कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर निशाना साधते हुए डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट को लेकर तीखीप्रतिक्रिया दी। पार्टी की सोशल मीडिया प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के तहत रुपया 50 प्रतिशत तक गिर चुका है, औरइसके बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अरबों डॉलर खर्च किए हैं, फिर भी रुपया संभल नहीं पा रहा है।
रुपया गिरने का तंज: मोदी की प्रतिष्ठा पर सवाल
सुप्रिया श्रीनेत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वह मैग्नीफाइंग ग्लास (दृष्टि के लिए लेंस) का इस्तेमाल करके यह ढूंढ रही हैं कि रुपये कीगिरावट कहां तक जाती है, और साथ ही यह भी कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिष्ठा कहां तक गिर चुकी है। उन्होंने कहा, “आज रुपया ढूंढने पर भी नहींमिल रहा है, गिरता ही जा रहा है और अब 87 रुपये के स्तर को पार करने की ओर अग्रसर है।” श्रीनेत ने मजाक करते हुए कहा कि मोदी सरकार कोरुपये को संभालने के बजाय शतक (100 रुपये) बनाने की कोई चेष्टा करने की बजाय उसे स्थिर करना चाहिए था।
रुपये की गिरावट में मोदी की नीतियों का दोष: कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब नरेंद्र मोदी मई 2014 में प्रधानमंत्री बने थे, तब एक अमेरिकी डॉलर कीकीमत 58 रुपये थी। लेकिन जनवरी 2025 तक यह 87 रुपये के स्तर को पार करने वाला है। श्रीनेत ने आरोप लगाया कि इस अवधि में मोदीसरकार ने रुपये की कीमत को 50 प्रतिशत तक गिरा दिया।
रिजर्व बैंक की कोशिशें नाकाम
सुप्रिया श्रीनेत ने आगे कहा कि रिजर्व बैंक ने रुपये को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी। सितंबर 2024 में विदेशी मुद्रा भंडार 704 अरब डॉलरथा, लेकिन इसके बाद से रुपया संभालने के लिए 80 अरब डॉलर यानी 6,83,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद, रुपये की गिरावट परकाबू नहीं पाया जा सका है। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिति यह दर्शाती है कि रुपये की स्थिरता के लिए सरकार के पास कोई प्रभावी योजना नहींहै।
प्रधानमंत्री मोदी का ‘रुपया शतक’ की ओर बढ़ना?
सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर तंज करते हुए कहा, “लगता है जैसे मोदी जी ने ठान लिया है कि रुपये का शतक (100 रुपये) बनवाकर रहेंगे।” उन्होंने कहा, “रुपया लगातार गिरता जा रहा है और प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।” श्रीनेत ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार रुपये की गिरावट से जूझने के लिए क्या कदम उठा रही है और क्यों इसे स्थिर करने के प्रयास नहीं किए जारहे हैं।