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पुष्कर सिंह धामी बने उत्तराखंड के सबसे लंबे कार्यकाल वाले सीएम, पूरे किए 4 साल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज उत्तराखंड में भाजपा के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. सीएम की कुर्सी पर उन्हें लगातार चारसाल हो जाएंगे ये उनके दो कार्यकालों के चार साल हैं जिनमें उन्होंने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करके देश भर में विशेष पहचान बनाई औरखूब सुर्खियां बटोरीं. चार साल पहले जुलाई में पुष्कर सिंह धामी को राज्य की बागडोर सौंपी गई थी. तब विधानसभा चुनाव में सिर्फ छह-सात महीनेशेष थे नए युवा चेहरे के कंधों पर भाजपा को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी थी. सत्तारूढ़ दल की वापसी न कर पाने का मिथक बन गया था. मगर धामीने मिथक तोड़ दिया चुनाव जीतकर भाजपा ने इतिहास रच दिया. धामी के हाथों में ही कमान सौंपकर भाजपा हाईकमान ने भी नई इबारत लिख डाली. एक्शन में कठोरतातब से लेकर अब तक केंद्रीय नेतृत्व के लिए धामी उत्तराखंड में भाजपा के सबसे विश्वसनीय चेहरा साबित हुए हैं. चाहे यूसीसी लागू करने की बात रहीहो या फिर नकल विरोधी, धर्मांतरण विरोधी जैसे कानूनों की, धामी ने उन्हें अमल में लाने में देरी नहीं की. धामी के व्यवहार में सौम्यता और एक्शन मेंकठोरता हमेशा दिखी. उनके कामकाज को मान्यता देने के लिए पीएम मोदी कई बार उत्तराखंड आए। पीठ थपथपाई और साफ संदेश दिया कि वहबगैर किसी चिंता के इसी गति से काम करते रहें। इस बीच सांस रोकने वाला सिलक्यारा टनल प्रकरण रहा हो या फिर रोमांच की पराकाष्ठा वालेराष्ट्रीय खेल, अपनी क्षमताओं के इम्तिहान में धामी पूरे नंबर लाकर पास हुए. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चार साल के कार्यकाल में समान नागरिकसंहिता, नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण रोकथाम कानून के संबंध में लिए गए फैसले राष्ट्रीय फलक पर छाए और देश के लिए मॉडल बने. नकल रोधी कानून1- नकल माफिया का कुचक्र तोड़ने के लिए फरवरी 2023 में उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा में नकल रोकने के लिए( भर्ती में अनुचित साधनों कीरोकथाम व निवारण के उपाय) कानून लागू किया। यह देश के लिए एक मॉडल नकल रोधी कानून बना।2. यूसीसी हुआ लागू: 27 जनवरी 2025 से उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना। इसके बाद कुछ अन्य भाजपाशासित राज्यों ने भी यूसीसी के लिए पहल की। यूसीसी के तहत प्रदेश में दो लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।3. दंगाइयों से वसूली के लिए बनाया कानून: दंगा, हड़ताल, विरोध प्रदर्शन में सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले उपद्रवियों सेबाजार भाव पर नुकसान की भरपाई के लिए 2024 से उत्तराखंड लोक एवं निजी संपत्ति क्षति वसूली कानून लागू किया।4. गैंगस्टर एक्ट को बनाया सख्त: गैंगस्टर एक्ट में संशोधन करते हुए गो वध, मानव तस्करी, बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी, नकल माफिया, मनी लॉड्रिंगजैसे अपराधों को इसके दायरे में लाया गया। दोष सिद्ध होने पर 10 साल की गैर जमानती साज और 50 हजार रुपये तक जुर्माना प्रावधान कियागया।5. राज्य आंदोलनकारियों और महिला को आरक्षण

रेनॉवेशन या शाही ठाठ? दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता के बंगले पर 60 लाख खर्च का टेंडर, “विपक्ष ने साधा निशाना”

