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अमेरिका की ओर से फार्मा उद्योग पर टैरिफ लगाने की स्थिति में हिमाचल की करीब 270 कंपनियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा. हिमाचल में करीब 650 फार्मा कंपनियां काम कर रही हैं. इनमें से 270 कंपनियां अपने उत्पाद निर्यात करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन में गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस(जीएमपी) प्रमाणित हैं. हिमाचल से सालाना करीब 10,000 करोड़ की दवाएं निर्यात होती हैं. इस समय भारत से अमेरिका निर्यात होने वाली दवाओंपर कोई टैरिफ नहीं लगता.हालांकि अमेरिका से आयात होने वाली दवाओं पर भारत 10 फीसदी टैरिफ लगाता है. बद्दी में घरेलू और बहुराष्ट्रीयकंपनियों की निर्माण इकाइयां हैं. देश में कुल दवा निर्माण का करीब 35 फीसदी हिमाचल में तैयार होता है. शुरूआत में राष्ट्रपति ट्रंप ने जबरेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की तो फार्मास्यूटिकल्स, कॉपर, सेमीकंडक्टर, लकड़ी, बुलियन, एनर्जी और कुछ मिनरल को टैरिफ से छूट दी, क्योंकियह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं. रेसिप्रोकल टैरिफ में फार्मास्यूटिकल्स को राहत इसलिए मिली क्योंकि आयातित दवाएं, विशेष रूप सेभारत से आने वाली जेनेरिक दवाएं, अमेरिकी हेल्थ सिस्टम की लागत को कम रखने में मदद करती हैं. हिमाचल के फार्मा उद्योग संचालक अमेरिका केरुख पर नजर बनाए हैं.

फार्मास्युटिकल्स को रेसिप्रोकल टैरिफ से दी गई छूट जल्द होगी समाप्त
दरअसस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 अप्रैल को कहा था कि फार्मास्युटिकल्स को रेसिप्रोकल टैरिफ से दी गई छूट जल्द समाप्त होगी. मंगलवाररात उन्होंने कहा कि हम बहुत जल्द ही फार्मास्युटिकल्स पर एक बड़ा टैरिफ लगाने की घोषणा करने जा रहे हैं. हालांकि किस देश पर कितना टैरिफलगेगा इसे लेकर ट्रंप ने स्थिति साफ नहीं की है भारत अमेरिका को बड़ी मात्रा में फार्मास्युटिकल्स का निर्यात करता है. अमेरिका ने भारत पर 27 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का 2 अप्रैल को एलान किया था. लेकिन बाद में इसे 90 दिनों के लिए 9 जुलाई तक टाल दिया.अगले 90 दिनोंके लिए अमेरिका ने सभी टैरिफ टाल दिए हैं. देखना होगा अमेरिका कितना टैरिफ घोषित करता है जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार से भी मामला उठायाजाएगा.हिमाचल के दवा उत्पादक अमेरिकी टैरिफ को लेकर अमेरिका के रुख पर नजर बनाए हैं. भारत की दवाओं पर अमेरिका में कोई टैरिफ नहीं था.

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