम्” की भावना से एकजुट हुए। ऐतिहासिक महत्व और प्रेरणाप्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ आयोजन को स्वामी विवेकानंद के शिकागो सर्वधर्म सम्मेलन, गांधीजी के दांडी मार्च और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के”दिल्ली चलो” नारे जैसे ऐतिहासिक अवसरों की तरह महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ ने जागृत होते भारत का प्रतिबिंब प्रस्तुत किया। नदी उत्सव को नया विस्तार देने का आह्वानपीएम मोदी ने अपनी मॉरीशस यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि वह वहां त्रिवेणी संगम का पवित्र जल लेकर गए थे, जिसे गंगा तालाब मेंप्रवाहित किया गया। उन्होंने सुझाव दिया कि महाकुंभ से प्रेरणा लेते हुए “नदी उत्सव” की परंपरा को और विस्तार देना चाहिए ताकि नदियों कीस्वच्छता और संरक्षण का महत्व वर्तमान पीढ़ी को समझाया जा सके। महाकुंभ: एकता और समर्पण का प्रतीकप्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महाकुंभ से “एकता का अमृत” निकला है, जिसने देश को एक सूत्र में बांध दिया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने राष्ट्रीयचेतना के जागरण को प्रेरित किया है और आने वाली पीढ़ियों के लिए दिशा तय की है।

जॉर्ज सोरोस से जुड़े एनजीओ पर ईडी का शिकंजा, बेंगलुरु में छापेमारी

बेंगलुरु स्थित अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े एनजीओ “ओपन सोरोस फाउंडेशन” (OSF) और “एमनेस्टी इंटरनेशनल” के दफ्तरों पर प्रवर्तननिदेशालय (ईडी) ने छापा मारा है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन के संदर्भ में की गई है।सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) और एमनेस्टी इंटरनेशनल के पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों के घरों की भी तलाशी लीगई। फंडिंग में गड़बड़ी का आरोपईडी की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जॉर्ज सोरोस के ओपन सोरोस फाउंडेशन (OSF) को 2016 में गृह मंत्रालय द्वारा “पूर्व संदर्भ श्रेणी” में रखागया था। इसका उद्देश्य था कि यह फाउंडेशन भारत में बिना अनुमति के किसी एनजीओ को दान न कर सके।हालांकि, इस प्रतिबंध से बचने के लिए OSF ने भारत में अपनी सहायक कंपनियों के माध्यम से एफडीआई और कंसल्टेंसी फीस के नाम पर फंडजुटाया और इनका उपयोग एनजीओ की गतिविधियों को फंडिंग करने के लिए किया, जो कि FEMA का उल्लंघन है।एसईडीएफ और एफडीआई फंड की भी जांचईडी अन्य विदेशी निवेश (FDI) फंड के उपयोग की भी जांच कर रहा है। इसमें “सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड” (SEDF) द्वारा लाए गए फंड्सके अंतिम उपयोग पर भी नजर रखी जा रही है।इसके अलावा, “एस्पाडा इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड” नामक एक कंपनी पर भी तलाशी ली गई, जो मॉरीशस स्थित इकाई की पूर्ण स्वामित्व वालीसहायक कंपनी है और भारत में SEDF की निवेश सलाहकार/फंड मैनेजर है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की गतिविधियों पर भी सवालएमनेस्टी इंटरनेशनल पर पहले से ही अवैध विदेशी फंडिंग के आरोप हैं, जिसके कारण दिसंबर 2020 में भारत में इसकी सभी गतिविधियां बंद कर दीगई थीं। ईडी की मौजूदा जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या ओपन सोरोस फाउंडेशन से मिले फंड का उपयोग एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमनराइट्स वॉच द्वारा किया गया था। पीएम मोदी पर अक्सर तल्ख टिप्पणी करते हैं सोरोसजॉर्ज सोरोस अक्सर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं। उन्होंने पीएम मोदी को “अलोकतांत्रिक व्यक्ति” तक कह डाला था। इसके अलावा, उन्होंने सीएए और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को भी आड़े हाथों लिया था। कौन हैं जॉर्ज सोरोस? 92 वर्षीय जॉर्ज सोरोस दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक हैं। हंगरी में जन्मे सोरोस को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अपना देश छोड़ना पड़ा था। बादमें उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से फिलॉसफी की पढ़ाई की।सोरोस को “ब्लैक वेंसडे” के रूप में जाने जाने वाले 16 सितंबर 1992 को ब्रिटिश पाउंड की भारी गिरावट के लिए जिम्मेदार माना जाता है। उस दिनउन्होंने “बैंक ऑफ इंग्लैंड” के खिलाफ सट्टेबाजी करके अरबों डॉलर का मुनाफा कमाया था। OSF की प्रतिक्रिया का इंतजारअब तक ओपन सोरोस फाउंडेशन (OSF) की तरफ से इस छापेमारी पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। ईडी की कार्रवाई जारी है और अन्यसंबंधित संस्थाओं की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