Dellhi News: दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बंगले के लिए एक टेंडर जारी किया है. घर के निर्माण केलिए जारी किए गए इस टेंडर की खास बात यह है कि इसे सीएम के आधिकारिक आवास के निर्माण के लिए नहीं बल्कि रेनोवेशन के लिए जारीकिया गया है. पीडब्ल्यूडी ने इसके लिए 60 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है. इसे लेकर दिल्ली में मुख्य विपक्षी दल- आम आदमी पार्टी (आप) केसाथ-साथ कांग्रेस ने भी सीएम रेखा गुप्ता को घेरा है। आप ने रेखा गुप्ता के बंगले को माया महल बुलाना भी शुरू कर दिया है. बताया गया है कि रेखागुप्ता को दो बंगले आवंटित हुए थे। इनमें से पीडब्ल्यूडी ने बंगला नंबर-1 के लिए रेनोवेशन का टेंडर जारी किया है. यहां मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुदरहेंगी. वहीं, उनका दूसरा बंगला, बंगला नंबर-2 फिलहाल कैंप ऑफिस के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. बंगला नंबर-1 को लेकर खास बात यह हैकि पहले यहां दिल्ली के उपराज्यपाल का दफ्तर था. केबिन में दिया गया था बांटइसके चलते बंगले में कमरों को अलग-अलग केबिन में बांट दिया गया था. एक-एक कमरे को दो या तीन वर्गों में किया गया था ताकि यहां सरकारीकर्मियों के लिए क्यूबिकल्स बनाए जा सकें. ऐसे में जब रेखा गुप्ता ने जून में इस बंगले को अपना निवास बनाए जाने के लिए चुना था. तब अनुमानलगाया जा रहा था कि इसका रेनोवेशन नए सिरे से कराया जाएगागौरतलब है कि रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक अपने परिवार के साथअपने शालीमार बाग स्थित निजी निवास पर रह रही हैं. एक मीडिया ग्रुप ने कुछ समय पहले ही जानकारी दी थी कि रेखा गुप्ता पहले लुटियंस दिल्लीमें अपने रहने के लिए घर ढूंढ रही थीं. लेकिन पीडब्ल्यूडी के पास केंद्र सरकार के प्रबंधन के अंतर्गत आने वाले बंगलों से बदलने के लिए कोई ढंग काबंगला नहीं था. टेंडर के मुताबिक 60 लाख रुपये का जो टेंडर जारी हुआ है उसमें खर्च किसी निर्माण कार्य में नहीं होना है. बल्कि सिर्फ इलेक्ट्रिकलऔर इंटीरियर फिटिंग से जुड़े काम कराए जाने हैं. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि राजनिवास पर सीएम रेखा गुप्ता को जो बंगला मिला है, वह टाइप-7 काबंगला है। इसमें चार बेडरूम, ड्रॉइंग रूम, बिजनेस हॉल, एक कॉमन हॉल, आगंतुकों के लिए एक विजिटर हॉल, हाउस हेल्प के लिए कमरा, सभी मेंबाथरूम, एक बड़ा लॉन, किचन और घर के पीछे एक बैक यार्ड शामिल है. टेंडर के मुताबिक, जिस बंगले का रेनोवेशन होना है. वहां पहले चरण काटेंडर जारी हुआ है. 9.3 लाख रुपए गए है दर्शाएयहां 2 टन वाले 14 एसी लगाए जाने हैं. जिनका खर्च 7.7 लाख रुपये तय किया गया है। इसके अलावा पांच स्मार्ट टीवी लगाए जाने हैं, जिनकेलिए 9.3 लाख रुपये दर्शाए गए हैं. इसके अलावा 6.03 लाख की लाइटें लगाई जानी हैं. बंगले में सुरक्षा के लिए 14 सीसीटीवी भी लगाए जाने हैंजिनके लिए 5.73 लाख रुपये अलग से तय किए गए हैं. दूसरी तरफ बंगले में छत पर लगने वाले 23 प्रीमियम पंखे (सीलिंग फैन) लगेंगे. इन परकरीब 1.8 लाख रुपये का खर्च तय किया गया है इसके अलावा 16 दीवार वाले फैन लगेंगे. बंगले में बिजली की निर्बाध व्यवस्था के लिए दो लाखरुपये से यूपीएस सिस्टम लगाना भी तय किया गया है. इतना ही नहीं बंगले में किचन के लिए टेंडर में अलग से कुछ सुविधाएं लगाने का जिक्र है. इनमें85 हजार रुपये का ओटीजी (ओवन-टोस्टर-ग्रिल), 60 हजार रुपये का डिश वॉशर, 63 हजार रुपये का गैस स्टोव, 32 हजार रुपये के माइक्रोवेव और77 हजार रुपये की वॉशिंग मशीन का खर्च शामिल है.

