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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद देश भर में सोशल मीडिया पर भड़काऊ और देश विरोधी पोस्ट डालने वालों केखिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों ने सात राज्यों में छापेमारी कर 26 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तार लोगों में एकविधायक, एक पत्रकार, एक वकील और 23 छात्र शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर हमले का समर्थन किया या फिरदेश विरोधी टिप्पणियां कीं, जिससे राष्ट्रीय एकता और शहीदों के सम्मान को ठेस पहुंची।

जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों में उत्तर प्रदेश के एक क्षेत्रीय विधायक शामिल हैं, जिनके विवादास्पद बयान ने काफी हंगामा खड़ा करदिया। वहीं, दिल्ली से जुड़े एक प्रतिष्ठित अखबार के पत्रकार और एक उच्च न्यायालय के वकील को भी देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने केआरोप में पकड़ा गया है। 23 छात्रों को विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से कई ने सोशल मीडिया पर आतंकियोंके समर्थन में पोस्ट साझा किए थे। जांच में सामने आया है कि कई छात्र व्हाट्सएप ग्रुप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए भड़काऊ सामग्री काप्रचार कर रहे थे, और कुछ पोस्ट तो पाकिस्तान समर्थक एजेंडे से प्रेरित नजर आए।

गिरफ्तारियां जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और केरल जैसे सात राज्यों से हुई हैं। जम्मू-कश्मीर से सबसे ज्यादादस छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। उत्तर प्रदेश में विधायक समेत तीन लोगों को, दिल्ली में एक पत्रकार और दो छात्रों को, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल से भी कुछ छात्रों को पकड़ा गया है। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराएँ लगाई गई हैं, जिनमेंदेशद्रोह (धारा 124A), सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास (धारा 153A), आपराधिक षड्यंत्र (धारा 120B) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियमकी धाराएं शामिल हैं।

सरकार ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि देशविरोधी बयानों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गृह मंत्रालय केएक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर नफरत फैलाने की कोशिश करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। सरकार कासाफ कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश की एकता और अखंडता से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।

हालांकि, कुछ छात्र संगठनों ने इन गिरफ्तारियों पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि सभी छात्रों को एक ही तराजू में तौलना ठीक नहीं है। उन्होंनेमांग की है कि जिन छात्रों के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं हैं, उन्हें जल्द रिहा किया जाए। दूसरी ओर, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार किए गएसभी व्यक्तियों के खिलाफ पर्याप्त डिजिटल सबूत मौजूद हैं और पूरी जांच प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है।

सरकार ने इस प्रकरण के मद्देनजर फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (अब X) और व्हाट्सएप जैसी सोशल मीडिया कंपनियों से संपर्क साधा है। विवादितपोस्टों और अकाउंट्स की जानकारी मांगी गई है ताकि कानूनी कार्रवाई को तेज किया जा सके। अब तक कई अकाउंट्स ब्लॉक कर दिए गए हैं औरअन्य पर नजर रखी जा रही है। सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे देशविरोधी सामग्री तुरंत हटाएं और संबंधित यूजर्स की पूरीजानकारी उपलब्ध कराएं।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश में उमड़े जनाक्रोश के बीच सोशल मीडिया पर देश विरोधी पोस्ट करने वालों के खिलाफ सरकार की सख्तकार्रवाई यह संकेत देती है कि भारत अब इस तरह के कृत्यों को बिल्कुल भी सहन नहीं करेगा। यह मामला एक बार फिर रेखांकित करता है कि सोशलमीडिया की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां और कार्रवाई देखने को मिलसकती हैं।

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