नागपुर हिंसा: अफवाह के बाद भड़की आग, 11 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू, 50 हिरासत में

नागपुर में धार्मिक ग्रंथ जलाने की अफवाह के बाद सोमवार रात को हिंसा भड़क उठी। हिंसक घटनाओं के चलते 11 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दियागया है। पुलिस ने अब तक 50 लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। दंगाइयों का उत्पात: वाहनों में आगजनी और पथरावपुलिस अधिकारियों के अनुसार, चिटनिस पार्क और हंसपुरी सहित कई इलाकों में दंगाइयों ने जमकर उत्पात मचाया। कई वाहनों को आग के हवालेकर दिया गया और पुलिसकर्मियों व स्थानीय निवासियों के घरों पर पथराव किया गया। इस हिंसा में 34 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमेंतीन डीसीपी स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। एक डीसीपी पर कुल्हाड़ी से हमला हुआ। सजावट का सामान और वाहन जलाएरामनवमी शोभा यात्रा की तैयारियों में जुटे चंद्रकांत कावड़े ने बताया कि उपद्रवियों ने उनके सजावट के सभी सामान जला दिए और घर पर पथरावकिया। हंसपुरी क्षेत्र के एक अन्य निवासी ने बताया कि भीड़ ने रात करीब 10:30 बजे उनके घर के बाहर खड़ी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। कानून-व्यवस्था पर सख्ती: पुलिस बल तैनातहिंसा के बाद हालात को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। राज्य रिजर्व पुलिस बल (एसआरपीएफ) की पांच टुकड़ियों कोसंवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में बयान देते हुए कहा कि अफवाह के चलते स्थिति बिगड़ी औरहिंसा भड़क उठी। मुख्यमंत्री फडणवीस का बयान और विपक्ष की आलोचनामुख्यमंत्री फडणवीस ने “छावा” फिल्म को हिंसा के पीछे एक कारण बताया, जिससे लोगों का गुस्सा भड़क गया। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इसबयान की कड़ी आलोचना की और मुख्यमंत्री पर कानून-व्यवस्था में विफलता का आरोप लगाया। हालात पर काबू और शांति की अपीलमुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि पुलिस ने हालात पर तेजी से काबू पाया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से शांतिबनाए रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 19 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, 9 इनामी नक्सली शामिल

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में आज 19 नक्सलियों ने पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के सामनेआत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से 9 नक्सलियों पर कुल 28 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण का कारण: माओवादी विचारधारा से मोहभंगबीजापुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने माओवादी विचारधारा से मोहभंग होने केकारण यह कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ कैडरों द्वारा निर्दोष आदिवासियों के शोषण और प्रतिबंधित संगठन के भीतर बढ़ते मतभेदों नेनक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। सुरक्षा बलों के प्रभाव से प्रभावितनक्सलियों ने आत्मसमर्पण के पीछे सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने शिविरों की स्थापना और ‘निया नेल्लनार’ (आपका अच्छागांव) योजना से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इस योजना के तहत अंदरूनी इलाकों में बुनियादी सुविधाएं और विकास कार्योंको बढ़ावा दिया जा रहा है। इनामी नक्सलियों का विवरणआत्मसमर्पण करने वालों में देवा पदम (30) और उनकी पत्नी दूले कालमू (28) भी शामिल हैं, जो माओवादी बटालियन नंबर 1 में वरिष्ठ सदस्य थे।दोनों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा, एरिया कमेटी के सदस्य सुरेश कट्टम (21) पर 5 लाख रुपये का इनाम था। एक अन्यनक्सली पर 2 लाख रुपये का इनाम और पांच नक्सलियों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण में सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण भूमिकाआत्मसमर्पण में जिला रिजर्व गार्ड (DRG), बस्तर फाइटर्स, स्पेशल टास्क फोर्स (STF), सीआरपीएफ और इसकी विशेष इकाई कोबरा (कमांडोबटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन) ने अहम भूमिका निभाई। आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को 25,000 रुपये की सहायता राशि दी गईऔर सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें समर्थन प्रदान किया जाएगा।  आत्मसमर्पण के आंकड़ेइस साल अब तक बीजापुर जिले में कुल 84 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। वहीं, पिछले साल पूरे बस्तर रेंज में 792 नक्सलियों नेआत्मसमर्पण किया था।