अमित शाह का महाराष्ट्र दौरा NDA में पेशवा बाजीराव की प्रतिमा का अनावरण, “चुनावी बिगुल तेज”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को महाराष्ट्र दौरे पर हैं वे गुरुवार रात को पुणे पहुंचे थे. यहां शाह चार कार्यक्रमों में शामिल होंगे. वह पुणे के पासखड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में ‘श्रीमंत थोरले बाजीराव पेशवा’ की प्रतिमा का अनावरण करेंगे. 13.5 फुट ऊंची, 4,000 किलोग्राम वजन की कांस्य प्रतिमा श्रीमंत थोरले बाजीराव पेशवा प्रतिष्ठान की ओर से एनडीए को दान की गई है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोलसमेत अन्य लोग इस समारोह में शामिल होंगे. केंद्रीय गृह मंत्री शाह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के प्रशिक्षुओं से बातचीत करेंगे. बाद में वह कोंढवा में जयराज खेल एवं सम्मेलन केंद्र का उद्घाटन करेंगे वह खादी मशीन चौक स्थित बालासाहेब देवड़ा अस्पताल का दौरा भी करेंगे. इसके बाद वडाचीवाड़ी में हेल्थ सिटी की आधारशिला रखेंगे वे बाद में अपने अगले गंतव्य के लिए रवाना होंगे. अमित शाह के दौरे के मद्देनजर जिलाप्रशासन ने यातायात डायवर्जन के संबंध में निर्देश जारी किए हैं. प्रतिबंध लगाया है जराकालेपदल, कोंढवा और भारती विद्यापीठ यातायात विभाग के तहत सभी माल परिवहन वाहन, डंपर, मिक्सर, ट्रक, भारी, बड़े और धीमी गति से चलनेवाले वाहनों को 4 जुलाई को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक मंतरवाड़ी फाटा से खादी मशीन चौक से कटराज चौक के बीच सड़क पर चलने परप्रतिबंध लगाया जा रहा है.यह अमित शाह का महाराष्ट्र का पांचवां दौरा है जो राज्य में आगामी स्थानीय और नगर निकाय चुनावों से पहले हो रहा है।राज्य में इस साल अक्तूबर-नवंबर में चुनाव होने की उम्मीद है. 1 जुलाई को महाराष्ट्र भाजपा के नए प्रमुख रवींद्र चव्हाण के चुनाव के बाद यह उनकापहला दौरा है. शाह ने इससे पहले पार्टी कार्यकर्ताओं से स्थानीय और नगर निकाय चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति की जीत की राह जारीरखने के लिए आगामी चुनावों के लिए कमर कसने को कहा था. उन्होंने 22 फरवरी को पुणे का दौरा किया था वे 12 अप्रैल को छत्रपति शिवाजीमहाराज को श्रद्धांजलि देने के लिए रायगढ़ किले गए थे. 26 और 27 मई को उन्होंने नागपुर, नांदेड़ और मुंबई में कई कार्यक्रमों में भाग लिया था. इसके अलावा 20 जून को उन्होंने मुंबई में महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर के कार्यालय का उद्घाटन किया था.

तमिलनाडु में हिरासत में मौत पर बवाल, मंदिर गार्ड अजित कुमार की मौत ने खड़े किए “कानून-व्यवस्था पर सवाल” जानें क्या है पूरा मामला

तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में पुलिस हिरासत में मंदिर के सुरक्षा गार्ड अजित कुमार की मौत के मामले में सियासत तेज हो गई है. विपक्षी दलभाजपा और एआईएडीएमके ने इस मुद्दे पर सीएम एमके स्टालिन और डीएमके सरकार को घेरा है. तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंथिरन औरएआईएडीएमके के प्रवक्ता कोवई सत्यन ने पुलिस की हरकत पर सवाल उठाए हैं. तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंथिरन ने कहा कि राज्य मेंकानून-व्यवस्था ठीक नहीं है. पुलिस मुख्यमंत्री के नियंत्रण में नहीं है इसे सचिवालय में बैठे किसी व्यक्ति द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है. सचिवालय मेंबैठे किसी व्यक्ति के आदेश पर अजित कुमार का अपहरण किया गया. उन पर बेरहमी से हमला किया गया और हत्या कर दी गई.उन्होंने कहा कि जहांतक अजित कुमार का सवाल है बिना किसी एफआईआर और जांच के पुलिस ने उनका अपहरण कर लिया और उनकी हत्या कर दी. बाल शोषण की हुई है कुछ घटनाएंराज्य में यह सामान्य बात हो गई है उन्होंने कहा कि नुंगमबक्कम पुलिस स्टेशन में भी बाल यौन शोषण की कुछ घटनाएं हुई हैं और उन्होंने कुछ पुलिसअधिकारियों का नाम लिया है जिन पुलिस वालों को सुरक्षा देनी है वे अपराध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सिर्फ माफी मांग रहे हैं.एआईएडीएमके के राष्ट्रीयप्रवक्ता कोवई सत्यन ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि यह हिरासत में हुई हत्या है हिरासत में मौत नहीं उसके शरीर पर सिगरेट से जलनेके निशान थे. उसके शरीर का एक भी अंग ऐसा नहीं था जो इस क्रूरता, अमानवीय और बर्बर कृत्य से अछूता रहा हो. पुलिस बल को इस तरह कीअत्यधिक यातना और शक्ति का उपयोग करने की अनुमति किसने दी? उन्होंने कहा कि हम ऐसे देश में रहते हैं जहां एक आतंकवादी को जेल मेंबिरयानी खिलाई जाती है जबकि तमिलनाडु पुलिस एक आम आदमी पर कानून अपने हाथ में लेती है. जबकि उसके खिलाफ शिकायत अभी भीसाबित नहीं हुई है। शिकायत की विश्वसनीयता अभी बड़े सवालों के घेरे में है. पैसे ठगने का रहा है इतिहासशिकायतकर्ता का पैसे ठगने का इतिहास रहा है कुछ समय पहले उसने डिप्टी सीएम के पीए का नाम लिया था जो अब सामने आया है. उसके पिछलेरिकॉर्ड पर क्लीन चिट नहीं है. सत्यन ने कहा कि अजित कुमार कोई सीरियल अपराधी नहीं था और अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला था हमेंदेखना होगा कि क्या हुआ है? क्या सीएम स्टालिन में उन्हें और हिरासत में यातना और मौत के शिकार हुए 24 लोगों को न्याय दिलाने का साहसहोगा? मदप्पुरम भत्रकाली अम्मन मंदिर में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत अजित कुमार को 27 जून को पुलिस ने 9.5 सोने के सिक्कों की चोरी केमामले में हिरासत में लिया था. कथित तौर पर उन्हें छह सदस्यीय विशेष टीम द्वारा हिरासत में लिया गया और हिरासत में बुरी तरह से प्रताड़ित कियागया. जिसके चलते उनकी मृत्यु हो गई. इस मामले मे तमिलनाडु में लोगों के बीच बड़ा आक्रोश पैदा कर दिया. मौत की खबर सामने आते ही स्थानीयलोगों और अजित कुमार के परिवार ने न्याय की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए.

