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सासाराम से लोकसभा सांसद श्री मनोज कुमार ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में एक अहम प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। इस प्रेस वार्ता में उन्होंनेप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे, गंगा सफाई परियोजना (नमामि गंगे), और राज्य सरकार की नाकामियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावाकिया कि बिहार की जनता को गुमराह किया जा रहा है और गंगा को “पवित्र नदी” से प्रदूषण की नदी बना दिया गया है।


गंगा की सफाई या एक दिखावटी अभियान? मनोज कुमार ने कहा कि नमामि गंगे योजना के तहत जिस दीघा एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) काउद्घाटन पीएम मोदी करने जा रहे हैं, वह बाढ़ क्षेत्र में स्थित है और तकनीकी रूप से अनुपयुक्त है। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की रिपोर्ट केअनुसार: एसटीपी को उस स्थान पर बनाया गया जहाँ हर साल बाढ़ आती है। बाढ़ आने पर एसटीपी में गंदा पानी जमा हो जाता है, जिससे प्रदूषणऔर अधिक फैलता है। एनजीटी ने इस पर गंभीर आपत्ति जताई है और दो प्रमुख सवाल पूछे हैं-

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में एसटीपी बनाने की अनुमति क्यों दी गई?
क्या इसका कोई पर्यावरणीय मूल्यांकन किया गया था?
एनजीटी का बड़ा एक्शन: 50,000 रुपये का जुर्माना
एनजीटी ने रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया है कि,बिहार के 67 बड़े नाले प्रतिदिन 1046.21 MLD गंदा पानी सीधे गंगा में गिरा रहे हैं।


गंगा में गिरने वाला पानी पीने, स्नान या किसी भी धार्मिक उपयोग के लायक नहीं रह गया है। इस लापरवाही के लिए बिहार सरकार पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया गया है।
गंगा किनारे बने एसटीपी फेल-रिपोर्ट से खुलासा
बिहार में बनाए गए 13 एसटीपी में से अधिकांश फेल हो चुके हैं:
स्थान क्षमता (MLD) उपयोग (MLD) मानक अनुरूप?
बेऊर 43 31,सैदपुर 60 37,पहाड़ी 21 21,सोनपुर 3.5 2.7,बाढ़ 11 7.4,सुल्तानगंज 10 4.5


इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कोई भी एसटीपी पूरी तरह से मानक के अनुरूप काम नहीं कर रहा है। इससे गंगा जी में गिरने वाला पानी बेहद गंभीर रूप सेप्रदूषित हो गया है।


मनोज कुमार का बयान: अब बिहार नहीं देगा धोखा देने वालों को मौका हमारे देश में यह आस्था है कि गंगा का जल अमृत है। लेकिन आज कीहकीकत यह है कि यह पीने लायक तो दूर, नहाने लायक भी नहीं रहा। उन्होंने पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने गंगाकी सफाई के नाम पर झूठा प्रचार किया और हज़ारों करोड़ रुपये बर्बाद किए।
गरीबी और आर्थिक असमानता का भी किया खुलासा – 94.42 लाख परिवार बिहार में ऐसे हैं जिनकी मासिक आय ₹200 प्रति व्यक्ति से कम है।


2.76 करोड़ परिवारों में से 34.13% परिवार ₹6000 मासिक से कम कमाते हैं।
हर दिन करीब 67 लाख लोग ₹40 से भी कम में जीवन गुजार रहे हैं।
बिहार में अपराध और बेरोजगारी पर चिंता – पिछले कुछ वर्षों में 953 बलात्कार, 33 अपहरण, और 136 हत्या के मामले दर्ज किए गए।युवाओं कोफर्जी परीक्षाओं के ज़रिए ठगा गया, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हुआ।
मेडिकल, पुलिस, बीपीएससी, शिक्षकों की भर्ती में भी घोटाले उजागर हुए। हमारा यह विश्वास है कि गंगा जी के पानी से नहाने से पाप धुल जाते हैं।पर अब गंगा में ऐसा जल है जो न मानव के लायक है, न आस्था के। इस प्रेस वार्ता ने गंगा की सफाई पर किए जा रहे कार्यों की जमीनी हकीकत, सरकारी लापरवाही, और प्रचार बनाम सच्चाई के बीच अंतर को उजागर किया। मनोज कुमार ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनता अब झूठे उद्घाटनों औरखोखली घोषणाओं से गुमराह नहीं होगी।
गंगा को धोखा देने वालों को बिहार नहीं देगा अब मौका।

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