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केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन गडकरी ने एक बार फिर बेबाक बयान दिया है उन्होंने शनिवार को कहा कि लोग जातिवादी नहीं होते, बल्कि नेता अपने स्वार्थ के लिए जातिवादी होते हैं. यहां एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़ापन राजनीतिक हित बनता जा रहाहै। गडकरी ने कहा, ‘इस बात की होड़ लगी रहती है कि कौन ज्यादा पिछड़ा है.उन्होंने कहा लोग जातिवादी नहीं होते बल्कि नेता अपने स्वार्थ के लिएजातिवादी होते हैं.उन्होंने कहा कि सामाजिक असमानता को खत्म करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जातिगत भेदभाव खत्म होना चाहिए और इसकीप्रक्रिया खुद से शुरू होनी चाहिए.इससे पहले गडकरी ने जातिगत भेदभाव को लेकर अहम टिप्पणी की थी उन्होंने कहा था कि मैं जाति के आधार परभेदभाव नहीं करता हूं चाहे मुझे फिर वोट मिले या न मिले लोग जाति के आधार पर मुझसे मिलने आते हैं मैंने उन सबसे 50,000 लोगों में कह दियाकि जो करेगा जाति की बात उसके कस के मारूंगा लात. मैं धर्म और जाति की बातें सार्वजनिक रूप से नहीं करता. चाहे चुनाव हार जाऊं या मंत्री पदचला जाए, मैं अपने इस सिद्धांत पर अटल रहूंगा.केंद्रीय मंत्री ने 15 मार्च को नागपुर में सेंट्रल इंडिया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के दीक्षांत समारोह मेंशिरकत की थी. उन्होंने कहा था कि किसी व्यक्ति का मूल्य जाति, धर्म, भाषा या लिंग के बजाय उसके गुणों से निर्धारित होना चाहिए.

नहीं करते किसा जाति या संप्रदाय से भेदभाव
उन्होनें कहा कि किसी व्यक्ति को उसकी जाति, संप्रदाय, धर्म, भाषा या लिंग से नहीं, बल्कि उसके गुणों से जाना जाता है. इसलिए हम जाति, संप्रदाय, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करेंगे. गडकरी ने याद किया था कि कैसे कई लोग अपनी जातिगत पहचान केआधार पर उनसे संपर्क करते थे लेकिन वह अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे। मैं राजनीति में हूं और यहां यह सब चलता रहता है. लेकिन मैं इससे इनकारकरता हूं भले ही इससे मुझे वोट मिले या न मिले मैं अपने हिसाब से चलता हूं.केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी हमेशा अपने स्पष्ट बयानों के लिए जाने जातेहैं. इसी में कल उन्होंने नेताओं के बारे में एक बड़ा बयान दे डाला अपने बयान में गडकरी ने कहा कि आम जनता जातिवादी नहीं है बल्कि नेताजातिवादी हैं नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए जाति को खड़ा किया है. नागपुर में हाल ही में हिंसक घटना घटी है ऐसे में नितिन गडकरी के इस बयानको विशेष महत्व दिया जा रहा है.अभी महाराष्ट्र में जातीय राजनीति उभार पर है सभी राजनीतिक दल मराठा और ओबीसी वोटरों को गोलबंद करने मेंजुटे हैं. बीजेपी ने भी विधानपरिषद चुनाव में ओबीसी पर भरोसा किया उसने इस चुनाव में जो पांच कैंडिडेट उतारे हैं वह सभी अति पिछड़ी जाति सेआते हैं. जबकि एनसीपी (शरद चंद्र पवार) और शिवसेना (यूबीटी) मराठा वोटरों पर फोकस कर रही है. इन दिनों में राज्य में मराठा आरक्षण को लेकरभी बहस चल रही है मराठों के आरक्षण देने का ओबीसी नेता विरोध कर रहे हैं.

शिवसेना खुलकर कर रही मराठा आरक्षण की वकालत
दरअसल महाविकास अघाड़ी खासकर शिवसेना (य़ूबीटी) खुलकर मराठा आरक्षण की वकालत कर रही है जबकि एनसीपी के ओबीसी नेता इसकाविरोध कर रहे हैं.नितिन गडकरी अपने बेबाक बयान के लिए अक्सर सुर्खियों में रहते हैं और बिना लाग लपेट के अपनी बात रखते हैं. बीजेपी के राष्ट्रीयअध्यक्ष रह चुके नितिन गडकरी कई मौकों पर ऐसे बयान दे चुके हैं जिससे लगता है कि वह नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए बोल रहे हैं. एककार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि पार्टी चाहे किसी की सरकार की हो एक चीज तय है. जो अच्छा काम करता है उसे सम्मान नहीं मिलता और बुरा कामकरने वालों को सजा नहीं मिलती. 2019 में भी उनका एक बयान सुर्खियों में आया था जब उन्होंने कहा था कि सपने दिखाने वाले नेता अच्छे लगते हैंमगर जब सपने पूरे नहीं होते तो जनता उनको पीटती भी है. लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि वह चुनाव में पोस्टर नहीं लगाएंगे और खर्चा-पानी के लिए पैसा भी खर्च नहीं करेंगे. जिसको वोट देना है, वोट दे जिसे नहीं देना है, नहीं दे मगर जब जीतेंगे तो काम सबका करेंगे.

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