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न्यूजीलैंड की अदालत ने 32 वर्षीय बलतेज सिंह को 700 किलो मेथेमफेटामाइन (ड्रग) रखने के आरोप में दोषी पाते हुए 22 साल की सजा सुनाईहै। ऑकलैंड हाई कोर्ट ने 21 फरवरी को यह फैसला सुनाया।

गोपनीय रखा गया नाम
बलतेज के वकीलों ने अदालत से उसका नाम गुप्त रखने की अनुमति मांगी, जिसे स्वीकृति भी मिल गई। हालांकि, इसके पीछे का कारण स्पष्ट नहींकिया गया है।

परिवार ने फैसले को बताया ‘फेक न्यूज़’
पंजाब में बलतेज के परिवार ने इस मामले को ‘फेक न्यूज़’ करार दिया है। उनका कहना है कि अब तक उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारीनहीं मिली है।

ड्रग्स तस्करी में गिरफ्तारी
ऑकलैंड पुलिस ने 2023 में मनुकाउ स्थित एक छोटे गोडाउन पर छापा मारा था, जहाँ बीयर के कैन में छिपाकर रखी गई मेथ ड्रग्स बरामद हुई थी।इसी दौरान बलतेज को गिरफ्तार किया गया था।

मौत के बाद हुई छापेमारी
यह छापा 21 वर्षीय आइडेल सगला की संदिग्ध मौत के बाद मारा गया था। उसे कथित तौर पर बीयर के रूप में मेथेमफेटामाइन दी गई थी, जिससेउसकी जान चली गई। इस मामले में हिमतजीत “जिमी” सिंह को मैनस्लॉटर के आरोप में दोषी ठहराया गया। जिमी ने अदालत में दावा किया कि उसेएक व्यापारी दोस्त ने धोखा दिया था, जो असल में बलतेज सिंह था और ड्रग्स तस्करी का मास्टरमाइंड था।

पैरोल नहीं मिलेगी, दस साल तक अनिवार्य सजा
हालांकि बलतेज पर आइडेल सगला की मौत से जुड़े आरोप नहीं लगे, लेकिन उसे मेथ ड्रग सप्लाई रैकेट का मुख्य साजिशकर्ता माना गया। कोर्ट नेउसे 22 साल की सजा दी, जिसमें कम से कम 10 साल तक उसे पैरोल का अधिकार नहीं मिलेगा।

भारत और पारिवारिक पृष्ठभूमि
बलतेज सिंह के पिता सरवन सिंह अगवान, सतवंत सिंह (भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे) के भाई हैं। उनका परिवार 1980 के दशकमें न्यूजीलैंड जाकर बसा था और ऑकलैंड में एक किराना स्टोर चलाता था। बलतेज 2019 में अंतिम बार भारत आया था और करीब ढाई महीने तकयहां रुका था।

खालिस्तान समर्थक गतिविधियों से जुड़ाव
स्थानीय गुरुद्वारों में बलतेज को सतवंत सिंह के भतीजे के रूप में पहचाना जाता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे खालिस्तान समर्थक गतिविधियों में भीशामिल माना जाता था, लेकिन ड्रग तस्करी और मेथ सप्लाई के कारण वह कानून की गिरफ्त में आ गया।

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