बिना गारंटी अमेरिका से कोई वार्ता नहीं, इस्राइल-अमेरिका पर लगाए अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन के आरोप

परमाणु संवर्धन के मुद्दे पर अमेरिका और इस्राइल से टकराव और फिर संघर्ष विराम के बाद भले ही मध्य एशिया में कुछ तनाव कम हुआ हो लेकिनईरान साफ कर दिया है कि वह बिना किसी विश्वसनीय गारंटी के किसी से भी कोई वार्ता नही करेगा. ईरान ने कहा है कि अमेरिका के साथ कोई भीवार्ता प्रक्रिया तब तक बेकार है जब तक कि वाशिंगटन इस्राइल और अमेरिका द्वारा भविष्य में आक्रामक कृत्यों को रोकने के लिए गारंटी नहीं देता है. भारत में ईरान के राजदूत इराज इलाही ने अमेरिका के साथ फिर से वार्ता शुरू करने के लिए तेहरान की शर्तों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि जहां तकअमेरिका के साथ वार्ता का सवाल है, ईरान पर अवैध हमले करने में उनके कूटनीतिक विश्वासघात और जायोनी शासन के साथ मिलीभगत को देखतेहुए किसी भी वार्ता का तब तक कोई अर्थ नहीं है. विश्वसनीय नहीं देते गारंटीजब तक कि वे भविष्य के लिए अमेरिका और इस्राइल द्वारा इस तरह के आक्रामक कृत्यों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए विश्वसनीय गारंटी नहीं देतेहैं. इलाही ने कहा कि इस्राइल के पास परमाणु हथियार हैं और उसने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं उसने ईरान कोपरमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के बहाने हमारे देश पर हमला किया। उन्होंने आगे अमेरिका पर भी हमला किया. भारत में ईरानी राजदूत ने कहाकि अमेरिकी हमलों का कोई कानूनी औचित्य नहीं था. उन्होंने इसे आक्रामकता का अपराध बताया. इसके अलावा, उन्होंने यह भी दावा किया किऑपरेशन में साइबर और आतंकवादी तत्व शामिल थे. इलाही ने कहा कि इस्राइली और अमेरिकी हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2, पैराग्राफ 4, परमाणु अप्रसार व्यवस्था, IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 का घोर उल्लंघन है. राजदूत नेअमेरिका और इस्राइल पर कूटनीति को कमजोर करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की मिलीभगत के बाद इस्राइल ने हमले ठीकतब किए जब ईरान-अमेरिका के बीच छठे दौर की वार्ता को सिर्फ दो दिन बचे थे. अमेरिका नहीं है बिल्कुल गंभीरयह कूटनीति के साथ विश्वासघात था साथ ही इन हमलों ने दिखा दिया कि वार्ता के लिए अमेरिका बिल्कुल भी गंभीर नहीं है.इस दौरान इस्राइल केआरोपों को लेकर कि इस्राइल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है पर कहा कि यह दावा पूरी तरह से निराधार है. अंतरराष्ट्रीय कानून में इसका कोईआधार नहीं है. ईरान ने अपने इतिहास में कभी किसी देश पर हमला नहीं किया है. भले ही हम इस्राइल को मान्यता नहीं देते हैं और इसे एक कब्जाकरने वाले शासन के रूप में देखते हैं. परमाणु मुद्दे पर ईरानी राजदूत ने कहा कि ईरान का कार्यक्रम शांतिपूर्ण बना हुआ है. आईएईए की रिपोर्ट केअनुसार, ईरान की परमाणु गतिविधियां शस्त्रीकरण का उद्देश्य नहीं दिखाती हैं. ऐसे में शांतिपूर्ण सुविधाओं पर हमला करने के लिए इजरायल औरअमेरिका द्वारा दिया गया औचित्य अवैध और अतार्किक दोनों है.

