कांग्रेस ने USAID फंडिंग विवाद को लेकर मोदी सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि भाजपा, उसके मंत्री, आर्थिकसलाहकार, आईटी सेल और समर्थित मीडिया ‘डीप स्टेट’ और ‘विदेशी हस्तक्षेप’ का झूठा नैरेटिव गढ़कर जनता को गुमराह कर रहे हैं। इस विवाद कीशुरुआत तब हुई जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि “21 मिलियन डॉलर भारत में मतदान के लिए प्रधानमंत्री मोदी को दिए जा रहेथे।” इस बयान के बाद मामला तूल पकड़ने लगा। भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स और वाशिंगटन पोस्ट की फैक्ट-चेकिंग में यह सामने आया कि भाजपाऔर मोदी सरकार के मंत्री द्वारा किए गए दावे गलत हैं। यह फंड भारत के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश के लिए था। हालांकि, भारत को भी USAID से सहायता राशि मिली थी, लेकिन वह चुनावों से संबंधित नहीं थी। वाशिंगटन पोस्ट की तथ्य-जांच में कहा गया कि भारत में मतदान के लिए 21 मिलियन डॉलर खर्च किए जाने का कोई प्रमाण नहीं है।
कांग्रेस ने भाजपा और आरएसएस पर झूठे प्रचार अभियानों के जरिए लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि भाजपाप्रवक्ताओं ने उन मीडिया संस्थानों और पत्रकारों पर हमला किया, जिन्होंने इस फंडिंग की सच्चाई उजागर की। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अगरभाजपा को इस फंडिंग पर संदेह था, तो उसने खुद इसकी जांच क्यों नहीं की? कांग्रेस ने USAID से भारत को मिलने वाले फंड के आंकड़े भी पेशकिए, जिनके अनुसार 2001 से 2024 के बीच भारत को कुल 2.9 बिलियन डॉलर की सहायता मिली, जिसमें से 44.4% (1.3 बिलियन डॉलर) भाजपा शासन (2014-2024) के दौरान और 41.3% (1.2 बिलियन डॉलर) कांग्रेस शासन (2004-2013) के दौरान प्राप्त हुए। कांग्रेस ने यह भीदावा किया कि 2021 से 2024 के बीच मोदी सरकार को 650 मिलियन डॉलर की सहायता मिली, लेकिन इसका उद्देश्य स्पष्ट नहीं किया गया।
कांग्रेस ने यह भी बताया कि जिस Consortium for Elections and Political Process Strengthening (CEPPS) कार्यक्रम के तहत21 मिलियन डॉलर की फंडिंग का दावा किया जा रहा है, उसका कोई रिकॉर्ड भारत में नहीं है क्योंकि यह फंडिंग भारत के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेशके लिए थी। इसके अलावा, कांग्रेस ने मोदी सरकार की USAID के साथ साझेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भाजपा को USAID परविदेशी हस्तक्षेप का संदेह है, तो उसने खुद स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल इंडिया और कोविड-19 राहत कार्यों के लिए USAID से साझेदारी क्योंकी?
कांग्रेस ने इस पूरे मामले में सरकार से तीन प्रमुख मांगें की हैं। पहली, सरकार को विदेशी फंडिंग पर एक व्यापक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए, जिसमेंयह स्पष्ट किया जाए कि राजनीतिक दलों, गैर सरकारी संगठनों और अन्य संस्थाओं को किस स्रोत से कितना फंड मिला। दूसरी, प्रधानमंत्री मोदी कोडोनाल्ड ट्रंप से बात कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि भारत में चुनावों के लिए कोई विदेशी फंडिंग नहीं हुई। तीसरी, भाजपा और आरएसएस के उननेताओं और संगठनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, जो इस मुद्दे पर झूठा प्रचार कर जनता को गुमराह कर रहे हैं। कांग्रेस ने मोदी सरकार सेइस पूरे मामले पर स्पष्टता की मांग की है और कहा कि यदि भाजपा के पास इस फंडिंग को लेकर कोई ठोस सबूत हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा झूठा प्रचार बंद किया जाए।