छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को तलब कियाहै। एजेंसी ने उन्हें रायपुर स्थित कार्यालय में पेश होने के लिए समन भेजा है। मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है और चैतन्य से पूछताछ कीसंभावना जताई जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने किया नोटिस से इनकार
भूपेश बघेल ने बेटे चैतन्य को समन भेजे जाने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “नोटिसमिलने पर हम निश्चित रूप से पेश होंगे। ईडी का काम केवल मीडिया में सनसनी फैलाना है और एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को बदनामकरना भाजपा की साजिश है।”
ईडी की छापेमारी: 10 मार्च की कार्रवाई
इससे पहले 10 मार्च को ईडी ने दुर्ग जिले के 14 स्थानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य के आवास पर भी छापेमारे गए थे। छापेमारी के दौरान करीब 30 लाख रुपये नकद, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए थे। ईडी ने बघेल के करीबी मानेजाने वाले पप्पू बंसल और अन्य के परिसरों की भी तलाशी ली थी।
शराब घोटाले में बड़ा राजस्व नुकसान
ईडी के अनुसार, शराब घोटाले से छत्तीसगढ़ सरकार को भारी राजस्व क्षति हुई है। आरोप है कि 2019 से 2022 के बीच किए गए इस घोटाले से2,100 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध लाभ विभिन्न लाभार्थियों तक पहुंचाया गया।
गिरफ्तारियां और जब्ती
अब तक इस मामले में कई बड़े नाम गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें कांग्रेस नेता कवासी लखमा, रायपुर के महापौर ऐजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर, पूर्वआईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और अन्य शामिल हैं। ईडी ने अब तक करीब 205 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं।
विपक्ष का आरोप: भाजपा की साजिश
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि भाजपा ईडी और अन्य एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष कोबदनाम करने का प्रयास कर रही है।