बर्मिंघम टेस्ट में जडेजा ने तोड़ा BCCI प्रोटोकॉल, लेकिन मैदान पर निभाई जिम्मेदारी “गिल संग ठोकी 203 रन की साझेदारी”

भारतीय टीम के अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के दौरान भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) के नए दिशा-निर्देश का उल्लंघन किया. ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद बीसीसीआई ने खिलाड़ियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे जिसकेअनुसार कोई भी खिलाड़ी टीम बस के अलावा अपने से स्टेडियम से ना तो आ सकता है और ना ही जा सकता है. दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन जडेजा ने इसका उल्लंघन किया क्योंकि वह टीम के अन्य सदस्यों से पहले ही मैदान पर पहुंच गए थे. ईएसपीएनक्रिकइंफोकी रिपोर्ट के अनुसार इस बात की संभावना नहीं है कि इसे लेकर जडेजा के खिलाफ कार्रवाई होगी क्योंकि वह इसलिए जल्दी आए थे जिससे पारीशुरू होने से पहले अधिक बल्लेबाजी अभ्यास कर सकें. मजबूत साझेदारी की है जरुरतजडेजा को पता था कि लीड्स टेस्ट में अच्छी स्थिति में होने के बावजूद दो बार भारतीय पारी लड़खड़ा गई थी जिस कारण अंत में टीम को इसकाखामियाजा भुगतना पड़ा था. जडेजा मैच के पहले दिन उस वक्त बल्लेबाजी के लिए उतरे थे जब भारत ने 211 रन पर पांच विकेट गंवा दिए थे।भारतीय टीम को उस वक्त एक मजबूत साझेदारी की जरूरत थी. भारत ने पहले दिन का खेल समाप्त होने तक पांच विकेट पर 310 रन बनाए थे. जडेजा ने अपनी जिम्मेदारी संभालते हुए कप्तान शुभमन गिल के साथ मिलकर 99 रनों की साझेदारी कर ली थी जिसे दूसरे दिन आगे बढ़ाया. जडेजाऔर गिल ने दूसरे दिन पहले सत्र में शानदार बल्लेबाजी की. जडेजा ने इस दौरान अपना अर्धशतक भी पूरा किया. भारत को मजबूत स्कोर तक है पहुंचायागिल और रवींद्र जडेजा ने छठे विकेट के लिए 203 रन जोड़कर भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया. जडेजा शतक पूरा नहीं कर सके और 89 रनबनाकर आउट हुए. जडेजा और गिल के बीच हुई यह 200+ रनों की साझेदारी इंग्लैंड के खिलाफ किसी भारतीय जोड़ी के बीच छठे या उससे नीचे केविकेट के लिए तीसरी बड़ी साझेदारी है। इससे पहले ऋषभ पंत और रवींद्र जडेजा के बीच 2022 में इसी मैदान (एजबेस्टन) पर 222 रनों कीसाझेदारी हुई थी. मैच की बात करें तो भारत की पहली पारी दूसरे दिन 587 रन पर ऑलआउट हुई थी और भारत ने अच्छी शुरुआत करते हुए इंग्लैंडके तीन विकेट गिरा दिए. हालांकि, हैरी ब्रूक और जो रूट ने चौथे विकेट के लिए 52 रनों की साझेदारी कर इंग्लैंड को संभाला. दूसरे दिन का खेलसमाप्त होने तक इंग्लैंड ने पहली पारी में तीन विकेट पर 77 रन बनाए हैं और वह अभी भारत से 510 रन पीछे चल रहा है. स्टंप्स के समय ब्रूक 30 और रूट 18 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे.

राजेन्द्र पाल गौतम का सवाल- जातिगत अत्याचार पर मौन क्यों है व्यवस्था? न्याय, आयोग और सरकार पर उठे गंभीर प्रश्न

