Skip to main content

NEWS अब तक

कांग्रेस नेता और सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा है कि केंद्र सरकार का यूनियन बजट अधिकांश तौर पर सामान्य दिशा-निर्देशों और मामूली बदलावोंका एक संग्रह मात्र था, जिसका देश की बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था को सुधारने में कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों सेसरकार जनता को खाली नारों के माध्यम से धोखा देने की कोशिश कर रही है, जिसमें न तो कोई स्पष्ट दृष्टिकोण है और न ही गरीब और हाशिए पररहने वाले समाज के लिए कोई राहत दी गई है।
नौकरी सृजन के लिए कोई योजना नहीं

वेणुगोपाल ने इस बजट में रोजगार सृजन के लिए किसी भी ठोस योजना का अभाव बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट न तो निवेश के माहौल मेंसुधार करता है और न ही किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी प्रदान करता है।
मंहगाई और मध्यवर्गीय परिवारों के लिए कोई राहत नहीं

उन्होंने यह भी कहा कि बजट ने बढ़ती महंगाई के बीच मध्यवर्गीय परिवारों के लिए कोई राहत नहीं दी है। इस आर्थिक संकट के समय में सरकार केद्वारा कोई स्पष्ट रणनीति सामने नहीं आई है, जो देश के नागरिकों को इस महंगाई से राहत दिला सके।
मनरेगा योजना को कमजोर करने का प्रयास

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि इस बजट में मनरेगा (MGNREGA) योजना के लिए आवंटन में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे यह साफप्रतीत होता है कि सरकार इस योजना को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। यह योजना करोड़ों भारतीयों के लिए सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण साधनरही है, और इसके बजट में वृद्धि की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन इस बार सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
आयकर में मामूली सुधार, लेकिन मूल समस्याएं जस की तस

आयकर में किए गए बदलावों को वेणुगोपाल ने मामूली सुधार बताया और कहा कि यह केवल उन नीतियों के बाद के छोटे बदलाव हैं, जिन्हें सरकारने पहले “टैक्स आतंकवाद” और अन्य गलत नीतियों के तहत लागू किया था। उन्होंने कहा कि ये सुधार केवल एक दिखावा हैं, क्योंकि कांग्रेस नेताराहुल गांधी ने पहले ही इन नीतियों के खतरनाक असर का खुलासा किया था।
सरकार की चुनावी चालें, असल आर्थिक संकट की अनदेखी

वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि इस बजट ने यह संदेश दिया है कि सरकार चुनावी फायदे के लिए सस्ते राजनीति के हथकंडों में जुटी हुई है, लेकिन देशके वास्तविक आर्थिक संकट को हल करने में नाकाम है।

कुल मिलाकर, कांग्रेस नेता ने इस बजट को नाकाफी और जनहित के खिलाफ बताया है, जो केवल चुनावी फायदा उठाने की कोशिशों तक सीमित है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *