कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि कांग्रेस, विशेषकर राहुल गांधी, लंबे समय से यह माँग कर रहे हैं कि देश में जबअगली जनगणना हो, तो उसमें जातीय जनगणना को भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य केवल जाति की गिनती करना नहीं, बल्कि यह जानना है कि विभिन्न समुदाय किन सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
डेटा आधारित नीतियों की आवश्यकता
पायलट ने कहा कि सरकारें जब योजनाएं बनाती हैं, बजट आवंटन करती हैं या नीतियां तय करती हैं, तो उन्हें सही और व्यापक आंकड़ों की ज़रूरतहोती है। जातीय जनगणना से यह पता चल सकेगा कि कौन-से वर्ग कहां पिछड़ रहे हैं और किन्हें ज्यादा सरकारी समर्थन की आवश्यकता है। राहुलगांधी द्वारा यह मांग बार-बार दोहराई गई है कि देश की असली तस्वीर जानने के लिए “एक्स-रे” की तरह यह जनगणना जरूरी है।
केंद्र सरकार की असहमति और बदलती रणनीति
उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले तो इस मांग को खारिज कर दिया गया, यहाँ तक कि इस मांग को रखने वालों को “अर्बननक्सली” तक कहा गया। लेकिन जब जनमत जागरूक हो गया और कांग्रेस के प्रयासों से यह मुद्दा व्यापक स्तर पर उठने लगा, तब भाजपा को झुकनापड़ा और उन्होंने 2027 में जातीय जनगणना कराने का संकेत दिया।
बजट में भारी कटौती, मंशा पर सवाल
पायलट ने सरकार द्वारा जातीय जनगणना के लिए मात्र ₹570 करोड़ का आवंटन किए जाने पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब सामान्यजनगणना में 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक खर्च होता है, तो इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए इतनी कम राशि देना बताता है कि सरकार कीनीयत साफ नहीं है।
सहयोगात्मक और वैज्ञानिक तरीका
उन्होंने तेलंगाना सरकार की सराहना करते हुए बताया कि वहाँ जनगणना विशेषज्ञों, टेक्नोलॉजी पार्टनर्स और एनजीओ के सहयोग से कराई गई, जिससेविश्वसनीय और विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को भी यही तरीका अपनाना चाहिए जिससे डेटा संकलन अधिकप्रामाणिक और समाजोपयोगी हो सके।
जातीय जनगणना का उद्देश्य केवल जाति जानना नहीं
सचिन पायलट ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस केवल किसी की जाति जानने के लिए यह माँग नहीं कर रही। असल उद्देश्य यह है कि समाज के उस तबकेकी पहचान हो सके जो आर्थिक, सामाजिक या शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है, ताकि सरकारें उनके लिए प्रभावी योजनाएं बना सकें।
देरी और अस्पष्टता पर चिंता
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा नोटिफिकेशन में स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं और जनगणना की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से 2027 तक टालदिया गया है। यह भी महिला आरक्षण की तरह एक और वादा है जिसे समय के नाम पर लटकाया गया है।