केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने नई शिक्षा नीति (NEP) में शामिल त्रिभाषा नीति का समर्थन किया और इसे पूरे देश के लिए लाभकारी बताया। उन्होंनेकहा कि इस नीति को लेकर कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं और गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं।
त्रिभाषा नीति पर उठ रहे विवाद पर प्रतिक्रिया
केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लागू की गई त्रिभाषा नीति का उद्देश्य पूरेदेश में समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना है। उन्होंने इस पर हो रही बहस को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे का राजनीतिकरण करनेकी कोशिश कर रहे हैं।
भाषा और धर्म के आधार पर विभाजन का विरोध
रिजिजू ने तिरुवनंतपुरम में प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक और प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान यह बयानदिया। उन्होंने कहा कि भारत विविध भाषाओं और संस्कृतियों का देश है, और इसे भाषा या धर्म के आधार पर बांटना सही नहीं है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी मातृभाषाएं अलग-अलग हैं, फिरभी वे एक साथ मिलकर देश के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। इसी प्रकार, हर भारतीय को एकता बनाए रखनी चाहिए और शिक्षा को राजनीति सेदूर रखना चाहिए।
तमिलनाडु का विरोध और आंध्र प्रदेश का समर्थन
तमिलनाडु सरकार ने नई शिक्षा नीति में त्रिभाषा फॉर्मूले को लेकर कड़ा विरोध जताया है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु में इसेलागू नहीं किया जाएगा, भले ही केंद्र सरकार इसके लिए 10,000 करोड़ रुपये की पेशकश करे।
इसके विपरीत, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने त्रिभाषा नीति का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों को केवल तीन ही नहीं बल्कि अधिकभाषाएं सीखने के अवसर मिलने चाहिए।
राष्ट्रीय एकता की जरूरत
रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हमेशा भारत की एकता और समानता की बात करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी राज्य, समुदाय याभाषा के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए और देश के हर नागरिक को समान अधिकार और अवसर मिलने चाहिए।
उन्होंने सभी राज्यों से आग्रह किया कि वे शिक्षा नीति को राजनीतिक मुद्दा न बनाएं और इसे देश की उन्नति और युवाओं के भविष्य के दृष्टिकोण सेअपनाएं।