
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ जमीन के लेनदेन में कथित धनशोधन से जुड़े एक मामले में चार्जशीटदायर की है. केंद्रीय एजेंसी इस मामले में वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी की 37.64 करोड़ रुपये की 43 अचल संपत्तियां कुर्क कर लीं हैं. बताया गया है कि ईडी ने मामले में जांच पूरी करने के बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में शिकायत की थी. इस मामले में वाड्रा की स्काई लाइटहॉस्पिटैलिटी प्रा. लि. के अलावा 11 और लोगों को आरोपी बनाया गया था. शुक्रवार को अदालत ने मामले में अपने रिकॉर्ड कीपर (अहलमद) सेरिपोर्ट मांगी और मामले को दस्तावेज के सत्यापन के लिए सूचीबद्ध कर लिया. ईडी की तरफ से इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने और संपत्तियोंको अटैच किए जाने की खबरों के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा.
रॉबर्ट वाड्रा को कर रहा परेशान
राहुल ने कहा कि केंद्र रॉबर्ट वाड्रा को परेशान कर रहा है राहुल ने कहा कि अंत में जीत सच्चाई की होगी. आरोप है कि मानेसर-शिकोहपुर में मौजूदजमीन के ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से वाड्रा की कंपनी को बेचे जाने के एक दिन बाद ही इसका म्यूटेशन कर दिया गया. इतना ही नहीं, इसके अगले दिनजमीन को वाड्रा की कंपनी को स्थानांतरित भी कर दिया गया. जबकि आमतौर पर इस प्रक्रिया में तीन महीने का समय लगता है. हरियाणा केतत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने इस जमीन में से 2.70 एकड़ जमीन को कमर्शियल कॉलोनी के तौर पर डेवलप करने की इजाजतदेते हुए रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी को इसका लाइसेंस दिया था. आवासीय परियोजना का लाइसेंस मिलने के बाद जमीन की कीमत बढ़ गई. जून 2008 में वाड्रा से जुड़ी कंपनी ने ये जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ में बेच दी. यानी कुछ ही महीनों जमीन की कीमत 773 प्रतिशत तक बढ़ गई. आगेचलकर हुड्डा सरकार ने आवासीय परियोजना का लाइसेंस डीएलएफ को ट्रांसफर कर दिया. अक्तूबर 2012 में जब आईएएस अशोक खेमका (अबरिटायर्ड) हरियाणा में भूमि पंजीकरण और रिकॉर्ड विभाग में इंस्पेक्टर जनरल के पद पर तैनात हुए तो उन्होंने वाड्रा की जमीनों के समझौतों कोखंगालना शुरू किया.
आदेश देकर कर दिया ट्रांसफर
इसके ठीक बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के आदेश पर उनका ट्रांसफर कर दिया गया. हालांकि, खेमका ने अपनी जांच पूरी कर ली और 15 अक्तूबर कोजमीन का म्यूटेशन रद्द कर दिया. हालांकि इस घटनाक्रम के बाद विवाद इस कदर बढ़ गया कि हरियाणा सरकार को तीन वरिष्ठ आईएएस अफसरों केनेतृत्व में मामले की जांच के लिए पैनल गठित करना पड़ा. हालांकि, हुड्डा सरकार ने वाड्रा और डीएलएफ दोनों को क्लीन चिट दे दी. साथ ही खेमकापर अधिकार से बाहर जाकर कार्रवाई करने का आरोप लगा दिया। 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद मनोहर लाल खट्टर सरकार ने एक रिटायर्डजज के नेतृत्व में जांच आयोग का गठन किया. 31 अगस्त 2016 को इस आयोग ने 182 पन्ने की रिपोर्ट सरकार को सौंपी. हालांकि, तब इससमझौते को लेकर हुए खुलासों को सार्वजनिक नहीं किया गया. उसी साल नवंबर में हुड्डा सरकार ने जांच आयोग के गठन को पंजाब-हरियाणाहाईकोर्ट में चुनौती दी. सरकार ने इसके बाद अदालत में आश्वासन दिया कि रिपोर्ट को प्रकाशित नहीं किया जाएगा.