देश में अनुसूचित जातियों, जनजातियों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर राजेन्द्र पाल गौतम ने एक बार फिर ज़ोरदारआवाज़ उठाई है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी देश के दलितों को न तो सम्मान मिल पाया है, न ही न्याय। राजेन्द्र पाल गौतम ने कहाकि संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का गठन हुआ था ताकि दलितों की शिकायतों पर गंभीरता से सुनवाई हो सके। लेकिनसच्चाई यह है कि आयोग में अब तक 6,02,177 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें से केवल 5,843 मामलों में सुनवाई हुई है। अनुसूचित जनजातियों की1,783 शिकायतों पर ही कार्यवाही की गई है। जब सुनवाई ही नहीं होनी है, तो आयोग क्यों बना रखा है? राजेन्द्र पाल गौतम की प्रमुख मांगेंसर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ऐसे जजों पर कार्रवाई करें जो जातिवादी सोच के आधार पर फैसले देते हैं।राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को सक्रिय और प्रभावी बनाया जाए।राज्य सरकारें जातिगत उत्पीड़न के मामलों को प्राथमिकता पर लें और सख्त कार्यवाही करें।ऐसे उदाहरण बने कि अपराधी डरें और समाज में बराबरी की भावना स्थापित हो।जातिगत अत्याचार की शर्मनाक घटनाएं – राजेन्द्र पाल गौतम ने देशभर से सामने आई भीषण घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवलआंकड़े नहीं हैं, ये समाज की क्रूर सच्चाई हैं:मध्य प्रदेश (छिंदवाड़ा) में आदिवासी युवक को पेशाब पिलाया गया।ओडिशा में एक पिता को गंजा कर घास खिलाई गई, जब वह अपनी बेटी की शादी के लिए गाय ला रहा था।अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) में मंदिर के पास खड़े होने पर दलित युवक को पीटा गया।अंबेडकर जयंती पर दलित युवकों को करंट देकर मारा गया।उन्होंने कहा कि 26% ऐसे मामले अकेले उत्तर प्रदेश से सामने आए हैं, जो स्वयं को सबसे बेहतर कानून व्यवस्था वाला राज्य बताता है।जब न्यायपालिका ही भेदभाव करे –राजेन्द्र पाल गौतम ने वर्ष 2021 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस फैसले को याद दिलाया जिसमें कहा गया था कि उच्च जाति का व्यक्तिअनुसूचित जाति की महिला के साथ बलात्कार नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि यह मानसिकता राजस्थान के भूरी देवी मामले (1992) में भी सामने आई थी। ओडिशा में अपमानजनक सज़ा उन्होंने हाल ही में ओडिशा में उमेश्वर नायक और सीजी माली के साथ हुए व्यवहार की निंदा की, जिन्हें अवैध खनन के विरोध में प्रदर्शन करने परगिरफ़्तार कर लिया गया और अदालत ने उन्हें थाने में सफाई का कार्य करने की सज़ा सुनाई।राजेन्द्र पाल गौतम ने इस पर तीखा सवाल उठाया — क्या दलितों के लिए सिर्फ झाड़ू और सफाई का काम ही बचा है?सरकारी आंकड़े भी बोल रहे हैं सच्चाई – उन्होंने संसद में प्रस्तुत कुछ आंकड़ों को उजागर कियाउत्तर प्रदेश में 11,444 मामले → 13,144राजस्थान में 4,238 → 7,224मध्य प्रदेश में 5,892 → 7,214हरियाणा में 762 → 1,628उड़ीसा में 1,669 → 2,327महाराष्ट्र में 1,689 → 2,503उत्तराखंड में 96 → 130इनमें से अधिकांश राज्य भारतीय जनता पार्टी के शासन में हैं, जिससे राजेन्द्र पाल गौतम ने भाजपा पर सीधे सवाल खड़े किए। बदलाव ज़रूरी है. राजेन्द्र पाल गौतम ने कहा कि अब यह केवल सरकारों, आयोगों और अदालतों की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे देश की नैतिक ज़िम्मेदारी है कि जातिगतअत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाई जाए। उन्होंने कहा कि अगर न्याय व्यवस्था जातिवादी मानसिकता से ग्रस्त रहेगी, तो संविधान केवल किताबोंतक सीमित रह जाएगा।

दिल्ली के 61 लाख परिवारों पर नई गाड़ी खरीदने का दबाव -बीजेपी सरकार के आदेश से बढ़ी परेशानी मनीष सिसोदिया