हाथरस कांड: डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर पर यौन शोषण का आरोप, वीडियो वायरल, आरोपी फरार

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक डिग्री कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर और भूगोल के प्रोफेसर रजनीश कुमार पर कई छात्राओं के यौन शोषण के गंभीरआरोप लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अश्लील वीडियो ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। आरोपों के सामने आने के बाद पुलिस नेमामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। कैसे सामने आया मामला?करीब 10 महीने पहले पुलिस को एक गुमनाम चिट्ठी प्राप्त हुई थी, जिसमें पीड़िता का नाम नहीं था। यह शिकायत “लाचार बहन” के नाम से दर्ज कीगई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, लेकिन किसी पीड़िता के सामने न आने के कारण जांच को बंद कर दिया गया। कुछ दिन पहले राष्ट्रीय महिला आयोग को एक गुमनाम चिट्ठी और एक सीडी भेजी गई, जिसमें प्रोफेसर रजनीश कुमार के कई आपत्तिजनक वीडियोथे। वीडियो में आरोपी को छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें करते हुए देखा गया। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने यौन शोषण की धाराओं मेंएफआईआर दर्ज की। आरोपी फरार, पुलिस जुटी तलाश मेंएफआईआर दर्ज होने के बाद कॉलेज प्रशासन ने आरोपी को निलंबित कर दिया और कॉलेज प्रबंधन ने आपात बैठक बुलाई। आरोपी प्रोफेसररजनीश कुमार सस्पेंड होने के तुरंत बाद फरार हो गया। उसकी तलाश के लिए पुलिस ने तीन टीमें गठित की हैंपुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रोफेसर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए छात्राओं को परीक्षा में पास कराने, सरकारी नौकरी दिलाने औरप्रतियोगी परीक्षाओं में सफल बनाने का झांसा देकर यौन शोषण किया। कैसे करता था ब्लैकमेल?आरोपी प्रोफेसर छात्राओं को अच्छे नंबर दिलाने और नौकरी में मदद का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। वह छात्राओं को अपने ऑफिस याबंगले पर बुलाकर अश्लील हरकतें करता और गुप्त रूप से वीडियो रिकॉर्ड करता। बाद में इन वीडियो का इस्तेमाल करके छात्राओं को चुप रहने केलिए ब्लैकमेल करता था।रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घिनौना कृत्य पिछले 20 वर्षों से जारी था। पहले भी आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन वह निर्दोषसाबित हुआ था जिला प्रशासन ने बनाई जांच समितिघटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जिसमें एसडीएम, डीएसपी, तहसीलदार और बीएसए कोशामिल किया गया है। समिति को सात दिन में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। सोशल मीडिया पर लोगों का आक्रोशवीडियो वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। सोशल मीडिया पर लोग आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। एक यूजर नेलिखा, “20 साल से ऐसी घटनाएं हो रही थीं और प्रशासन चुप बैठा था। यह सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। दोषियों को सख्त सजा मिलनीचाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।”एक अन्य यूजर ने कहा, “ऐसे व्यक्ति को शिक्षक बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। प्रशासन को जनता के सामने आकर यह बताना चाहिए कि अबतक क्या कार्रवाई की गई है।”

औरंगजेब की कब्र पर सियासत तेज: मुख्यमंत्री फडणवीस ने दी चेतावनी, शिवाजी महाराज के महिमामंडन का किया आह्वान

