CES Gyanesh Kumar: ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त पर राहुल गांधी ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट की नई नियक्ति प्रक्रिया कोचुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला नहीं हो जाता तब तक इस फैसले को स्थगित कर देना चाहिए.
CES Gyanesh kumar: ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया गया है. ज्ञानेश कुमार अब राजीव कुमार की जगह लेगें. कानूनमंत्रालय ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है. पीएम मोदी, अमित शाह और राहुलगांधी की त्रिकोणीय सदस्यीय कमेटी ने यह फैसला लिया है. हालांकि इस मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन 2:1 के बहुमत से हुआ है. हाल ही में राहुलगांधी ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए अपनी असहमति जताई और उन्होनें कहा कि नए कानून के तहत पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली कमेटी नेपहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन किया गया है.इससे पहले भी इसी कमेटी ने पहली बार मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन किया था. उसकमेटी में एक ज्ञानेश कुमार थे तो दूसरी तरफ ए एस संधू.
ज्ञानेश कुमार के नाम पर आपत्ति क्यों
आखिरकार राहुल गांधी का ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने पर आपत्ति जताने के पीछे की बजह क्या है. बैठक के दौरान पीएम मोदी नेज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने पर हां बोला तो वहीं राहुल गांधी ने इस पर न बोला था. दरअसल राहुल गांधी चाहते थे. कि जब सुप्रीमकोर्ट ने नई नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक इस मुख्य चुनाव को स्थगित कर देना चाहिए.नएकानून के तहत अब मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्त पैनल में सीजेआई नहीं होंगें. पहले सीजेआई शामिल होते थे. मगर पहले साल केंद्र सरकार नेकानून का बदलाव किया था. इस बात पर कांग्रेस को आपत्ति थी. कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भीखटखटाया था.लेकिन मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.
संविधान की भावनाओं के खिलाफ- कांग्रेस
राहुल गांधी ने बस इसी को लेकर फैसल का इंतजार करने को कहा था. कांग्रेस के महासचिव और सांसद केसी वेनुगोपाल ने विस्तार से समझाया है. कांग्रेस ने इस फैसले को संविधान की भावना और सु्प्रीम कोर्ट के खिलाफ बताया है. इस पर उनका कहना है कि सरकार को 19 फरवरी का इंतजारनहीं हुआ. आधी रात को जल्दबाजी में सरकार के नए मुख्य चुनाव आयुक्त की अधिसूचना को जारी कर दिया गया. ये सब हमारे संविधान के खिलाफहै. सुप्रीम कोर्ट ने भी कई मामलों में इस बात को दोहराया है. कि चुनाव प्रक्रिया को दौरान पवित्रता के लिए,मुख्य चुनाव आयुक्त को एक निष्पक्षहितधारक होना चाहिए.