
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग (ईसी) पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि यह संस्था अब मोदी सरकार कीकठपुतली बन चुकी है। उन्होंने बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को असंवैधानिक बताया और दावा किया कि यह प्रक्रियाबहुसंख्यकवादी सरकारों को सत्ता में बनाए रखने का प्रयास है.पूर्व कानून मंत्री सिब्बल ने पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि चुनाव आयोगको नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी ब्लॉक स्तर के अधिकारी के माध्यम से यह तय करना कि कौन नागरिक है औरकौन नहीं संविधान का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया गरीब, दलित और आदिवासी वोटरों के नाम हटाकर बहुसंख्यक सरकार के पक्ष मेंचुनाव परिणाम तय करने का तरीका है. कपिल सिब्बल ने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से चुनाव आयोग की निष्पक्षता खत्म होतीगई है.
खुद इस मामले का है अधिवक्ता
उनका कहना है कि हर नया चुनाव आयुक्त अपने पूर्ववर्ती से भी अधिक सरकार के अनुकूल काम करता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब से यह सरकारआई है आयोग की स्वतंत्रता पर विश्वास करना मुश्किल हो गया है जब उनसे सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम टिप्पणियों पर सवाल किया गया तो सिब्बल नेकोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने कहा कि वे खुद इस मामले में अधिवक्ता हैं. इसलिए कोर्ट के निर्देशों पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करनाउचित नहीं होगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग कोर्ट की बातों को गंभीरता से लेगा और विवाद को आगे नहीं बढ़ने देगा। सुप्रीम कोर्ट नेआयोग से कहा है कि वह आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड को SIR में वैध दस्तावेजों के रूप में भी स्वीकार करे. हालांकि आयोग के वकीलों नेइसका विरोध किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वे आयोग को बाध्य नहीं कर रहे. लेकिन आयोग को उचित कारणों के साथ फैसला लेना होगा। कोर्ट नेयह भी कहा कि आयोग को वह सब करना चाहिए जो संवैधानिक रूप से उसके अधिकार में है लेकिन जो अधिकार नहीं है उसमें हस्तक्षेप नहीं होनाचाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दाखिल 10 याचिकाओं पर 28 जुलाई को अगली सुनवाई तय की है.
प्रमुख मुद्दों को किया गया चिन्हित
कोर्ट ने आयोग को एक हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है. उसके बाद याचिकाकर्ता भी अपना जवाब देंगे. कोर्ट ने SIR की प्रक्रिया पर सवालउठाते हुए तीन प्रमुख मुद्दों को चिन्हित किया है – आयोग की शक्तियां, प्रक्रिया का तरीका और समय-सीमा। ये तीनों पहलू आने वाली सुनवाई मेंअहम होंगे. राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग को मोदी सरकार की कठपुतली बताया और बिहार में चल रही विशेष पुनरीक्षण प्रक्रियाको असंवैधानिक करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया गरीबों और अल्पसंख्यकों के वोट काटकर बहुसंख्यक सरकार को फायदा पहुंचानेके लिए हो रही है सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में आयोग से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। उन्होंने आरोप लगाया किब्लॉक स्तर के अधिकारी जिनके पास जांच का अधिकार नहीं होना चाहिए. वे अब नागरिकता तय करने का कार्य कर रहे हैं जो संविधान का घोरउल्लंघन है. सिब्बल ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम टिप्पणियां आयोग के अधिकारों की सीमा तय करने की दिशा में अहम हैं. कोर्ट नेचुनाव आयोग से कहा है कि वह आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने पर विचार करे.