औरंगजेब की कब्र को लेकर देश में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल जैसे हिंदू संगठनों ने महाराष्ट्र केसंभाजीनगर में स्थित मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र को तोड़ने की चेतावनी दी है। इस बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी बयानसामने आया है। उन्होंने कहा कि सरकार को छत्रपति संभाजीनगर जिले में औरंगजेब की कब्र की सुरक्षा करनी पड़ रही है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री फडणवीस का बयानमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि औरंगजेब का इतिहास उत्पीड़न से भरा हुआ है, और यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार को उसकी कब्र कीसुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर कोई औरंगजेब की विरासत का महिमामंडन करने का प्रयास करेगा, तो वहसफल नहीं होगा।फडणवीस ने छत्रपति शिवाजी महाराज का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयासों के कारण ही आज हम स्वतंत्र रूप से अपने देवी-देवताओं कीपूजा कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने स्वराज्य, धर्म और देश की रक्षा के लिए संघर्ष किया। शिवाजी महाराज के महिमामंडन का आह्वानमुख्यमंत्री ने कहा कि महिमामंडन करना है तो छत्रपति शिवाजी महाराज का किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि औरंगजेब के क्रूर विचारोंका समर्थन या महिमामंडन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।इससे पहले, भारतीय जनता पार्टी के सतारा से सांसद उदयनराजे भोसले, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज भी हैं, ने संभाजीनगर में मौजूदऔरंगजेब की कब्र को हटाने की वकालत की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फडणवीस ने कहा कि ऐसा करना कानून के दायरे में होना चाहिए, क्योंकि यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण में है।औरंगजेब का इतिहासऔरंगजेब मुगल साम्राज्य का छठा शासक था, जिसने 1658 से 1707 तक शासन किया। वह शाहजहां का पुत्र था और अपने शासनकाल में मुगलसाम्राज्य का विस्तार किया। औरंगजेब ने कट्टर इस्लामी नीतियों का पालन किया और गैर-मुसलमानों पर जजिया कर को दोबारा लागू किया। उसनेकुछ सांस्कृतिक प्रथाओं पर भी प्रतिबंध लगाया, जिससे उसका शासन विवादास्पद रहा।

उत्तरी कश्मीर में मुठभेड़: एक आतंकी ढेर, सुरक्षा बलों का अभियान जारी

उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के नियंत्रण रेखा (LoC) से सटे खुरमोरा राजवार इलाके में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिलने पर सुरक्षा बलोंने तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच संक्षिप्त मुठभेड़ हुई। एक आतंकी ढेर, कई फरारमुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया और उसके पास से एक असॉल्ट राइफल बरामद हुई है। हालांकि, कुछ आतंकी घेराबंदी तोड़कर भागने में कामयाबहो गए। फरार आतंकियों को पकड़ने के लिए सुरक्षा बलों ने अपना अभियान जारी रखा है। मुठभेड़ में एक सुरक्षा कर्मी के घायल होने की भी सूचना है, जिसका इलाज किया जा रहा है गंडबल में हथियारों के साथ दो संदिग्ध गिरफ्तारसंयुक्त अभियान में बरामद हुए हथियारबीते दिनों गंडबल-हाजिन रोड पर एक विशेष खुफिया इनपुट के आधार पर संयुक्त अभियान चलाया गया, जिसमें दो संदिग्धों को गिरफ्तार कियागया। सुरक्षा बलों ने उनके कब्जे से एक पिस्तौल, एक पिस्तौल मैगजीन, दो हथगोले, एक एके राइफल मैगजीन और अन्य गोला-बारूद बरामदकिए। LoC पर गोलीबारी में जवान घायलनौशेरा सेक्टर में सेना का जवान घायलबुधवार को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर गोलीबारी की घटना में सेना का एक जवान घायल हो गया। नौशेरा सेक्टर केकलसियां इलाके में अग्रिम चौकी पर तैनात जवान को गोली लगी, जिसके बाद उसे प्राथमिक उपचार देने के बाद उधमपुर के सैन्य अस्पताल में भर्तीकराया गया। सांबा सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश नाकामबीएसएफ ने विफल किया घुसपैठ का प्रयाससांबा सेक्टर में भारत-पाकिस्तान सीमा पर बीएसएफ के जवानों ने एक घुसपैठ के प्रयास को विफल कर दिया। खोरा पोस्ट पर रात करीब एक बजेसंदिग्ध गतिविधि देखे जाने पर जवानों ने कुछ राउंड फायर किए, जिससे घुसपैठ का प्रयास नाकाम हो गया। सुरक्षा बल सतर्क, अभियान जारीकश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। फरार आतंकियों की तलाश जारी है, जबकिसीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए चौकसी बढ़ा दी गई है।