जमानत की शर्तों पर नहीं होंगे प्रवचन
राजस्थान हाई कोर्ट ने रेप के मामले में दोषी स्वयंभू संत आसाराम की अंतरिम ज़मानत की अवधि को बढ़ाकर अब 1 जुलाई 2025 तक कर दिया है।कोर्ट की यह मंजूरी उसी शर्त पर दी गई है, जो पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई थीं—जिनमें प्रवचन करने और अनुयायियों की भीड़ इकट्ठा करने परपाबंदी शामिल है।
31 मार्च को पूरी हुई थी पहले की जमानत
आसाराम की पिछली अंतरिम ज़मानत 31 मार्च को समाप्त हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने 1 अप्रैल की रात को जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पणकिया था। इसके बाद उन्हें एक निजी आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती कराया गया।
कोर्ट में वीडियो सबूत पेश, हलफनामा मांगा गया
2 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष के वकील पीसी सोलंकी ने आरोप लगाया कि आसाराम ने ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन किया है।उन्होंने दावा किया कि इंदौर स्थित आश्रम में प्रवचन आयोजित कर उन्होंने अनुचित गतिविधियों में भाग लिया। इस दावे को प्रमाणित करने के लिएअदालत में एक वीडियो साक्ष्य भी प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद अदालत ने आसाराम से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने हलफनामा स्वीकार किया
आसाराम के वकील निशांत बोरा ने सोमवार को हलफनामा पेश किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद कोर्ट ने 1 जुलाई तक अंतरिमज़मानत बढ़ाने के अनुरोध को मंजूरी दी।
गुजरात हाई कोर्ट से भी मिली थी जमानत
गौरतलब है कि आसाराम को सूरत में दर्ज एक अन्य रेप केस में गुजरात हाई कोर्ट से भी 28 मार्च को तीन महीने की अंतरिम ज़मानत मिली थी।