देश की राजधानी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बने अभी केवल पाँच महीने ही हुए हैं, लेकिन इतने कम समय में ही करोड़ों लोगों काजीवन मुश्किलों से भर दिया गया है। जिन परिवारों ने बरसों की मेहनत से अपनी छोटी सी गाड़ी खरीदी थी, आज उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है।1 जुलाई से बीजेपी सरकार द्वारा एक ऐसा आदेश लागू कर दिया गया है, जिसने सीधे तौर पर दिल्ली के 61 लाख परिवारों की ज़िंदगी में उथल-पुथल मचा दी है। इस आदेश के तहत पुरानी गाड़ियों को सड़कों पर चलने से रोका जा रहा है। वजह बताई जा रही है प्रदूषण, लेकिन असली मंशा हैआम आदमी को मजबूर करना – नई गाड़ी खरीदने पर। किस पर टूटा है कहर?आम वेतन पाने वाले लोग – जो सालों तक छोटी-छोटी बचत करके या कर्ज़ लेकर एक गाड़ी खरीदते हैं।बुजुर्ग नागरिक – जिनके पास पुरानी गाड़ी होती है जो महीने में एक-दो बार ही चलती है।छोटे व्यापारी, दिहाड़ी मजदूर, नौकरीपेशा वर्ग – जो पुरानी मोटरसाइकिल या सेकंड हैंड गाड़ियों से अपना जीवन चलाते हैं।आज वही गाड़ियाँ सरकार की नज़र में कबाड़ हो गई हैं, चाहे वे अच्छी हालत में हों या अभी भी चलने लायक हों।जबरन बनाई गई मजबूरी – इस नए आदेश का मतलब है कि अब दिल्ली के 18 लाख परिवारों को नई कार खरीदनी होगी41 लाख लोगों को नई मोटरसाइकिल या स्कूटर लेना पड़ेगा क्या एक साधारण वेतन पाने वाला व्यक्ति इतनी महंगी नई गाड़ी खरीद सकता है? क्या हर किसी के पास इतनी बचत है? क्या हर कोई नया कर्ज़ लेसकता है? यह सिर्फ नीतिगत भूल नहीं है, यह आम आदमी की मेहनत और आत्मसम्मान पर सीधा हमला है। कौन है इस फैसले से खुश? वाहन बनाने वाली कंपनियाँ – जिनकी बिक्री अचानक बढ़ेगीगाड़ी स्क्रैप करने वाले उद्योग – जिनके पास अब लाखों गाड़ियाँ काटने का काम आएगानिजी टैक्सी कंपनियाँ – क्योंकि लोग अपनी गाड़ी न चला पाने के कारण इनके भरोसे होंगेदिल्ली की सड़कों पर चलने वाले लाखों वाहन अब बंद हो जाएंगे। सरकार ने बिना कोई विकल्प दिए, जनता पर यह नियम थोप दिया है। कोईसहायता योजना नहीं, कोई छूट नहीं, सिर्फ सीधा दबाव – नई गाड़ी खरीदो या घर बैठो। और ज़ुल्म – 1 जुलाई से पिक ऑवर में दोगुना किराया वसूली की छूट इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से यह भी आदेश दिया है कि अबव्यस्त समय में दो गुना तक रकम वसूली जा सकती है। मतलब अगर किसी को ज़रूरत हो तो वह सस्ती सवारी की उम्मीद भी न करे।हमारी माँग- भारतीय जनता पार्टी की सरकार से हमारी हाथ जोड़कर अपील हैआम आदमी को तंग करना बंद करेंपुरानी गाड़ियों पर लगी यह पाबंदी वापस लेंजनता को गाड़ी चलाने और जीवन यापन करने का अधिकार देंपेट्रोल पंपों पर गाड़ियों को तेल न देने वाला आदेश तत्काल रद्द करेंबुजुर्गों, वेतनभोगियों, निम्न वर्ग के लोगों को राहत दी जाएजनता ने चुना है, सताने के लिए नहीं, साथ निभाने के लिए यह वही जनता है जिसने आप पर भरोसा कर सरकार बनाई। इस भरोसे को तोड़िए मत। जनता को मजबूरी में न धकेलिए। यह समय उनके साथ खड़ेहोने का है, न कि उन्हें नई गाड़ी खरीदने की धमकी देने का। हमारी एक ही माँग हैपुरानी गाड़ियों पर रोक का अन्याय बंद होआम आदमी की मेहनत और जीवनशैली का सम्मान होजनता को परेशान करने के बजाय राहत दी जाएदेश राजधानी की सड़कों पर अगर 61 लाख परिवार परेशान हैं, तो यह केवल एक नीति की गलती नहीं है, यह एक मानवीय संकट है।

दिल्ली को जल संकट से मिलेगी राहत, जल बोर्ड ने दी 121 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी मंत्री प्रवेश वर्मा,वर्षों से अटकी पड़ी परियोजनाओंको मिलेगी रफ्तार, हर नागरिक तक पहुंचेगी जल और सीवर सुविधा

