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13 मई 2025 – वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में एक प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने हालिया घटनाओं, विशेष रूप से पहलगाम हमले, सीज़फायर की अचानक घोषणा, और अमेरिका की भूमिकाको लेकर कई गंभीर सवाल उठाए।

 लंबे अरसे बाद संवाद:
अशोक गहलोत ने पत्रकारों से बातचीत की शुरुआत में कहा कि लंबे समय बाद संवाद हो रहा है और उन्हें खुशी है कि वे मीडिया से मुखातिब हैं।

पीएम मोदी के भाषण से निराशा:
गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात को देश को संबोधित किया, लेकिन उनके भाषण से देश को बहुत निराशा हुई। उन्होंने भविष्य कीयोजनाएं बताईं, लेकिन वर्तमान हालात पर स्पष्टता नहीं दी।

सीजफायर और गोपनीयता पर सवाल:
उन्होंने कहा कि जिस तरह से सीजफायर की घोषणा की गई, वह पूरी तरह से गोपनीय और अस्पष्ट थी। देश समझ नहीं पा रहा कि यह कब और कैसेहुआ। गहलोत ने यह भी पूछा कि अगर आतंकवाद पर कार्रवाई जारी रहेगी, तो फिर सीजफायर का मतलब क्या है?

सेना की तारीफ:
गहलोत ने भारतीय सेना की तारीफ की कि उन्होंने बेहद संयम और समझदारी के साथ सिर्फ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इससे देश कीप्रतिष्ठा बढ़ी।

ऐतिहासिक सन्दर्भ:
गहलोत ने भारत के सैन्य इतिहास की याद दिलाई:

1961 में गोवा मुक्ति
1971 में बांग्लादेश युद्ध जिसमें पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया।

सिक्किम का भारत में विलय
कारगिल युद्ध और कई अन्य संघर्ष

अमेरिका का दबाव:
उन्होंने कहा कि भारत पर हमेशा से अमेरिका का दबाव रहा है। 1971 में भी अमेरिका ने इंदिरा गांधी पर दबाव बनाया, लेकिन उन्होंने झुकने से इनकारकर दिया। आज की स्थिति में भी ट्रंप जैसे नेताओं की टिप्पणियों को लेकर चिंता जताई।

अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप पर आपत्ति:
गहलोत ने ट्रंप के उस बयान की आलोचना की जिसमें उन्होंने कश्मीर मुद्दे को हल करने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान केबीच हुए शिमला समझौते के तहत कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं हो सकता।

विपक्ष का समर्थन:
गहलोत ने कहा कि आज विपक्ष सरकार के साथ खड़ा है, लेकिन सरकार पारदर्शिता से काम नहीं कर रही। प्रधानमंत्री को विपक्ष के साथ बातचीतकरनी चाहिए।

मीडिया से अपील:
उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे “सूत्रों के हवाले” से खबरें न दिखाएं, बल्कि सरकार से स्पष्ट बयान की मांग करें।

निष्कर्ष:
अशोक गहलोत ने सरकार से अपील की कि वह सीधी और सच्ची जानकारी देश के सामने रखे। उन्होंने चेताया कि मौजूदा हालात संवेदनशील हैं औरउन्हें संभालने में चूक नहीं होनी चाहिए। ‎

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