दिल्ली सरकार में मंत्री श्री प्रवेश वर्मा ने आज एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में दिल्ली जल बोर्ड की हालिया बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी।उन्होंने बताया कि राजधानी दिल्ली में जल संकट को दूर करने और सीवर व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृतिदी गई है। कुल 121 करोड़ रुपये की लागत से जल और सीवर से जुड़ी योजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिससे हज़ारों नागरिकों को सीधे लाभ मिलेगा। वर्षों से लंबित थी योजना, अब मिला नया जीवन – मंत्री वर्मा ने बताया कि वर्ष 2013 में एक बड़ी योजना तैयार की गई थी, जिसके अंतर्गत एशियाईविकास बैंक के सहयोग से दिल्ली के विभिन्न इलाकों में जल आपूर्ति और सीवर व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना था। योजना के अंतर्गत 2433 करोड़रुपये की सहायता राशि प्रस्तावित थी। लेकिन समय के साथ-साथ एशियाई विकास बैंक ने इस योजना से स्वयं को अलग कर लिया, जिससे यहमहत्त्वाकांक्षी परियोजना वर्षों तक अधर में लटकी रही। उन्होंने कहा कि जब राजधानी में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी, तब हमने स्वयं पहलकर इस योजना को पुनः सक्रिय करने की दिशा में काम शुरू किया। अब जाकर इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्वीकृति दी गई है, जिससेराजधानी के नागरिकों को जल और सीवर की मूलभूत सुविधाएं मिल सकेंगी। सरकारी एजेंसियों को मिलेगा जल बोर्ड से कनेक्शन – मंत्री ने इस बात पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया कि पहले जब दिल्ली विकासप्राधिकरण (डीडीए) जैसी सरकारी एजेंसियां आवासीय परियोजनाएं बनाती थीं, तो उन्हें दिल्ली जल बोर्ड से जल और सीवर कनेक्शन नहीं मिलते थे।आम आदमी पार्टी की सरकार के समय इन योजनाओं में लगातार अड़चनें डाली गईं, जिससे जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ा।अब जल बोर्ड ने स्पष्ट रूप से निर्णय लिया है कि ऐसी सभी परियोजनाओं को जल और सीवर की सुविधा दी जाएगी, जिससे नए निर्माण में रहने वालेनागरिकों को राहत मिल सके। यमुना नदी में नहीं है बाढ़ का खतरा – यमुना नदी के जल स्तर को लेकर फैली आशंकाओं पर भी मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि फिलहालयमुना का जल स्तर पूरी तरह सामान्य है और बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं बनी है। उन्होंने कहा, हम स्थिति पर पूरी निगरानी बनाए हुए हैं, और यदिभविष्य में कोई जोखिम पैदा होता है, तो समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल किसी भी प्रकार की घबराहट की आवश्यकता नहीं है। सरकार की प्राथमिकता – हर घर तक शुद्ध जल और सुरक्षित सीवर व्यवस्थाप्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली में जल संकट से निजात दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड पूरी सक्रियतासे कार्य कर रहा है और आने वाले महीनों में कई नई योजनाओं को भी मंजूरी दी जाएगी। जिन इलाकों में अब तक जल और सीवर की सुविधा नहीं है, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम किया जाएगा। मंत्री ने अंत में यह भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार दिल्ली को एक स्वच्छ, सुरक्षित औरसुविधाजनक राजधानी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और जनता के हित में हर आवश्यक निर्णय लिया जा रहा है। 

कूड़ा संकट पर आप का हल्ला बोल, मेयर कार्यालय के बाहर फेंका कचरा, इस्तीफ़े की मांग 

दिल्ली नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद आम आदमी पार्टी लगातार विभिन्न मुद्दों को लेकर भाजपा को घेरने में लगी हुई है।आज इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी के सभी निगम पार्षदों ने सिविक सेंटर स्थित मेयर कार्यालय के बाहर ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कामुख्य मुद्दा राजधानी दिल्ली में दिन-प्रतिदिन बिगड़ती सफ़ाई व्यवस्था और बढ़ते कूड़े के ढेर थे। आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने मेयर राजा इकबाल सिंह के कार्यालय के बाहर कूड़ा फेंक कर अपना विरोध दर्ज कराया। पार्षदों ने साफ़ तौर पर कहाकि जब तक सफ़ाई व्यवस्था में सुधार नहीं होता और मेयर अपना उत्तरदायित्व नहीं निभाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आप पार्षदों ने मेयर केतत्काल इस्तीफ़े की मांग करते हुए कहा कि भाजपा शासित नगर निगम दिल्ली की जनता को बुनियादी सुविधाएं देने में बुरी तरह विफल रहा है।विरोध कर रहे पार्षदों का आरोप था कि राजधानी के सेंट्रल ज़ोन समेत कई क्षेत्रों में गंदगी का अंबार लगा है, लेकिन निगम और मेयर इस पर कोईठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। स्थिति यह रही कि जब आप पार्षद मेयर से मिलने पहुंचे तो वह कार्यालय से ग़ायब मिले। इससे नाराज़ होकर पार्षदों ने मेयर कार्यालय के बाहर हीकूड़ा फेंक कर प्रदर्शन किया और जनता की आवाज़ बुलंद की।आप पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि भाजपा और नगर निगम प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर जल्द से जल्द कोई समाधान नहीं निकालते तो आम आदमीपार्टी सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ेगी और अगली बार मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी केपार्षदों ने जनता के स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा की रक्षा के लिए इस लड़ाई को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।